कर्नाटक CM शिवकुमार ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से की मुलाकात, शरावती परियोजना और पश्चिमी घाट ESA पर रखी माँगें
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 22 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से भेंट की। इस बैठक में राज्य की विकास प्राथमिकताओं, ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरणीय संवेदनशीलता से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई।
शरावती पंप्ड स्टोरेज परियोजना को शीघ्र मंजूरी का अनुरोध
कर्नाटक सरकार के आधिकारिक एक्स हैंडल पर साझा की गई जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री शिवकुमार ने 2,000 मेगावाट क्षमता वाली शरावती पंप्ड स्टोरेज परियोजना को शीघ्र स्वीकृति दिलाने और सकारात्मक अनुशंसा करने का अनुरोध केंद्रीय मंत्री से किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार द्वारा माँगी गई सभी आवश्यक जानकारियाँ और एनआईएएस रिपोर्ट संबंधित समिति को पहले ही सौंपी जा चुकी हैं।
यह परियोजना कर्नाटक की नवीकरणीय ऊर्जा रणनीति का केंद्रीय हिस्सा है, जो पीक-डिमांड के दौरान बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में सहायक होगी। राज्य सरकार इसे दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानती है।
मेकेदातु परियोजना के लिए भू-तकनीकी सर्वेक्षण की माँग
मुख्यमंत्री ने मेकेदातु बैलेंसिंग रिजर्वायर एवं पेयजल परियोजना के लिए 20 बोरहोल वाले भू-तकनीकी सर्वेक्षण प्रस्ताव पर शीघ्र विचार करने की अपील की। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इस प्रस्ताव में फिलहाल किसी संरक्षित वन क्षेत्र के डायवर्जन की कोई माँग नहीं की गई है, जिससे पर्यावरणीय आपत्तियों की गुंजाइश सीमित होती है।
पश्चिमी घाट ESA अधिसूचना को स्थगित रखने का अनुरोध
बैठक में सीएम शिवकुमार ने पश्चिमी घाट पारिस्थितिक संवेदनशील क्षेत्र (ESA) से संबंधित सातवें मसौदा अधिसूचना को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया स्थगित रखने का आग्रह किया। उनका कहना था कि राज्य सरकार की उच्चस्तरीय समिति की रिपोर्ट और भौतिक सर्वेक्षण पूरा होने से पहले इस पर कोई अंतिम निर्णय उचित नहीं होगा।
गौरतलब है कि पश्चिमी घाट ESA का मुद्दा कर्नाटक, केरल, गोवा और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में सालों से विवाद का विषय रहा है, क्योंकि इससे लाखों किसानों और ग्रामीण समुदायों की भूमि उपयोग नीति प्रभावित होती है।
ईको केन शुगर एनर्जी को ESA से बाहर करने की माँग
मुख्यमंत्री ने ईको केन शुगर एनर्जी लिमिटेड को इको-सेंसिटिव जोन के दायरे से बाहर करने का अनुरोध भी केंद्र के समक्ष रखा। उन्होंने तर्क दिया कि यह कारखाना वर्ष 2016 से पहले स्थापित हो चुका था और इससे 500 से अधिक श्रमिकों तथा करीब 5,000 परिवारों की आजीविका प्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हुई है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के बीच संतुलन बनाए रखने की राज्य सरकार की प्रतिबद्धता भी दोहराई।
केंद्रीय मंत्री की प्रतिक्रिया
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने अपने एक्स पोस्ट में जानकारी साझा करते हुए कहा कि बैठक के दौरान कर्नाटक के सतत विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर 'सार्थक और उपयोगी चर्चा' हुई। हालाँकि उन्होंने राज्य की माँगों पर तत्काल कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया। केंद्र-राज्य सहयोग की इस बैठक को आने वाले समय में कई परियोजनाओं की गति तय करने वाली कड़ी माना जा रहा है।