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शरावती पंप स्टोरेज परियोजना कर्नाटक की बिजली जरूरतों के लिए अनिवार्य: मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार

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शरावती पंप स्टोरेज परियोजना कर्नाटक की बिजली जरूरतों के लिए अनिवार्य: मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार

सारांश

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने KPCL के 57वें स्थापना दिवस पर साफ कहा — शरावती पंप स्टोरेज परियोजना से पीछे नहीं हटेंगे। विरोध के बावजूद वैधानिक स्वीकृतियाँ जारी हैं। साथ ही गृह ज्योति और कृषि सब्सिडी से राज्य को ₹30,000 करोड़ की सालाना बचत का दावा।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 20 जुलाई 2026 को शरावती पंप स्टोरेज परियोजना को राज्य की बिजली जरूरतों के लिए अनिवार्य बताया।
परियोजना के लिए आवश्यक वैधानिक स्वीकृतियाँ प्राप्त करने की प्रक्रिया जारी; विरोध के बावजूद सरकार पीछे नहीं हटेगी।
पावागड़ा सोलर पार्क वर्तमान में 2,000 मेगावाट उत्पादन कर रहा है; किसान 10,000 एकड़ अतिरिक्त भूमि देने को तैयार।
गृह ज्योति योजना के तहत 1.61 करोड़ परिवारों को मुफ्त बिजली; वार्षिक व्यय लगभग ₹10,000 करोड़ ।
कृषि पंप सेट सब्सिडी पर सालाना ₹20,000 करोड़ ; दोनों योजनाओं से नागरिकों को कुल ₹30,000 करोड़ की बचत का दावा।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने 20 जुलाई 2026 को स्पष्ट किया कि शरावती पंप स्टोरेज परियोजना राज्य की भविष्य की बिजली आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अपरिहार्य है और सरकार किसी भी विरोध के बावजूद इसे पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। वे बेंगलुरु के पैलेस रोड स्थित बेंगलुरु सिटी यूनिवर्सिटी के ज्ञान ज्योति सभागार में कर्नाटक पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (KPCL) के 57वें स्थापना दिवस समारोह के उद्घाटन के बाद संबोधित कर रहे थे।

परियोजना की स्थिति और सरकार का रुख

शिवकुमार ने कहा कि शरावती पंप स्टोरेज परियोजना की नींव काफी पहले रखी गई थी, किंतु तब यह साकार नहीं हो सकी। उन्होंने बताया कि अब इसे लागू करने के प्रयास तेज़ कर दिए गए हैं और आवश्यक वैधानिक स्वीकृतियाँ प्राप्त करने की प्रक्रिया जारी है। 'कुछ लोग आपत्ति जता रहे हैं, लेकिन हम इस परियोजना से पीछे नहीं हटेंगे जो राज्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है' — यह उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा।

येलाहांका और पावागड़ा: पिछली परियोजनाओं से सबक

मुख्यमंत्री ने येलाहांका गैस आधारित विद्युत संयंत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि उस परियोजना का भी शुरुआत में कड़ा विरोध हुआ था, लेकिन राज्य हित में उसे लागू किया गया और वह अब सफलतापूर्वक बिजली उत्पादन कर रही है। इसी क्रम में उन्होंने पावागड़ा सोलर पार्क का ज़िक्र किया, जहाँ किसानों को भूमि अधिग्रहण के बजाय परियोजना में हिस्सेदार बनाया गया — एक मॉडल जो पूरे देश के लिए मिसाल बन गया।

पावागड़ा सोलर पार्क वर्तमान में 2,000 मेगावाट बिजली उत्पादन कर रहा है। शिवकुमार ने बताया कि क्षेत्र के किसान अब विस्तार के लिए स्वेच्छा से 10,000 एकड़ अतिरिक्त भूमि देने को तैयार हैं और विस्तार कार्य शीघ्र आरंभ होगा।

गृह ज्योति योजना और बिजली सब्सिडी का बोझ

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार गृह ज्योति योजना के तहत 1.61 करोड़ परिवारों को निःशुल्क बिजली प्रदान कर रही है, जिस पर प्रतिवर्ष लगभग ₹10,000 करोड़ व्यय होता है। इसके अतिरिक्त, कृषि पंप सेटों को मुफ्त बिजली देने के लिए सालाना ₹20,000 करोड़ की सब्सिडी दी जाती है। शिवकुमार के अनुसार, इन दोनों पहलों के कारण राज्य के नागरिकों को कुल मिलाकर लगभग ₹30,000 करोड़ की वार्षिक बचत हो रही है।

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब राज्य की बिजली माँग तेज़ी से बढ़ रही है और मुफ्त बिजली योजनाओं के कारण KPCL पर वित्तीय दबाव भी बढ़ा है।

KPCL कर्मचारियों को 'टीम कर्नाटक' का आह्वान

समारोह में शिवकुमार ने KPCL के कर्मचारियों को 'टीम कर्नाटक' की भावना से काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि KPCL ने गृह ज्योति योजना को सफल बनाने में निर्णायक भूमिका निभाई है और राज्य के विकास एवं समृद्धि के लिए सामूहिक प्रयास जारी रहने चाहिए।

शरावती परियोजना के कार्यान्वयन की समयसीमा और तकनीकी विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं; वैधानिक स्वीकृतियाँ मिलने के बाद आगे की रूपरेखा स्पष्ट होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि शरावती परियोजना का विरोध केवल 'कुछ लोगों' तक सीमित है या इसमें पर्यावरणीय और स्थानीय समुदायों की गहरी आपत्तियाँ भी शामिल हैं — जिनका उल्लेख सरकार ने टाला। दूसरी ओर, ₹30,000 करोड़ की 'बचत' का दावा तब और पेचीदा हो जाता है जब KPCL पर सब्सिडी का बोझ बढ़ता जा रहा है और शरावती जैसी महँगी परियोजनाओं की ज़रूरत इसी बढ़ती माँग से उपजती है। येलाहांका और पावागड़ा के उदाहरण प्रेरक हैं, पर पंप स्टोरेज परियोजनाएँ पारिस्थितिकी रूप से कहीं अधिक संवेदनशील होती हैं — इस अंतर को नज़रअंदाज़ करना जवाबदेही की कमी को दर्शाता है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शरावती पंप स्टोरेज परियोजना क्या है?
शरावती पंप स्टोरेज परियोजना कर्नाटक सरकार की एक जलविद्युत भंडारण पहल है, जिसका उद्देश्य राज्य की बढ़ती बिजली माँग को पूरा करना है। इसकी नींव पहले रखी गई थी लेकिन तब यह साकार नहीं हो सकी; अब वैधानिक स्वीकृतियाँ प्राप्त कर इसे लागू करने के प्रयास जारी हैं।
परियोजना का विरोध क्यों हो रहा है?
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने स्वीकार किया कि कुछ लोग परियोजना पर आपत्ति जता रहे हैं, हालाँकि विरोध के विस्तृत कारण सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं किए गए। सरकार ने कहा है कि राज्य हित में परियोजना से पीछे नहीं हटा जाएगा।
गृह ज्योति योजना पर कर्नाटक सरकार कितना खर्च करती है?
राज्य सरकार गृह ज्योति योजना के तहत 1.61 करोड़ परिवारों को मुफ्त बिजली देती है, जिस पर सालाना लगभग ₹10,000 करोड़ व्यय होता है। इसके अलावा कृषि पंप सेटों की मुफ्त बिजली के लिए ₹20,000 करोड़ की वार्षिक सब्सिडी अलग से दी जाती है।
पावागड़ा सोलर पार्क का विस्तार कब होगा?
मुख्यमंत्री शिवकुमार के अनुसार पावागड़ा सोलर पार्क का विस्तार शीघ्र शुरू होगा। क्षेत्र के किसान स्वेच्छा से 10,000 एकड़ अतिरिक्त भूमि देने को तैयार हैं; पार्क वर्तमान में 2,000 मेगावाट बिजली उत्पादन कर रहा है।
KPCL का 57वाँ स्थापना दिवस कहाँ मनाया गया?
KPCL का 57वाँ स्थापना दिवस समारोह बेंगलुरु के पैलेस रोड स्थित बेंगलुरु सिटी यूनिवर्सिटी के ज्ञान ज्योति सभागार में आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने इस समारोह का उद्घाटन किया।
राष्ट्र प्रेस
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