क्या ईडी ने सोबरन सिंह अपौरिया के खिलाफ पीएमएलए के तहत शिकायत दर्ज की?
सारांश
Key Takeaways
- सोबरन सिंह अपौरिया पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं।
- ईडी ने पीएमएलए के तहत चार्जशीट दायर की है।
- जांच में अवैध संपत्ति अर्जित करने के सबूत मिले हैं।
- यह मामला सरकारी अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का उदाहरण है।
- अदालत ने प्री-कॉग्निजेंस सुनवाई के लिए नोटिस जारी किया है।
भोपाल, 20 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के भोपाल क्षेत्रीय कार्यालय ने भोपाल के पूर्व वरिष्ठ जिला पंजीयक (सीनियर डिस्ट्रिक्ट रजिस्ट्रार) सोबरन सिंह अपौरिया के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के अंतर्गत अभियोजन शिकायत (चार्जशीट) दायर की है।
यह शिकायत 19 जनवरी को भोपाल की विशेष पीएमएलए अदालत में प्रस्तुत की गई। अदालत ने आरोपी के खिलाफ प्री-कॉग्निजेंस सुनवाई के लिए नोटिस भी जारी किया है।
ईडी ने यह जांच एसपीई, लोकायुक्त कार्यालय, भोपाल द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। एफआईआर में सोबरन सिंह अपौरिया के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था।
जांच में यह सामने आया कि सोबरन सिंह अपौरिया ने सार्वजनिक सेवक के रूप में वरिष्ठ जिला पंजीयक, भोपाल के पद पर रहते हुए अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग किया और अपनी ज्ञात आय से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित की। जांच में पाया गया कि उन्होंने लगभग 97,13,289 रुपए की संपत्ति अपनी ज्ञात आय से असंगत रूप से अर्जित की।
जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपी अपराध से अर्जित आय (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) का लाभार्थी था और अनुसूचित अपराध से उत्पन्न धनराशि के संबंध में उसने धन शोधन का अपराध किया। जांच अवधि के दौरान आरोपी ने अपने पद का दुरुपयोग कर बड़ी मात्रा में अवैध संपत्ति एकत्र की।
ईडी ने बताया कि इसके बाद आरोपी ने उक्त अवैध धन को अपने पास रखने, छिपाने और उसका उपयोग करने के लिए सुनियोजित तरीके से धन शोधन की प्रक्रिया अपनाई। आरोप है कि उसने परिवार के सदस्यों के नाम पर संचालित कई बैंक खातों के माध्यम से अवैध नकदी को घुमाया और उसे वित्तीय साधनों तथा अचल संपत्तियों में निवेश कर वैध धन के रूप में दिखाने का प्रयास किया।
ईडी के मुताबिक, सोबरन सिंह अपौरिया ने जानबूझकर अपराध से अर्जित आय को हासिल किया, अपने पास रखा, छिपाया और उसका उपयोग किया तथा उसे बेदाग दिखाने का प्रयास किया, जो कि पीएमएलए के प्रावधानों के तहत दंडनीय अपराध है। मामले में आगे की कार्रवाई जारी है।