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क्या कर्नाटक सरकार सभी स्थानीय निकाय चुनावों को एक साथ कराने पर विचार कर रही है?

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क्या कर्नाटक सरकार सभी स्थानीय निकाय चुनावों को एक साथ कराने पर विचार कर रही है?

सारांश

कर्नाटक सरकार ने घोषणा की है कि वह सभी स्थानीय निकाय चुनावों को एक साथ कराने पर विचार कर रही है। उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने इस विषय पर मीडिया से बात की। यह निर्णय विभिन्न चुनावों के समन्वय को लेकर है। क्या इससे चुनाव प्रक्रिया में सुधार होगा? जानिए इस खबर के बारे में और अधिक।

मुख्य बातें

कर्नाटक सरकार सभी स्थानीय निकाय चुनावों को एक साथ कराने पर विचार कर रही है।
डीके शिवकुमार ने युवाओं के नेतृत्व की आवश्यकता पर जोर दिया।
मतदाताओं की मसौदा सूची जारी की गई है।
मतपत्रों के उपयोग का मामला राज्य चुनाव आयोग के अंतर्गत है।
सभी चुनावों का समन्वय सुनिश्चित करने का प्रयास जारी है।

बेंगलुरु, 19 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। कर्नाटक सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि वह बेंगलुरु में होने वाले नगर निगम चुनावों सहित सभी स्थानीय निकाय चुनावों को एक साथ आयोजित करने की योजना बना रही है।

उपमुख्यमंत्री और राज्य कांग्रेस के अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने सोमवार को मीडिया से संवाद करते हुए यह जानकारी साझा की।

ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (जीबीए) चुनावों के लिए मतदाताओं का मसौदा सूची सोमवार को जारी किया गया।

शिवकुमार ने नगरपालिका चुनाव के संदर्भ में कहा, "अदालत ने अपने निर्देश जारी कर दिए हैं। हमारी सरकार 73वें और 74वें संवैधानिक संशोधनों के प्रति प्रतिबद्ध है। युवाओं को नेतृत्व की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।"

वर्तमान में बेंगलुरु में पाँच नगर निगमों से 369 वार्ड बने हुए हैं।

बेंगलुरु के बाहरी क्षेत्रों को नगरपालिका क्षेत्र के अंतर्गत लाने पर भी चर्चा जारी है।

शिवकुमार ने कहा, "हमारी सरकार ने जिला और तालुक पंचायत चुनाव आयोजित करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री और मंत्रियों ने कहा है कि इन चुनावों से जुड़े आरक्षण संबंधी मुद्दों का समाधान किया जाएगा। कई लोगों ने सुझाव दिए हैं कि ग्राम पंचायत चुनाव भी पार्टी चिन्हों पर होने चाहिए, लेकिन इस पर अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया। इन सभी चुनावों को एक साथ कराने पर गहराई से विचार किया जा रहा है।"

स्थानीय निकाय चुनावों में ईवीएम के बजाय मतपत्रों के उपयोग पर पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "मुझे भी इस विषय में जानकारी मिली है। यह मामला राज्य चुनाव आयोग के अंतर्गत आता है। मतपत्रों का उपयोग करने में कोई बुराई नहीं है। चुनाव के तरीके से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि मतदान हो।"

उपमुख्यमंत्री ने कहा, "मतदाताओं का मसौदा सूची जारी कर दी गई है और हमने बूथ स्तर के प्रतिनिधियों (बीएलए) के साथ व्यवस्थाएं कर ली हैं। यदि किसी मतदाता का नाम सूची में नहीं है, तो उन्हें एक और मौका दिया जाना चाहिए। हम अधिकारियों के कार्य में हस्तक्षेप नहीं करेंगे। चुनाव आयोग मौजूदा कानूनी ढांचे के भीतर ही कार्य करेगा।"

जब उनसे पूछा गया कि क्या केंद्रीय चुनाव आयोग पर अविश्वास के कारण मतपत्रों का उपयोग किया जा रहा है, तो उन्होंने कहा, "चुनाव कराने वाले हम कौन होते हैं? चुनाव तो चुनाव आयोग ही कराता है। राज्य चुनाव आयोग हमारी सरकार के नियंत्रण में नहीं है। वह अपने अनुसार तय करेगा कि क्या करना है।"

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके साथ ही इसे प्रभावी ढंग से लागू करने की आवश्यकता है। सभी पक्षों के हितों को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया जा रहा है।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक सरकार सभी स्थानीय निकाय चुनावों को एक साथ क्यों कराने पर विचार कर रही है?
सरकार का उद्देश्य चुनावों के समन्वय को बढ़ावा देना और प्रक्रिया को सरल बनाना है।
डीके शिवकुमार ने इस विषय पर क्या कहा?
डीके शिवकुमार ने कहा कि युवाओं को नेतृत्व की जिम्मेदारी लेनी चाहिए और सरकार सभी संवैधानिक संशोधनों के प्रति प्रतिबद्ध है।
मतपत्रों के उपयोग पर क्या विचार है?
शिवकुमार ने कहा कि मतपत्रों का उपयोग करने में कोई बुराई नहीं है, महत्वपूर्ण यह है कि मतदान हो।
राष्ट्र प्रेस
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