दीपावली पर वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित अग्रिम मोर्चे पर, जवानों-अग्निवीर वायु संग मनाया त्योहार
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित ने 8 नवंबर 2026 को दीपावली के अवसर पर वायुसेना के एक अग्रिम क्षेत्र स्थित स्टेशन का दौरा किया और वहाँ तैनात वायु योद्धाओं तथा अग्निवीर वायु के साथ मिलकर पर्व की खुशियाँ साझा कीं। उन्होंने जवानों को मिठाइयाँ बाँटीं और देश की हवाई सीमाओं की रक्षा में जुटे सैनिकों को दीपावली की शुभकामनाएँ दीं।
अग्रिम मोर्चे पर पहुँचे वायुसेना प्रमुख
एयर चीफ मार्शल दीक्षित ने अग्रिम क्षेत्र के स्टेशन पर तैनात वायु योद्धाओं और अग्निवीर वायु कर्मियों से सीधा संवाद किया। इस मुलाकात में उन्होंने उन जवानों की प्रशंसा की, जो दीपावली जैसे महत्वपूर्ण पारिवारिक त्योहार पर भी अपने परिजनों से दूर रहकर देश की हवाई सुरक्षा की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
उन्होंने जवानों की अटूट प्रतिबद्धता, कर्तव्यनिष्ठा और देश की हवाई सीमाओं को सुरक्षित रखने के उनके निरंतर प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि त्योहारों के मौके पर जब देश का हर परिवार उत्सव मना रहा होता है, तब अग्रिम चौकियों पर तैनात वायु योद्धा पूरी सतर्कता के साथ अपनी ड्यूटी को प्राथमिकता देते हैं।
वायु योद्धाओं के त्याग की सराहना
वायुसेना प्रमुख ने इस यात्रा के ज़रिए यह संदेश दिया कि अग्रिम मोर्चों पर तैनात जवानों का योगदान और बलिदान राष्ट्र की नींव है। परिवारों से दूर रहकर पर्व मनाने वाले ये सैनिक अपने कर्तव्य को सर्वोपरि रखते हुए देश के आकाश की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सिक्किम में
इसी अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सिक्किम के शेराथांग में भारतीय थलसेना के जवानों के साथ दीपावली मनाई। उन्होंने शेराथांग युद्ध स्मारक पर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की और जवानों को त्योहार की शुभकामनाएँ दीं।
सैनिकों को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि 'तकनीक कितनी भी आधुनिक क्यों न हो, अगर जवान के अंदर अनुशासन और साहस नहीं है, तो तकनीक बेकार है। जवानों का अनुशासन ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है।'
सेना और समाज के रिश्ते पर रक्षा मंत्री के विचार
राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि जवान जिस चौकी पर तैनात हैं, वहाँ उनका व्यवहार, वर्दी, भाषा और संयम स्थानीय लोगों के मन में सेना की छवि निर्मित करते हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि शेराथांग और आसपास के क्षेत्रों में आम नागरिकों का सेना के प्रति गहरा स्नेह है और इस विश्वास को बनाए रखना भी जवानों की जिम्मेदारी है।
दीपावली के प्रतीकात्मक महत्व का उल्लेख करते हुए रक्षा मंत्री ने सैनिकों की भूमिका को जलते दीये से जोड़ा। उन्होंने कहा कि 'जिस प्रकार दीपावली का दीया बिना शोर किए अंधेरे से लड़ता है, आपका जीवन भी ऐसा ही है। आप शोर नहीं करते, लेकिन अपनी उपस्थिति से पूरे देश को सुरक्षा का भरोसा देते हैं। आपके कारण देश के नागरिक चैन से सोते हैं और दीपावली के दीये और भी रोशन लगते हैं।'
आगे का संदर्भ
वायुसेना प्रमुख का अग्रिम मोर्चे पर दीपावली मनाना और रक्षा मंत्री का सीमावर्ती क्षेत्र में सैनिकों के साथ उत्सव में शामिल होना, देश के शीर्ष सैन्य एवं राजनीतिक नेतृत्व की उस परंपरा को दर्शाता है जिसमें त्योहारों पर अग्रिम मोर्चों पर जाकर जवानों का मनोबल बढ़ाया जाता है। यह परंपरा आगे भी ऐसे ही जारी रहने की उम्मीद है।