बलूचिस्तान के डेरा बुगती में स्कूल बंद, शिक्षकों की भारी कमी — बलूच लिटरेसी कैंपेन ने उठाई आवाज़
सारांश
मुख्य बातें
बलूचिस्तान के डेरा बुगती ज़िले में शिक्षा व्यवस्था गहरे संकट में है — बलूच स्टूडेंट्स एक्शन कमेटी (BSAC) की पहली बलूच लिटरेसी कैंपेन (BLC) ने 22 सितंबर 2026 को एक विस्तृत रिपोर्ट जारी कर चेतावनी दी कि ज़िले में कई स्कूल पूरी तरह बंद हो चुके हैं या केवल आंशिक रूप से ही संचालित हो रहे हैं। शिक्षकों की भारी कमी और बुनियादी संसाधनों के अभाव के चलते ज़िले की साक्षरता दर में लगातार और खतरनाक गिरावट दर्ज की जा रही है।
मुख्य घटनाक्रम
BLC ने डेरा बुगती के अलग-अलग स्कूलों से एकत्र किए गए आँकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि शैक्षणिक संस्थान दो बड़ी समस्याओं से एक साथ जूझ रहे हैं — पूर्ण रूप से काम न करना और ज़रूरी शैक्षणिक संसाधनों की किल्लत। संगठन का कहना है कि इन स्थितियों के कारण स्थानीय बच्चों की शिक्षा तक पहुँच बुरी तरह बाधित हो गई है।
BLC ने अपने बयान में कहा, 'स्कूलों का पूरी तरह बंद होना, शिक्षण स्टाफ की कमी और शैक्षणिक संसाधनों का अभाव सिर्फ प्रशासनिक नाकामी नहीं हैं — ये ऐसी रुकावटें हैं जो सीधे बच्चों के भविष्य और ज़िले की शिक्षा को प्रभावित करती हैं।'
संवैधानिक अधिकार और प्रशासनिक जवाबदेही
BLC ने ज़ोर देकर कहा कि शिक्षा एक मौलिक अधिकार है और हर बच्चे को — चाहे उसका स्थान, राष्ट्रीयता या लिंग कुछ भी हो — पाकिस्तान के संविधान के तहत सीखने का यह अधिकार प्राप्त है। संगठन ने कहा कि डेरा बुगती में स्कूलों का लगातार बंद रहना गंभीर चिंता का विषय है और इस पर तत्काल प्रशासनिक कार्रवाई की ज़रूरत है।
गौरतलब है कि BLC ने पिछले महीने भी इसी ज़िले के पीर शरी दरबार इलाके के बच्चों का मुद्दा उठाया था, जिनके आसपास कोई चालू स्कूल न होने के कारण वे शिक्षा से पूरी तरह वंचित थे। उस समय भी स्थानीय समुदाय ने स्कूल की मरम्मत और संचालन बहाली की माँग की थी।
पूरे बलूचिस्तान में फैला संकट
BLC ने स्पष्ट किया कि यह समस्या केवल डेरा बुगती तक सीमित नहीं है। संगठन के अनुसार, बलूचिस्तान के कई इलाकों में स्कूली इमारतें खंडहर बन चुकी हैं — कामकाजी शैक्षणिक केंद्रों की जगह जर्जर ढाँचे खड़े हैं। BLC ने कहा, 'ऐसे सभी स्कूलों को जल्द से जल्द पुनर्निर्मित और जीर्णोद्धार किया जाना चाहिए।'
यह ऐसे समय में आया है जब बलूचिस्तान पहले से ही पाकिस्तान के सबसे कम साक्षरता दर वाले प्रांतों में गिना जाता है, और शिक्षा क्षेत्र में दशकों से संरचनात्मक उपेक्षा के आरोप लगते रहे हैं।
संगठन की माँगें
बलूच स्टूडेंट्स एक्शन कमेटी ने पाकिस्तानी अधिकारियों से तीन ठोस कदम उठाने की माँग की है: डेरा बुगती के बंद स्कूलों को तत्काल खोला जाए; आवश्यक शिक्षकों की नियुक्ति की जाए; और बेहतर शैक्षणिक माहौल के लिए ज़रूरी सेवाएँ उपलब्ध कराई जाएँ। संगठन ने चेताया कि डेरा बुगती के विद्यार्थियों के शैक्षणिक अधिकारों को और अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए।
आगे की राह
BLC की यह मुहिम बलूचिस्तान में नागरिक समाज संगठनों की बढ़ती सक्रियता को दर्शाती है, जो प्रशासनिक जवाबदेही की माँग को लेकर सामने आ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक शिक्षक नियुक्ति, बजट आवंटन और बुनियादी ढाँचे की मरम्मत पर ठोस नीतिगत कदम नहीं उठाए जाते, बलूचिस्तान की साक्षरता खाई और गहरी होती जाएगी।