विदेश सचिव विक्रम मिस्री का भूटान दौरा: ₹4,000 करोड़ की ऊर्जा ऋण सुविधा और 12 नई परियोजनाओं को मंजूरी
सारांश
मुख्य बातें
भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने 30 जुलाई 2026 से भूटान के आधिकारिक दौरे पर, भूटान के विदेश सचिव पेमा लेकटुप दोरजी के साथ 5वीं भारत-भूटान विकास सहयोग वार्ता की सह-अध्यक्षता की — जो 13वीं पंचवर्षीय योजना (2024-29) के तहत द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा का प्रमुख मंच है। इस दौरे में ऊर्जा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढाँचे और ई-मोबिलिटी क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण समझौते और परियोजनाएँ मूर्त रूप लेती दिखीं।
उच्चस्तरीय बैठकें और मुलाकातें
विदेश सचिव मिस्री ने दौरे के दौरान भूटान के राजा से मुलाकात की। इसके अलावा उन्होंने प्रधानमंत्री शेरिंग टोबग और विदेश एवं बाहरी व्यापार मंत्री ल्योनपो डी.एन. धुंग्येल से भी अलग-अलग बैठकें कीं। दोनों पक्षों ने विकास साझेदारी, ऊर्जा, व्यापार और निवेश, कनेक्टिविटी, लोगों के बीच संपर्क तथा अन्य क्षेत्रीय मुद्दों पर व्यापक चर्चा की।
₹10,000 करोड़ की सहायता की समीक्षा और 12 नई परियोजनाएँ
5वीं योजना वार्ता में भारत सरकार द्वारा भूटान की 13वीं पंचवर्षीय योजना अवधि (2024-29) के लिए दी जा रही ₹10,000 करोड़ (100 अरब भूटानी न्गुलट्रम) की सहायता की समग्र प्रगति और क्रियान्वयन की समीक्षा की गई। इस सहायता में परियोजना संबद्ध सहायता (PTA), उच्च प्रभाव सामुदायिक विकास परियोजनाएँ (HICDP), आर्थिक प्रोत्साहन कार्यक्रम (ESP) और कार्यक्रम अनुदान शामिल हैं।
इस बैठक में 12 नई PTA परियोजनाओं को मंजूरी दी गई, जिनकी कुल राशि ₹332 करोड़ (3,320 मिलियन भूटानी न्गुलट्रम) है। ये परियोजनाएँ बुनियादी ढाँचा, स्वास्थ्य, कृषि, शहरी सुविधाएँ और आपदा प्रबंधन क्षेत्रों को कवर करती हैं। इस मंजूरी के साथ 13वीं पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत अब तक कुल 82 PTA परियोजनाओं को स्वीकृति मिल चुकी है, जिनकी संचित राशि ₹6,860 करोड़ (68,600 मिलियन न्गुलट्रम) है।
निधि वितरण और क्रियान्वयन की स्थिति
भारत सरकार ने ESP के लिए ₹1,250 करोड़ (12,500 मिलियन न्गुलट्रम), HICDP के लिए ₹735.20 करोड़ (7,352 मिलियन न्गुलट्रम) और कार्यक्रम अनुदान के लिए ₹200 करोड़ (2,000 मिलियन न्गुलट्रम) की राशि जारी की है। बैठक में इन निधियों के उपयोग की प्रगति की भी विस्तृत समीक्षा की गई।
गौरतलब है कि भारत की ओर से भूटान को मिलने वाली यह सहायता दक्षिण एशिया में भारत के किसी एकल पड़ोसी देश को दी जाने वाली सबसे बड़ी विकास सहायताओं में से एक है, जो दोनों देशों के बीच विशेष रणनीतिक संबंधों को रेखांकित करती है।
ऊर्जा और स्वास्थ्य क्षेत्र में अहम समझौते
दोनों विदेश सचिवों की उपस्थिति में दो महत्वपूर्ण दस्तावेज़ों का आदान-प्रदान हुआ। पहला, भूटान में ऊर्जा परियोजनाओं के लिए ₹4,000 करोड़ की रियायती ऋण सुविधा को सक्रिय करने हेतु भूटान की रॉयल सरकार (RGOB) और एक्ज़िम बैंक ऑफ इंडिया के बीच एक अम्ब्रेला लाइन ऑफ क्रेडिट समझौते पर हस्ताक्षर हुए। दूसरा, स्वास्थ्य शिक्षा और प्रशिक्षण में अनुसंधान एवं आदान-प्रदान कार्यक्रमों के सहयोग के लिए अखिल भारतीय आयुर्वेद विज्ञान संस्थान (AIIA), नई दिल्ली और खेसर ग्यालपो यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंस ऑफ भूटान (KGUMSB) के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर हुए।
हरित बुनियादी ढाँचा और ई-मोबिलिटी
दोनों विदेश सचिवों ने PTA परियोजना 'ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर एंड ओपन स्पेसेस इन थिम्पू' के तहत निर्मित थिम्पू इकोलॉजिकल पार्क और ओलाखा पार्क का वर्चुअल उद्घाटन किया। इसके साथ ही PTA परियोजना 'एक्सेलरेट ई-मोबिलिटी अपटेक इन भूटान' के अंतर्गत खरीदे गए 45 इलेक्ट्रिक वाहन RGOB को सौंपे गए।
यह ऐसे समय में आया है जब भूटान अपनी ऊर्जा और परिवहन प्रणालियों को हरित बनाने की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ा रहा है। दोनों पक्ष अगली योजना वार्ता नई दिल्ली में आपसी सहमति से तय तारीख पर आयोजित करने पर सहमत हुए।