क्या भूटान ने नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए सौर ऊर्जा परियोजना पर कार्य आरंभ किया?

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क्या भूटान ने नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए सौर ऊर्जा परियोजना पर कार्य आरंभ किया?

सारांश

भूटान ने अपनी नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए जिग्मे नामग्याल इंजीनियरिंग कॉलेज में 240 किलोवाट की सौर परियोजना का भूमि पूजन किया। भारत ने इस प्रयास में भूटान का समर्थन करने की घोषणा की। यह परियोजना दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग को और मजबूत बनाएगी।

मुख्य बातें

भूटान ने सौर ऊर्जा परियोजना पर कार्य शुरू किया है।
भारत ने 4,000 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता की घोषणा की है।
सोलर एनर्जी इंटरनेशनल के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
सौर, पवन, बायोमास परियोजनाओं पर दोनों देश मिलकर काम करेंगे।
यह परियोजना भूटान की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगी।

नई दिल्ली, 15 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। हिमालयी राज्य भूटान ने अपनी नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने की रणनीति के तहत देवथान में स्थित जिग्मे नामग्याल इंजीनियरिंग कॉलेज में गुरुवार को 240 किलोवाट की ग्रिड-एकीकृत और 25 किलोवाट की ऑफ-ग्रिड सौर परियोजना के लिए भूमि पूजन समारोह का आयोजन किया।

थिम्पू में स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्‍स' पर लिखा, "भारत भूटान के स्वच्छ ऊर्जा दृष्टिकोण और सौर क्षमता विकास का समर्थन करने के लिए ख़ुश है।"

इस सप्ताह की शुरुआत में, भूटान के स्वच्छ ऊर्जा दृष्टिकोण के लिए एक कदम के रूप में, फुएत्योलिंग के विज्ञान और प्रौद्योगिकी महाविद्यालय में 200 किलोवाट की रूफटॉप सौर परियोजना के लिए एक शिलान्यास समारोह भी आयोजित किया गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 11 नवंबर 2025 को भूटान यात्रा के दौरान दोनों देशों की सरकारों ने नवीकरणीय ऊर्जा पर संयुक्त रूप से कार्य करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। सौर एनर्जी इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, यह समझौता भूटान के ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधन मंत्रालय और भारत के नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के बीच हुआ।

पीएम मोदी ने इस समझौते को दोनों देशों के संबंधों का एक नया और महत्वपूर्ण हिस्सा बताया, क्योंकि इससे भूटान की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और नवीकरणीय ऊर्जा में भारत के अनुभव का लाभ उठाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, बायोमास, हरित हाइड्रोजन और ऊर्जा भंडारण से संबंधित परियोजनाओं पर मिलकर काम करेंगे।

यह समझौता ऐसे समय पर हुआ है जब कई भारतीय निजी कंपनियों ने भूटान के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में रुचि दिखाई है और जलविद्युत, सौर और ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं में निवेश कर रही हैं।

समझौते के अंतर्गत, दोनों देश सौर, पवन, बायोमास और हरित हाइड्रोजन परियोजनाओं के विकास के साथ-साथ ऊर्जा भंडारण प्रौद्योगिकियों पर मिलकर कार्य करेंगे। यह योजना स्वच्छ और विश्वसनीय ऊर्जा परियोजनाओं के निर्माण के लिए भारत के तकनीकी ज्ञान और भूटान की प्राकृतिक ऊर्जा क्षमता को जोड़ती है।

भारत ने भूटान की ऊर्जा परियोजनाओं को समर्थन देने के लिए 4,000 करोड़ रुपए की लाइन ऑफ क्रेडिट की भी घोषणा की है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस वित्तीय सहायता का प्रयोग नई साझेदारी के तहत सहमत नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को कार्यान्वित करने के लिए किया जाएगा।

इस समझौते से दोनों देशों के बीच संयुक्त अनुसंधान, प्रशिक्षण और प्रौद्योगिकी साझाकरण के लिए नए रास्ते खुलने की उम्मीद है और इसका उद्देश्य स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा परियोजनाओं के माध्यम से मजबूत आर्थिक संबंधों और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि भूटान का यह कदम न केवल अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि भारत के साथ सहयोग को भी नया आयाम देगा। यह नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में दोनों देशों के लिए एक सकारात्मक दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भूटान की सौर ऊर्जा परियोजना का उद्देश्य क्या है?
भूटान की सौर ऊर्जा परियोजना का मुख्य उद्देश्य नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देना और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है।
इस परियोजना में भारत का क्या योगदान है?
भारत ने भूटान के स्वच्छ ऊर्जा दृष्टिकोण का समर्थन करते हुए, इस परियोजना के लिए तकनीकी सहयोग और वित्तीय सहायता की पेशकश की है।
भूटान में और कौन-कौन सी नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएं चल रही हैं?
भूटान में जलविद्युत, सौर और बायोमास परियोजनाएं भी चल रही हैं, जिनमें भारतीय कंपनियों का निवेश हो रहा है।
राष्ट्र प्रेस