जयशंकर की बहरीन में बड़ी बैठक: उप प्रधानमंत्री खालिद अल खलीफा से द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 7 जुलाई 2026 को मनामा में बहरीन के उप प्रधानमंत्री महामहिम खालिद बिन अब्दुल्ला अल खलीफा से मुलाकात की। छह देशों की यात्रा के तीसरे दिन हुई इस बैठक में दोनों नेताओं ने भारत-बहरीन द्विपक्षीय सहयोग को विस्तार देने और क्षेत्रीय स्थिति पर विचारों का आदान-प्रदान किया। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक परिस्थितियाँ तेज़ी से बदल रही हैं।
बैठक में क्या हुआ
जयशंकर ने एक्स पर पोस्ट कर बैठक की जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा, 'मंगलवार सुबह बहरीन के उप प्रधानमंत्री महामहिम खालिद बिन अब्दुल्ला अल खलीफा से मिलकर खुशी हुई। हमने विभिन्न क्षेत्रों में अपने द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा की। साथ ही क्षेत्रीय स्थिति पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया।'
दोनों पक्षों ने भारत-बहरीन संबंधों को और मज़बूत करने तथा आपसी हितों से जुड़े क्षेत्रीय मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने को लेकर भी बातचीत की।
यात्रा का व्यापक दायरा
विदेश मंत्री 5 जुलाई 2026 को छह देशों — कतर, बहरीन, कुवैत, ओमान, बेल्जियम और अमेरिका — की आधिकारिक यात्रा पर रवाना हुए। विदेश मंत्रालय (MEA) के बयान के अनुसार, 5 से 10 जुलाई तक खाड़ी के चार देशों की यात्रा में जयशंकर अपने समकक्षों और वहाँ के नेतृत्व से मुलाकात करेंगे। यात्रा का मुख्य उद्देश्य इन देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को सुदृढ़ करना और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर विचार-विमर्श करना है।
यात्रा की अहम टाइमिंग
यह यात्रा ऐसे नाज़ुक दौर में हो रही है जब अमेरिका-ईरान शांति समझौते के बाद पश्चिम एशिया की राजनीतिक परिस्थितियों में उल्लेखनीय बदलाव आ रहे हैं। गौरतलब है कि खाड़ी देशों में भारतीय प्रवासी समुदाय की बड़ी उपस्थिति है और इन देशों के साथ भारत के ऊर्जा एवं व्यापार संबंध भी अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं। ऐसे में जयशंकर की इस दौरे की कूटनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है।
आगे का कार्यक्रम
खाड़ी दौरे के बाद विदेश मंत्री 13 जुलाई को न्यूयॉर्क पहुँचेंगे, जहाँ वे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के 2028-29 कार्यकाल के लिए भारत के आधिकारिक अभियान की शुरुआत करेंगे। इसके बाद 14-15 जुलाई को ब्रुसेल्स में तीसरी भारत-यूरोपीय संघ (EU) व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद (TTC) की बैठक में भाग लेंगे और यूरोपीय संघ तथा बेल्जियम के समकक्षों से बातचीत करेंगे। यह बहु-आयामी दौरा भारत की सक्रिय वैश्विक कूटनीति की दिशा को रेखांकित करता है।