कूटनीति में महिला दिवस पर जयशंकर ने टीम एमईए को दी बधाई, वैश्विक स्तर पर केवल 22.5% महिला राजदूत
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 24 जून 2025 को इंटरनेशनल डे ऑफ विमेन इन डिप्लोमेसी के अवसर पर विदेश मंत्रालय (MEA) की महिला अधिकारियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। जयशंकर इस समय दक्षिण कोरिया के दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर सियोल में थे, जहाँ से उन्होंने यह संदेश साझा किया।
जयशंकर का संदेश
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जयशंकर ने टीम एमईए की महिला सदस्यों की तस्वीरों का एक कोलाज साझा किया। उन्होंने लिखा, "इंटरनेशनल डे ऑफ विमेन इन डिप्लोमेसी के अवसर पर टीम एमईए की सभी महिला अधिकारियों को हार्दिक शुभकामनाएं।" उन्होंने आगे कहा, "मैं भारत के कूटनीतिक हितों को आगे बढ़ाने और वैश्विक स्तर पर देश की पहुँच को मज़बूत करने में उनके योगदान को अत्यंत महत्वपूर्ण और सराहनीय मानता हूँ।"
यह दिवस क्यों मनाया जाता है
कूटनीति में महिलाओं का यह अंतरराष्ट्रीय दिवस प्रत्येक वर्ष 24 जून को मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 76वें सत्र में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया था कि इस तारीख को कूटनीतिक भूमिकाओं में महिलाओं के योगदान को मान्यता दी जाएगी। इस वर्ष की थीम 'बहुपक्षीय कूटनीति में महिलाओं का नेतृत्व' रखी गई है।
वैश्विक आँकड़े: असमानता की तस्वीर
संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक कूटनीति के ताज़ा आँकड़ों के अनुसार, दुनियाभर में केवल 22.5% राजदूत और स्थायी प्रतिनिधि महिलाएं हैं। संयुक्त राष्ट्र में यह अनुपात और भी कम है — केवल 21% स्थायी प्रतिनिधि महिलाएं हैं। गौरतलब है कि 1947 से अब तक नियुक्त किए गए दुनिया के कुल राजदूतों में महिलाओं की हिस्सेदारी मात्र 7% रही है — यह आँकड़ा सात दशकों की व्यापक लैंगिक असमानता को उजागर करता है।
किन देशों ने की बराबरी
विमेन इन डिप्लोमेसी सूचकांक के अनुसार, केवल न्यूजीलैंड, लिकटेंस्टीन और बेलिज़ ने अपने शीर्ष कूटनीतिक पदों पर 50% महिला राजदूतों को स्थापित किया है। ये तीनों देश लैंगिक समानता की दृष्टि से वैश्विक मानक स्थापित करते हैं, जबकि अधिकांश देश अभी भी इस लक्ष्य से काफी दूर हैं।
आगे की राह
यह दिवस केवल एक प्रतीकात्मक अवसर नहीं है — यह उन नीतिगत बदलावों की माँग करता है जो महिला राजनयिकों को शीर्ष पदों तक पहुँचने में सक्षम बनाएं। जयशंकर की शुभकामनाएं यह संकेत देती हैं कि भारत इस दिशा में जागरूकता बढ़ाने को प्राथमिकता दे रहा है, हालाँकि घरेलू स्तर पर ठोस आँकड़े और नीतिगत प्रतिबद्धता की माँग बनी रहेगी।