बीरभूम खदान मालिक कांड: भूमि विभाग के अधिकारी प्रोबीर दास गिरफ्तार, 6 दिन की पुलिस हिरासत
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल पुलिस ने शनिवार, 15 अगस्त को बीरभूम जिले के फरार पत्थर खदान मालिक तुलु मंडल उर्फ मोहम्मद नजीबुद्दीन से कथित संबंधों के आरोप में राज्य के भूमि एवं भू-राजस्व विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार अधिकारी की पहचान सूरी उपमंडल कार्यालय में तैनात मुख्य सहायक प्रोबीर दास के रूप में हुई है।
गिरफ्तारी और छापेमारी का घटनाक्रम
बीरभूम जिला पुलिस की एक टीम ने सूरी स्थित प्रोबीर दास के आवास पर रात भर छापेमारी की और उन्हें हिरासत में लिया। छापेमारी के दौरान पाँच मोबाइल फोन जब्त किए गए। सरकारी वकील बिवास चट्टोपाध्याय ने अदालत को बताया कि जांचकर्ताओं को ऐसे साक्ष्य मिले हैं जो दास के तुलु मंडल की अवैध पत्थर खनन और पत्थर व्यापार गतिविधियों से कथित संबंध की ओर इशारा करते हैं।
दास को उसी दिन बीरभूम की जिला अदालत में पेश किया गया, जिसने उन्हें 6 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। दास की पत्नी साथी दास ने दावा किया कि उनके पति निर्दोष हैं और किसी भी कथित गतिविधि में उनकी कोई संलिप्तता नहीं है।
तुलु मंडल कौन है और वह फरार क्यों है
तुलु मंडल इस महीने की शुरुआत में हुई एक बड़ी बरामदगी के बाद से फरार है। उसके करीबी रिश्तेदार मीनार मंडल के घर से ₹28 करोड़ नकद और करीब ₹22 करोड़ मूल्य का 15 किलो सोना बरामद किया गया था। पूछताछ में मीनार ने जांचकर्ताओं को बताया कि यह नकद और सोना तुलु का था और उसे केवल इन्हें अपने पास रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
मंडल के फरार होने के बाद बीरभूम जिला अदालत ने उसके खिलाफ 'हुलिया' (वांछित भगोड़े की सूचना) जारी किया। इससे पहले उसके विरुद्ध 'रेड कॉर्नर' नोटिस भी जारी किया जा चुका था।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और टीएमसी कनेक्शन
कथित तौर पर तुलु मंडल ने दिहाड़ी मजदूर के रूप में करियर शुरू किया था और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान तेजी से अमीर हुआ। उसे बीरभूम जिला TMC के पूर्व अध्यक्ष अनुब्रता मंडल का करीबी माना जाता है।
गौरतलब है कि अनुब्रता मंडल को करोड़ों रुपये के मवेशी तस्करी मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और बाद में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गिरफ्तार किया था, जिसके बाद उन्होंने कई महीने हिरासत में बिताए। वर्तमान में वह ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले TMC के 'विद्रोही' गुट से जुड़े हुए हैं। तुलु मंडल का नाम 2022 में मवेशी तस्करी मामले में भी सामने आया था, जब ED ने उनके आवास और कार्यालय पर छापा मारा था।
ईडी की जांच और आगे की कार्रवाई
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने तुलु मंडल की गतिविधियों की जांच शुरू करने की तैयारी कर ली है। केंद्रीय एजेंसी के अधिकारी बीरभूम जिला पुलिस से जानकारी जुटा रहे हैं। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में अवैध खनन और उससे जुड़े भ्रष्टाचार के मामलों पर केंद्रीय एजेंसियों की नज़र पहले से तेज है।