फ्री ट्रेड और माइग्रेशन समझौतों से युवाओं को मिलेगा विदेश में सुरक्षित रोजगार: केंद्रीय मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने 29 जून 2026 को गोंडा में कहा कि केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न देशों के साथ किए गए मुक्त व्यापार (फ्री ट्रेड) समझौते और माइग्रेशन एंड मोबिलिटी एग्रीमेंट भारतीय युवाओं के लिए विदेशों में रोजगार के नए और सुरक्षित रास्ते खोलने वाले हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन समझौतों के लागू होने के बाद कुशल कामगारों को कानूनी एवं पारदर्शी प्रक्रिया के तहत विदेश में काम करने का अवसर मिलेगा।
समझौतों में क्या है खास
मंत्री के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के नेतृत्व में भारत ने यूरोपीय संघ, जर्मनी, रूस और न्यूजीलैंड समेत कई देशों के साथ महत्वपूर्ण फ्री ट्रेड एग्रीमेंट किए हैं। इन समझौतों का एक अहम घटक 'माइग्रेशन एंड मोबिलिटी एग्रीमेंट' है, जिसके तहत भारतीय युवाओं को आसान वीजा प्रक्रिया, सरकारी निगरानी और प्रशिक्षण सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएंगी।
इन समझौतों के तहत नर्सें, तकनीशियन, इलेक्ट्रिशियन, प्लंबर, बढ़ई और अन्य प्रशिक्षित पेशेवर औपचारिक चैनलों के जरिए विदेश में नौकरी कर सकेंगे। विदेश जाने वाले प्रत्येक नागरिक का पूरा रिकॉर्ड भारत सरकार के पास रहेगा, जिससे भारतीय दूतावास और मिशन उनके हितों की निगरानी कर सकेंगे।
मौजूदा समस्याएँ और नई व्यवस्था
कीर्ति वर्धन सिंह ने बताया कि वर्तमान में करीब 90 लाख भारतीय खाड़ी देशों में कार्यरत हैं — विशेष रूप से केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से बड़ी संख्या में लोग। हालांकि इनमें से अधिकांश अभी भी निजी एजेंटों के माध्यम से विदेश जाते हैं, जहाँ उन्हें वीजा संबंधी समस्याओं, आर्थिक शोषण और धोखाधड़ी का सामना करना पड़ता है।
मंत्री ने कहा कि कई लोग विदेश जाने के लिए अपनी जमीन बेचते हैं, कर्ज लेते हैं या भारी रकम खर्च करते हैं, और गैर-पंजीकृत एजेंट उनकी मजबूरी का फायदा उठाते हैं। नए समझौतों के लागू होने के बाद यह स्थिति काफी हद तक बदलने की उम्मीद है, क्योंकि अवैध एजेंटों और फर्जी दस्तावेजों की जरूरत समाप्त होगी।
कौशल विकास पर सरकार का जोर
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सरकार केवल विदेश भेजने की व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि केंद्रीय बजट में कौशल विकास के लिए बड़े स्तर पर प्रावधान किए गए हैं। इसके तहत डिजिटल तकनीक, सूचना प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, मोबाइल रिपेयरिंग, इलेक्ट्रिकल कार्य, प्लंबिंग और मशीन संचालन जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं।
उनके अनुसार, इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उद्देश्य युवाओं को वैश्विक रोजगार बाजार की जरूरतों के अनुसार तैयार करना है, ताकि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें। यह ऐसे समय में आया है जब भारत की युवा आबादी को 'डेमोग्राफिक डिविडेंड' में बदलने की जरूरत सबसे ज्यादा महसूस की जा रही है।
सुरक्षा और सम्मान का आश्वासन
कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि यदि किसी भारतीय नागरिक के साथ विदेश में धोखाधड़ी, शोषण या कोई अन्य समस्या होती है, तो सरकार उसके हितों की बेहतर तरीके से रक्षा कर सकेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि इन समझौतों से संबंधित कागजी प्रक्रिया जल्द पूरी होगी और युवाओं को इसका लाभ मिलना शुरू हो जाएगा।
गौरतलब है कि भारत सरकार का दीर्घकालिक लक्ष्य देश के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना, उन्हें सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध कराना और सुरक्षित तरीके से वैश्विक अवसरों तक पहुँचाना है।