भारत के 27 माइग्रेशन समझौते और विस्तार जरूरी: MoS कीर्ति वर्धन सिंह का IMRF में आह्वान

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भारत के 27 माइग्रेशन समझौते और विस्तार जरूरी: MoS कीर्ति वर्धन सिंह का IMRF में आह्वान

सारांश

भारत के 23 देशों के साथ 27 माइग्रेशन समझौते हैं — लेकिन MoS कीर्ति वर्धन सिंह ने IMRF मंच पर साफ कहा कि यह पर्याप्त नहीं। EU, UK और न्यूजीलैंड के साथ ताज़ा करारों के बीच, भारत कौशल विकास, डिजिटल पारदर्शिता और काउंसलर सेवाओं के ज़रिए अपने प्रवासी नागरिकों की सुरक्षा को नई ऊँचाई देने की कोशिश में है।

मुख्य बातें

भारत ने अब तक 23 देशों के साथ 27 माइग्रेशन और मोबिलिटी समझौते किए हैं।
हाल में यूरोपीय संघ (जनवरी 2025), ब्रिटेन (जुलाई 2024) और न्यूजीलैंड (अप्रैल 2025) के साथ नए समझौते हुए।
स्किल इंडिया इंटरनेशनल सेंटर और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए भारतीय कामगारों को वैश्विक मानकों पर तैयार किया जा रहा है।
ई-माइग्रेट सिस्टम , नेशनल करियर सर्विस पोर्टल और स्किल इंडिया डिजिटल हब भर्ती में पारदर्शिता ला रहे हैं।
MADAD पोर्टल और इंडियन कम्युनिटी वेलफेयर फंड के जरिए प्रवासी भारतीयों को ऑनलाइन सहायता उपलब्ध।

विदेश मंत्रालय में राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने 6 मई 2025 को दूसरे अंतरराष्ट्रीय माइग्रेशन रिव्यू फोरम (IMRF) में कहा कि भारत अब तक 23 देशों के साथ 27 माइग्रेशन और मोबिलिटी समझौते कर चुका है, परंतु विदेश में रह रहे भारतीय नागरिकों के अधिकारों की पूर्ण सुरक्षा के लिए इन साझेदारियों का और विस्तार अनिवार्य है। यह मंच संयुक्त राष्ट्र के 2018 के ग्लोबल कॉम्पैक्ट फॉर सेफ, ऑर्डरली एंड रेगुलर माइग्रेशन की हर चार साल में होने वाली समीक्षा का हिस्सा है।

मुख्य घोषणाएँ और समझौते

कीर्ति वर्धन सिंह ने बताया कि भारत ने हाल के महीनों में तीन महत्वपूर्ण द्विपक्षीय समझौते किए हैं — यूरोपीय संघ के साथ जनवरी 2025 में, ब्रिटेन के साथ जुलाई 2024 में, और न्यूजीलैंड के साथ अप्रैल 2025 में। उन्होंने कहा कि ये समझौते संगठित और कौशल-आधारित आवागमन को बढ़ावा देते हैं, जिनमें श्रमिकों के कल्याण, सामाजिक सुरक्षा और निष्पक्ष भर्ती प्रक्रियाओं पर विशेष जोर दिया गया है।

कौशल विकास: माइग्रेशन नीति का अहम स्तंभ

राज्य मंत्री ने कहा कि विदेश जाने के इच्छुक नागरिकों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार करना भारत की माइग्रेशन नीति की केंद्रीय धुरी है। स्किल इंडिया इंटरनेशनल सेंटर और विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से भारतीय कामगारों को वैश्विक मानकों के अनुसार प्रशिक्षित किया जा रहा है। साझेदार देशों के साथ कौशल की पारस्परिक मान्यता (Mutual Recognition of Skills) पर भी सक्रिय रूप से काम हो रहा है। इसके अतिरिक्त, सरकार प्रवास-पूर्व ओरिएंटेशन कार्यक्रम चलाती है, ताकि लोग विदेश में कार्य के लिए भलीभाँति तैयार हो सकें।

डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की भूमिका

कीर्ति वर्धन सिंह ने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि ई-माइग्रेट सिस्टम, नेशनल करियर सर्विस पोर्टल और स्किल इंडिया डिजिटल हब ने भर्ती और तैनाती की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने तथा प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में निर्णायक भूमिका निभाई है। गौरतलब है कि ये प्लेटफॉर्म अवैध भर्ती एजेंटों पर अंकुश लगाने में भी सहायक सिद्ध हुए हैं।

प्रवासी भारतीयों का कल्याण: सरकार की प्राथमिकता

राज्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि विदेशों में रहने वाले भारतीयों का कल्याण केंद्र सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। इसके लिए इंडियन कम्युनिटी वेलफेयर फंड और MADAD पोर्टल जैसी पहल लागू की गई हैं। MADAD पोर्टल के जरिए प्रवासी भारतीय अपनी समस्याएँ ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं और उनकी प्रगति पर नज़र रख सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि भारत की काउंसलर सेवाएँ विदेशों में भारतीयों को कानूनी, वित्तीय और बीमा संबंधी सहायता समय पर उपलब्ध कराती हैं।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर प्रवासी श्रमिकों के शोषण और अनियमित माइग्रेशन की घटनाएँ बढ़ रही हैं। भारत का यह कदम न केवल अपने नागरिकों की सुरक्षा की दिशा में, बल्कि वैश्विक माइग्रेशन प्रशासन में एक जिम्मेदार भागीदार के रूप में अपनी भूमिका को मज़बूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है। आने वाले समय में और अधिक देशों के साथ माइग्रेशन समझौते किए जाने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इन करारों का ज़मीनी क्रियान्वयन कितना प्रभावी रहा है — खासकर खाड़ी देशों में जहाँ भारतीय श्रमिकों के शोषण की घटनाएँ बार-बार सामने आती हैं। MADAD पोर्टल और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की घोषणाएँ स्वागत योग्य हैं, परंतु जब तक इनके उपयोग और समाधान दर के आँकड़े सार्वजनिक नहीं होते, ये महज़ नीतिगत इरादे बने रहेंगे। वैश्विक माइग्रेशन प्रशासन में भारत की बढ़ती सक्रियता सकारात्मक है, लेकिन घरेलू स्तर पर अवैध भर्ती एजेंटों पर कार्रवाई और कौशल प्रमाणन की विश्वसनीयता बिना सुधरे, विदेश नीति की यह चमक अधूरी रहेगी।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत ने कितने देशों के साथ माइग्रेशन समझौते किए हैं?
भारत ने अब तक 23 देशों के साथ 27 माइग्रेशन और मोबिलिटी समझौते किए हैं। ये समझौते संगठित और कौशल-आधारित आवागमन को बढ़ावा देते हैं और श्रमिकों के कल्याण व निष्पक्ष भर्ती पर ध्यान केंद्रित करते हैं।
IMRF क्या है और भारत की इसमें क्या भूमिका है?
IMRF यानी अंतरराष्ट्रीय माइग्रेशन रिव्यू फोरम, संयुक्त राष्ट्र के 2018 के ग्लोबल कॉम्पैक्ट फॉर सेफ, ऑर्डरली एंड रेगुलर माइग्रेशन की हर चार साल में होने वाली समीक्षा का मंच है। भारत ने इस दूसरे IMRF में MoS कीर्ति वर्धन सिंह के नेतृत्व में अपनी माइग्रेशन नीतियों और उपलब्धियों को प्रस्तुत किया।
MADAD पोर्टल प्रवासी भारतीयों की कैसे मदद करता है?
MADAD पोर्टल के जरिए विदेश में रहने वाले भारतीय अपनी समस्याएँ ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं और उनके समाधान की प्रगति पर नज़र रख सकते हैं। यह पोर्टल कानूनी, वित्तीय और बीमा संबंधी सहायता तक पहुँच को सरल बनाता है।
भारत ने हाल ही में किन देशों के साथ माइग्रेशन समझौते किए हैं?
भारत ने जनवरी 2025 में यूरोपीय संघ, जुलाई 2024 में ब्रिटेन और अप्रैल 2025 में न्यूजीलैंड के साथ महत्वपूर्ण माइग्रेशन और मोबिलिटी समझौते किए हैं। ये करार कौशल-आधारित आवागमन और श्रमिक कल्याण पर केंद्रित हैं।
स्किल इंडिया इंटरनेशनल सेंटर का माइग्रेशन नीति में क्या योगदान है?
स्किल इंडिया इंटरनेशनल सेंटर भारतीय कामगारों को वैश्विक मानकों के अनुसार प्रशिक्षित करता है, ताकि वे विदेश में बेहतर अवसर पा सकें। साझेदार देशों के साथ कौशल की पारस्परिक मान्यता पर भी काम हो रहा है, जिससे भारतीय प्रमाणपत्रों को अंतरराष्ट्रीय स्वीकृति मिल सके।
राष्ट्र प्रेस
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