24 अक्टूबर 2026
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81वें UN दिवस पर जयशंकर का आह्वान: बहुपक्षीय व्यवस्था में सुधार ज़रूरी, भारत UN चार्टर के प्रति प्रतिबद्ध

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81वें UN दिवस पर जयशंकर का आह्वान: बहुपक्षीय व्यवस्था में सुधार ज़रूरी, भारत UN चार्टर के प्रति प्रतिबद्ध

सारांश

81वें UN दिवस पर जयशंकर का संदेश महज़ रस्मी नहीं था — यह भारत के उस स्थायी रुख की ताज़ा अभिव्यक्ति है जो 1945 की विश्व व्यवस्था को बदलने की माँग करता है। ग्लोबल साउथ की अगुवाई करने की भारत की महत्वाकांक्षा और UN सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की दशकों पुरानी चाहत — दोनों इस बयान में एक साथ झलकती हैं।

मुख्य बातें

जयशंकर ने 24 अक्टूबर 2026 को 81वें संयुक्त राष्ट्र दिवस पर UN चार्टर के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।
जयशंकर ने एक्स पर पोस्ट में सुधारित बहुपक्षीय व्यवस्था की माँग की, जो आज की वैश्विक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करे।
भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में संरचनात्मक सुधार और स्थायी सदस्यता की दशकों से वकालत करता रहा है।
संयुक्त राष्ट्र जिनेवा कार्यालय ने UN चार्टर की मूल हस्तलिखित पांडुलिपि एक्स पर साझा की।
संयुक्त राष्ट्र की स्थापना 24 अक्टूबर 1945 को सैन फ्रांसिस्को में 50 देशों द्वारा की गई थी।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 24 अक्टूबर 2026 को 81वें संयुक्त राष्ट्र दिवस के अवसर पर संयुक्त राष्ट्र और उसके संस्थापक चार्टर के प्रति भारत की अटल प्रतिबद्धता दोहराते हुए बहुपक्षीय संस्थाओं में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वैश्विक शासन तंत्र को आज की भू-राजनीतिक और आर्थिक वास्तविकताओं के अनुरूप ढालना अब अनिवार्य हो गया है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की माँग अंतरराष्ट्रीय मंचों पर फिर से ज़ोर पकड़ रही है।

एक्स पर जयशंकर का संदेश

जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने पोस्ट में लिखा, 'आज 81वें संयुक्त राष्ट्र दिवस के अवसर पर संयुक्त राष्ट्र और उसके चार्टर के प्रति भारत की स्थायी प्रतिबद्धता दोहराता हूं। ऐसी सुधारित बहुपक्षीय व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर देता हूं जो आज की वैश्विक वास्तविकताओं को दर्शाए।' उन्होंने आगे कहा कि संयुक्त राष्ट्र में भारत अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा, वैश्विक सहयोग और ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं का समर्थन करता रहेगा। यह पोस्ट कूटनीतिक संदर्भ में भारत के सुसंगत रुख की एक और पुनरावृत्ति है।

भारत का दीर्घकालिक रुख और सुरक्षा परिषद सुधार

नई दिल्ली दशकों से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता और संरचनात्मक सुधार की वकालत करती रही है। भारत का तर्क है कि 1945 में स्थापित यह ढाँचा 21वीं सदी की शक्ति-संरचना और जनसंख्या-भार को प्रतिबिंबित नहीं करता। गौरतलब है कि भारत G4 देशों — जर्मनी, जापान, ब्राज़ील और भारत — का हिस्सा है, जो सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट की माँग कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, बिना सुधार के संयुक्त राष्ट्र की प्रभावशीलता पर सवाल उठते रहेंगे।

81 साल पुराना संस्थान, नई चुनौतियाँ

24 अक्टूबर 1945 को सैन फ्रांसिस्को में 50 देशों ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर को अनुमोदित किया था, जिसका उद्देश्य शांति, समृद्धि और मानवाधिकारों की रक्षा करना था। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, उस समय की वह मूल सोच आज भी उतनी ही प्रासंगिक है। इस वर्ष की 81वीं वर्षगाँठ पर भी जलवायु संकट, साइबर सुरक्षा, आतंकवाद और असमान विकास जैसी नई वैश्विक चुनौतियाँ बहुपक्षीय सुधार की माँग को और तीव्र बना रही हैं।

जिनेवा कार्यालय की ऐतिहासिक पहल

संयुक्त राष्ट्र जिनेवा कार्यालय ने इस अवसर पर एक्स पर UN चार्टर की प्रस्तावना की मूल हस्तलिखित पांडुलिपि साझा की, जिसमें उस दौर की टिप्पणियाँ भी शामिल हैं। कार्यालय ने लिखा, 'हम संयुक्त राष्ट्र के लोग — संयुक्त राष्ट्र दिवस से पहले यूएन चार्टर की प्रस्तावना की मूल पांडुलिपि देखें, जिसमें हस्तलिखित टिप्पणियाँ भी शामिल हैं।' यह ऐतिहासिक दस्तावेज़ उस वैश्विक सहमति का प्रमाण है, जो द्वितीय विश्व युद्ध की तबाही के बाद एक नई विश्व व्यवस्था स्थापित करने की इच्छाशक्ति से उपजी थी।

आगे की राह

जयशंकर के इस बयान को भारत की उस व्यापक रणनीति के संदर्भ में देखा जाना चाहिए, जिसमें वह ग्लोबल साउथ का नेतृत्वकर्ता बनने की कोशिश कर रहा है। आलोचकों का कहना है कि केवल बयानों से सुरक्षा परिषद सुधार नहीं होगा — इसके लिए P5 देशों की सहमति आवश्यक है, जो अभी तक नहीं मिली है। बहरहाल, 81वें UN दिवस पर भारत का यह संदेश वैश्विक कूटनीतिक विमर्श में उसकी सक्रिय भागीदारी को रेखांकित करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

परंतु पूर्व-परिचित। असली सवाल यह है कि बहुपक्षीय सुधार की यह माँग दशकों से दोहराई जा रही है, फिर भी P5 देशों की वीटो-शक्ति के सामने यह कितनी आगे बढ़ पाई है? ग्लोबल साउथ का नेतृत्व करने की भारत की दावेदारी तब तक अधूरी रहेगी, जब तक संयुक्त राष्ट्र के संरचनात्मक बदलाव में ठोस प्रगति न हो। UN दिवस की वर्षगाँठ राजनयिक संकल्पों का अवसर है — लेकिन मुख्यधारा की कवरेज यह नहीं बताती कि इन संकल्पों को अमल में लाने की राजनीतिक लागत कितनी बड़ी है।
RashtraPress
24 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जयशंकर ने 81वें UN दिवस पर क्या कहा?
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 24 अक्टूबर 2026 को एक्स पर पोस्ट करते हुए UN चार्टर के प्रति भारत की स्थायी प्रतिबद्धता दोहराई और बहुपक्षीय व्यवस्था में सुधार की माँग की, ताकि यह आज की वैश्विक वास्तविकताओं को बेहतर ढंग से प्रतिबिंबित कर सके। उन्होंने ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं के प्रति भारत के समर्थन को भी रेखांकित किया।
भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार क्यों चाहता है?
भारत का मानना है कि 1945 में स्थापित सुरक्षा परिषद का ढाँचा आज की भू-राजनीतिक और जनसंख्यागत वास्तविकताओं को नहीं दर्शाता। नई दिल्ली G4 देशों के साथ स्थायी सदस्यता की माँग करती रही है, और विकासशील देशों व उभरती शक्तियों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिलाने के लिए संरचनात्मक सुधार को ज़रूरी मानती है।
संयुक्त राष्ट्र दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?
संयुक्त राष्ट्र दिवस प्रतिवर्ष 24 अक्टूबर को मनाया जाता है, क्योंकि इसी तारीख को 1945 में संयुक्त राष्ट्र चार्टर लागू हुआ था और संस्था की औपचारिक स्थापना हुई थी। 2026 में यह 81वीं वर्षगाँठ है, जब 50 संस्थापक देशों ने सैन फ्रांसिस्को में शांति व मानवाधिकारों के लिए यह दस्तावेज़ अनुमोदित किया था।
UN जिनेवा कार्यालय ने इस अवसर पर क्या साझा किया?
संयुक्त राष्ट्र जिनेवा कार्यालय ने एक्स पर UN चार्टर की प्रस्तावना की मूल हस्तलिखित पांडुलिपि साझा की, जिसमें उस समय की हस्तलिखित टिप्पणियाँ भी शामिल हैं। यह ऐतिहासिक दस्तावेज़ 1945 में चार्टर के प्रारूप तैयार होने की प्रक्रिया की झलक देता है।
ग्लोबल साउथ के प्रति भारत का रुख क्या है?
भारत खुद को ग्लोबल साउथ — अर्थात विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं — का प्रमुख प्रवक्ता मानता है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इन देशों के हितों की वकालत करता है। जयशंकर ने 81वें UN दिवस पर दोहराया कि भारत संयुक्त राष्ट्र में ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं का समर्थन जारी रखेगा।
राष्ट्र प्रेस
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