81वें UN दिवस पर जयशंकर का आह्वान: बहुपक्षीय व्यवस्था में सुधार ज़रूरी, भारत UN चार्टर के प्रति प्रतिबद्ध
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 24 अक्टूबर 2026 को 81वें संयुक्त राष्ट्र दिवस के अवसर पर संयुक्त राष्ट्र और उसके संस्थापक चार्टर के प्रति भारत की अटल प्रतिबद्धता दोहराते हुए बहुपक्षीय संस्थाओं में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वैश्विक शासन तंत्र को आज की भू-राजनीतिक और आर्थिक वास्तविकताओं के अनुरूप ढालना अब अनिवार्य हो गया है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की माँग अंतरराष्ट्रीय मंचों पर फिर से ज़ोर पकड़ रही है।
एक्स पर जयशंकर का संदेश
जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने पोस्ट में लिखा, 'आज 81वें संयुक्त राष्ट्र दिवस के अवसर पर संयुक्त राष्ट्र और उसके चार्टर के प्रति भारत की स्थायी प्रतिबद्धता दोहराता हूं। ऐसी सुधारित बहुपक्षीय व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर देता हूं जो आज की वैश्विक वास्तविकताओं को दर्शाए।' उन्होंने आगे कहा कि संयुक्त राष्ट्र में भारत अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा, वैश्विक सहयोग और ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं का समर्थन करता रहेगा। यह पोस्ट कूटनीतिक संदर्भ में भारत के सुसंगत रुख की एक और पुनरावृत्ति है।
भारत का दीर्घकालिक रुख और सुरक्षा परिषद सुधार
नई दिल्ली दशकों से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता और संरचनात्मक सुधार की वकालत करती रही है। भारत का तर्क है कि 1945 में स्थापित यह ढाँचा 21वीं सदी की शक्ति-संरचना और जनसंख्या-भार को प्रतिबिंबित नहीं करता। गौरतलब है कि भारत G4 देशों — जर्मनी, जापान, ब्राज़ील और भारत — का हिस्सा है, जो सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट की माँग कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, बिना सुधार के संयुक्त राष्ट्र की प्रभावशीलता पर सवाल उठते रहेंगे।
81 साल पुराना संस्थान, नई चुनौतियाँ
24 अक्टूबर 1945 को सैन फ्रांसिस्को में 50 देशों ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर को अनुमोदित किया था, जिसका उद्देश्य शांति, समृद्धि और मानवाधिकारों की रक्षा करना था। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, उस समय की वह मूल सोच आज भी उतनी ही प्रासंगिक है। इस वर्ष की 81वीं वर्षगाँठ पर भी जलवायु संकट, साइबर सुरक्षा, आतंकवाद और असमान विकास जैसी नई वैश्विक चुनौतियाँ बहुपक्षीय सुधार की माँग को और तीव्र बना रही हैं।
जिनेवा कार्यालय की ऐतिहासिक पहल
संयुक्त राष्ट्र जिनेवा कार्यालय ने इस अवसर पर एक्स पर UN चार्टर की प्रस्तावना की मूल हस्तलिखित पांडुलिपि साझा की, जिसमें उस दौर की टिप्पणियाँ भी शामिल हैं। कार्यालय ने लिखा, 'हम संयुक्त राष्ट्र के लोग — संयुक्त राष्ट्र दिवस से पहले यूएन चार्टर की प्रस्तावना की मूल पांडुलिपि देखें, जिसमें हस्तलिखित टिप्पणियाँ भी शामिल हैं।' यह ऐतिहासिक दस्तावेज़ उस वैश्विक सहमति का प्रमाण है, जो द्वितीय विश्व युद्ध की तबाही के बाद एक नई विश्व व्यवस्था स्थापित करने की इच्छाशक्ति से उपजी थी।
आगे की राह
जयशंकर के इस बयान को भारत की उस व्यापक रणनीति के संदर्भ में देखा जाना चाहिए, जिसमें वह ग्लोबल साउथ का नेतृत्वकर्ता बनने की कोशिश कर रहा है। आलोचकों का कहना है कि केवल बयानों से सुरक्षा परिषद सुधार नहीं होगा — इसके लिए P5 देशों की सहमति आवश्यक है, जो अभी तक नहीं मिली है। बहरहाल, 81वें UN दिवस पर भारत का यह संदेश वैश्विक कूटनीतिक विमर्श में उसकी सक्रिय भागीदारी को रेखांकित करता है।