ईशा सिंह का 'जूही मुई': ऑटिज्म पर बनी सीरियल से TV storytelling में बड़ा बदलाव
सारांश
मुख्य बातें
टीवी अभिनेत्री ईशा सिंह इन दिनों अपने नए धारावाहिक 'जूही मुई' के लिए चर्चा में हैं, जिसमें वह एक ऐसी युवती का किरदार निभा रही हैं जो ऑटिज्म से जुड़ी चुनौतियों के बावजूद अपने सपनों की ओर बढ़ती है। 1 जुलाई को मुंबई में दिए एक विशेष इंटरव्यू में ईशा ने टेलीविजन की बदलती कहानियों, दर्शकों की नई अपेक्षाओं और सामाजिक जागरूकता में मनोरंजन की भूमिका पर खुलकर बात की।
टीवी की बदलती कहानियाँ
ईशा सिंह के अनुसार, भारतीय टेलीविजन का परिदृश्य तेज़ी से बदल रहा है। उन्होंने कहा, 'समय के साथ टीवी की दुनिया तेज़ी से बदल रही है। पहले जहाँ सीरियल्स में केवल पारिवारिक रिश्तों और मनोरंजन पर ज़्यादा ध्यान दिया जाता था, वहीं अब ऐसे विषयों को भी जगह मिल रही है जो समाज के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।' उनका मानना है कि आज के दर्शक पहले से कहीं अधिक जागरूक हैं और ऐसी कहानियाँ देखना पसंद करते हैं जो उन्हें कुछ नया सिखाएँ।
युवा पीढ़ी की भूमिका
ईशा ने यह भी रेखांकित किया कि युवा दर्शकों ने टेलीविजन कंटेंट की दिशा बदलने में अहम भूमिका निभाई है। उनके शब्दों में, 'अब वही शो ज़्यादा पसंद किए जाते हैं जिनमें मनोरंजन के साथ मैसेज भी हो। अगर लोगों की पसंद बदलती है तो कार्यक्रमों की कहानियाँ भी बदलना स्वाभाविक है।' यह ऐसे समय में आया है जब OTT प्लेटफ़ॉर्म के बढ़ते प्रभाव के बीच टेलीविजन चैनल भी अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए सामाजिक विषयों की ओर रुख कर रहे हैं।
सामाजिक जिम्मेदारी और कलाकारों की भूमिका
अभिनेत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि टेलीविजन महज़ मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने का एक सशक्त ज़रिया है। उन्होंने कहा, 'अगर किसी शो के ज़रिए लोगों को किसी सामाजिक विषय के बारे में जानकारी मिलती है, तो उसका असर लाखों परिवारों तक पहुँच सकता है।' ईशा के अनुसार संवेदनशील विषयों को परदे पर उतारने से दर्शकों की सोच बदलने में मदद मिलती है, और इसीलिए कलाकारों तथा निर्माताओं की ज़िम्मेदारी पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।
ऑटिज्म जैसे विषय पर काम करने का अनुभव
गौरतलब है कि 'जूही मुई' जैसे धारावाहिक ऑटिज्म जैसे उन विषयों को मुख्यधारा में लाने का प्रयास करते हैं, जिन पर भारतीय टेलीविजन पर अब तक बहुत कम चर्चा हुई है। ईशा का यह किरदार न केवल एक अभिनेत्री के रूप में उनकी परिपक्वता को दर्शाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि दर्शक अब जटिल और वास्तविक जीवन से जुड़ी कहानियों को स्वीकार करने के लिए तैयार हैं। आने वाले समय में इस धारावाहिक की सामाजिक प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि टेलीविजन पर ऐसे विषयों को कितना स्थान मिलेगा।