'जूही मुई' में ईशा सिंह का ऑटिज्म पर बड़ा बयान: 'यह बीमारी नहीं, न्यूरोलॉजिकल स्थिति है'
सारांश
मुख्य बातें
टीवी अभिनेत्री ईशा सिंह अपने आगामी शो 'जूही मुई' में ऑटिज्म स्पेक्ट्रम पर रहने वाली लड़की 'जूही' की भूमिका निभाने जा रही हैं — और इसे वह अपने करियर का अब तक का सबसे चुनौतीपूर्ण किरदार मानती हैं। 30 जून 2026 को मुंबई में दिए एक इंटरव्यू में ईशा ने ऑटिज्म को लेकर समाज में व्याप्त गलतफहमियों पर खुलकर अपनी राय रखी और इस विषय पर जागरूकता बढ़ाने की ज़रूरत पर जोर दिया।
ऑटिज्म को लेकर सबसे बड़ी गलतफहमी
ईशा सिंह ने स्पष्ट किया, ''ऑटिज्म को लेकर सबसे बड़ी गलतफहमी यह है कि लोग इसे बीमारी मान लेते हैं। जबकि सच यह है कि ऑटिज्म कोई बीमारी नहीं, बल्कि मस्तिष्क के विकास से जुड़ी एक न्यूरोलॉजिकल स्थिति है।'' उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग यह सोचते हैं कि ऑटिज्म एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है — जो पूरी तरह गलत धारणा है। ''ऑटिज्म न तो संक्रामक है और न ही यह किसी तरह की बीमारी है,'' उन्होंने जोड़ा।
अभिनेत्री ने यह भी रेखांकित किया कि जागरूकता की यह कमी केवल अशिक्षित तबके तक सीमित नहीं है। ''मेरे अपने पढ़े-लिखे दोस्तों में भी ऐसे लोग हैं जिन्हें ऑटिज्म के बारे में सही जानकारी नहीं है,'' उन्होंने कहा।
समझ और स्वीकार्यता की ज़रूरत
ईशा के अनुसार, ऑटिज्म स्पेक्ट्रम पर रहने वाले बच्चे अक्सर बेहद बुद्धिमान, संवेदनशील और प्यार करने वाले होते हैं। उन्हें समाज से सहानुभूति नहीं, बल्कि समझ और स्वीकार्यता की ज़रूरत होती है। उनका मानना है कि ऐसे बच्चों को 'बदलने' की कोशिश करने के बजाय उन्हें उनकी अपनी विशेषताओं के साथ स्वीकार किया जाना चाहिए।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत में न्यूरोडायवर्सिटी को लेकर सार्वजनिक विमर्श धीरे-धीरे बढ़ रहा है, लेकिन मुख्यधारा मीडिया में इस पर गहरी चर्चा अभी भी सीमित है।
किरदार की तैयारी: रिसर्च से लेकर हाव-भाव तक
ईशा ने बताया कि इस किरदार के लिए उन्होंने ऑटिज्म पर आधारित कई इंटरव्यू देखे, विशेषज्ञों और ऑटिज्म से जुड़े लोगों से बातचीत की, और इस विषय पर गहन शोध के साथ-साथ कई किताबें भी पढ़ीं। ''यह सीखने की प्रक्रिया अभी भी जारी है। जूही का किरदार निभाते हुए मुझे हर दिन कुछ नया सीखने को मिल रहा है,'' उन्होंने कहा।
अभिनय की तैयारी में उन्होंने अपने चलने, बोलने, बैठने, प्रतिक्रिया देने और भावनाओं को व्यक्त करने के तरीके पर बारीकी से काम किया। ''ऑटिज्म स्पेक्ट्रम पर रहने वाले लोग हर भावना को गहराई से महसूस करते हैं, लेकिन ज़रूरी नहीं कि वे उसे सामान्य तरीके से व्यक्त कर पाएं। इसीलिए मैंने अपने अभिनय में किसी तरह का दिखावा नहीं रखा — छोटे-छोटे हाव-भाव और स्वाभाविक अभिव्यक्ति पर विशेष ध्यान दिया,'' उन्होंने स्पष्ट किया।
शो से बदलाव की उम्मीद
ईशा सिंह ने कहा, ''यह मेरे करियर का सबसे चुनौतीपूर्ण और जिम्मेदारी भरा रोल है। मेरा उद्देश्य ऑटिज्म से जुड़े लोगों की भावनाओं और व्यवहार को पूरी ईमानदारी के साथ दर्शकों तक पहुंचाना था।'' उन्हें भरोसा है कि 'जूही मुई' देखने के बाद दर्शक ऑटिज्म को लेकर अपनी सोच पर पुनर्विचार करेंगे। ''अगर इस शो के जरिए कुछ लोग भी ऑटिज्म को सही तरीके से समझ पाते हैं, तो मेरी मेहनत सफल मानी जाएगी,'' उन्होंने कहा।
गौरतलब है कि भारतीय टेलीविज़न पर ऑटिज्म जैसे संवेदनशील विषयों को केंद्र में रखकर बनाए जाने वाले शो अभी भी दुर्लभ हैं — ऐसे में 'जूही मुई' की यह पहल सामाजिक जागरूकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकती है।