ईशा सिंह का ओटीटी बोल्ड कंटेंट पर बड़ा बयान: 'कोई संत नहीं, असल ज़िंदगी ऐसी ही है'
सारांश
मुख्य बातें
टेलीविजन अभिनेत्री ईशा सिंह ने ओटीटी प्लेटफॉर्म पर बढ़ते बोल्ड कंटेंट को लेकर बेबाक राय रखी है। मुंबई में हुई एक बातचीत में उन्होंने कहा कि ओटीटी रियलिटी शोज में दिखने वाली भाषा और व्यवहार दरअसल असल ज़िंदगी का आईना है — फ़र्क सिर्फ यह है कि टेलीविजन पर इसे एडिट कर दिया जाता है।
ओटीटी बनाम टीवी: आज़ादी का फ़र्क
ईशा सिंह ने स्पष्ट किया कि 'लॉक अप' और 'अलायंस' जैसे ओटीटी रियलिटी शोज को सामग्री और भाषा के मामले में कहीं अधिक स्वतंत्रता मिलती है। उन्होंने कहा, "देखिए, जब हमारे दर्शक इन शो को देखते हैं, तो वे बोलते हैं कि ऐसी अभद्र भाषा में बात कर रहे हैं। मेरा मानना है कि लोग असल जीवन में ऐसे ही बात करते हैं, हालांकि फर्क बस इतना है कि ओटीटी शोज में दिखता है, जबकि बिग बॉस टीवी पर प्रसारित होता है, इसलिए उसमें एडिट कर दिया जाता है।"
ईशा का बड़ा बयान — 'कोई संत नहीं है'
अभिनेत्री ने दर्शकों की पसंद को भी इस बहस के केंद्र में रखा। उन्होंने कहा, "देखिए, कोई संत नहीं है। सब ऐसे ही बातें करते हैं। स्क्रीन के मुकाबले लोग असल जीवन में बिल्कुल अलग होते हैं। मुझे लगता है कि ठीक है, अभी लोग भी इसे पसंद कर रहे हैं। वे 'लॉक अप' और 'बिग बॉस' देख रहे हैं। मुझे लगता है कि लोगों को बस पसंद आना चाहिए।" यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब ओटीटी कंटेंट की सीमाओं और नियमन को लेकर बहस तेज़ है।
बिग बॉस 18 की फाइनलिस्ट रही हैं ईशा
गौरतलब है कि ईशा सिंह रियलिटी शो 'बिग बॉस' सीजन-18 की फाइनलिस्ट रह चुकी हैं और शो में छठे स्थान पर रहीं। इस अनुभव ने उन्हें रियलिटी शो की अंदरूनी कार्यप्रणाली को करीब से समझने का मौका दिया, जिसकी झलक उनके इस बयान में साफ दिखती है।
अब 'जूही मुई' में मुख्य भूमिका
ईशा सिंह इस समय कलर्स टीवी के नए शो 'जूही मुई' में जूही सूरी का किरदार निभा रही हैं। यह शो एक ऑटिज़्म से जूझ रही प्रतिभाशाली लड़की की प्रेरणादायक कहानी पर आधारित है, जो अपने परिवार की संपत्ति बचाने के लिए खुद वकील बनती है। ओटीटी और टीवी के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच ईशा का यह बयान इंडस्ट्री में एक नई बहस को हवा दे सकता है।