बेउर जेल में 14-15 घंटे ड्यूटी का आरोप, तेज प्रताप यादव ने बिहार सरकार से तत्काल सुधार की मांग की
सारांश
मुख्य बातें
पटना के बेउर जेल में तैनात पुलिसकर्मियों और सुरक्षाकर्मियों से कथित तौर पर लगातार 14 से 15 घंटे तक ड्यूटी कराए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। जनशक्ति जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने 15 अगस्त 2026 को बिहार सरकार से इस मुद्दे पर तत्काल संज्ञान लेने और जेलकर्मियों के लिए उचित ड्यूटी समय तथा नियमित अवकाश सुनिश्चित करने की मांग की है।
क्या है मामला
बेउर जेल, जो बिहार की राजधानी पटना में स्थित है, वहाँ तैनात कई कर्मियों से कथित तौर पर बिना पर्याप्त आराम और अवकाश के लगातार 14-15 घंटे काम लिया जा रहा है। तेज प्रताप यादव के अनुसार, इन कर्मियों को न तो नियमित छुट्टी मिल रही है और न ही पर्याप्त विश्राम का अवसर।
यह ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में सरकारी कर्मचारियों के कार्य-जीवन संतुलन को लेकर बहस तेज हो रही है। गौरतलब है कि अत्यधिक कार्यभार से कर्मचारियों की कार्यक्षमता और मानसिक स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है, जो अंततः सुरक्षा व्यवस्था को भी कमज़ोर कर सकता है।
तेज प्रताप यादव की मांगें
तेज प्रताप यादव ने कहा कि जेल में तैनात पुलिसकर्मी और सुरक्षाकर्मी बिहार की सुरक्षा व्यवस्था के महत्वपूर्ण प्रहरी हैं और वे कठिन परिस्थितियों में अपनी जिम्मेदारियाँ निभाते हैं। उन्होंने कहा, 'किसी भी कर्मचारी पर अनावश्यक कार्यभार नहीं डाला जाना चाहिए।'
उन्होंने बिहार सरकार से तीन प्रमुख मांगें रखीं — बेउर जेल में कर्मियों की ड्यूटी का समय उचित रखा जाए, नियमित अवकाश सुनिश्चित किया जाए, और इस मामले की तत्काल जांच कराई जाए ताकि वास्तविक स्थिति का पता लगाया जा सके।
स्वास्थ्य और कार्यक्षमता पर असर
तेज प्रताप यादव ने चेतावनी दी कि यदि कर्मियों से लंबे समय तक लगातार ड्यूटी कराई जाती रही, तो इसका सीधा असर उनके स्वास्थ्य और कार्यक्षमता दोनों पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मी भी बिहार का गौरव हैं और उनकी सेवाओं का सम्मान होना चाहिए।
विशेषज्ञों के अनुसार, अत्यधिक कार्य-घंटे न केवल शारीरिक थकान बल्कि मानसिक तनाव भी उत्पन्न करते हैं, जिससे कर्तव्य-पालन में चूक की आशंका बढ़ जाती है — विशेषकर उच्च-सुरक्षा वाले प्रतिष्ठानों में।
सरकार से अपेक्षाएँ
तेज प्रताप यादव ने स्पष्ट किया कि सरकार की जिम्मेदारी है कि वह अपने कर्मचारियों के अधिकारों और सुविधाओं का ध्यान रखे। उन्होंने माँग की कि ऐसी प्रशासनिक व्यवस्था बनाई जाए जिससे कर्मियों पर अतिरिक्त दबाव न पड़े और वे पूरी क्षमता के साथ अपनी जिम्मेदारी निभा सकें।
यदि जांच में शिकायत सही पाई जाती है, तो सरकार से आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने की अपेक्षा की गई है। अब देखना यह है कि बिहार सरकार इस मांग पर क्या रुख अपनाती है।