15 अगस्त 2026
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औरंगाबाद में जाली नोट सिंडिकेट का भंडाफोड़: ₹2.48 लाख के नकली नोटों के साथ दो गिरफ्तार

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औरंगाबाद में जाली नोट सिंडिकेट का भंडाफोड़: ₹2.48 लाख के नकली नोटों के साथ दो गिरफ्तार

सारांश

बिहार के औरंगाबाद में पुलिस ने 15 अगस्त को अंतरराज्यीय जाली नोट सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया। मदनपुर थाना क्षेत्र में वाहन जाँच के दौरान ₹2,48,500 के नकली ₹500 नोटों के साथ दो आरोपी — सुरेंद्र कुमार और विजय यादव — गिरफ्तार। पुलिस सिंडिकेट के स्रोत और अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है।

मुख्य बातें

बिहार के औरंगाबाद में पुलिस ने 15 अगस्त को अंतरराज्यीय जाली नोट सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया।
दोनों आरोपियों के पास से ₹2,48,500 मूल्य के ₹500 के नकली नोट बरामद हुए।
गिरफ्तार आरोपी: सुरेंद्र कुमार (45, निवासी मदनपुर, औरंगाबाद) और विजय यादव (45, निवासी बाराचट्टी, गया)।
पुलिस ने एक मोटरसाइकिल और दो मोबाइल फोन भी जब्त किए।
दोनों आरोपी न्यायिक हिरासत में; सिंडिकेट के स्रोत और अन्य सदस्यों की जाँच जारी।

बिहार के औरंगाबाद जिले में पुलिस ने एक अंतरराज्यीय जाली नोट सिंडिकेट का भंडाफोड़ करते हुए 15 अगस्त को दो तस्करों को गिरफ्तार किया। दोनों आरोपियों के कब्जे से ₹2,48,500 मूल्य के नकली नोट बरामद किए गए — सभी ₹500 के नोट। इसके साथ ही पुलिस ने एक मोटरसाइकिल और दो मोबाइल फोन भी जब्त किए।

मुख्य घटनाक्रम

पुलिस अधीक्षक, औरंगाबाद को जिले में जाली नोटों के परिवहन की सूचना मिली थी। इसके बाद मदनपुर थाना क्षेत्र में मोटरसाइकिलों सहित अन्य वाहनों की सघन जाँच शुरू की गई। रात करीब 8 बजकर 10 मिनट पर मदनपुर थाना मोड़ के पास जाँच के दौरान गया की दिशा से आ रहा एक व्यक्ति पुलिस को देखकर भागने लगा।

पुलिस बल ने पीछा कर उसे दबोच लिया। तलाशी में उसके पास से ₹500 के 297 जाली नोट मिले, जिनकी कुल कीमत ₹1,48,500 थी। गिरफ्तार आरोपी की पहचान 45 वर्षीय सुरेंद्र कुमार, निवासी बाबू बांध, थाना मदनपुर, औरंगाबाद के रूप में हुई।

दूसरी गिरफ्तारी

पूछताछ के दौरान सुरेंद्र कुमार की निशानदेही पर पुलिस ने मिठाइयां मोड़ के पास छापेमारी कर एक अन्य संदिग्ध को पकड़ा। उसके पास से ₹500 के 200 जाली नोट बरामद हुए, जिनकी कीमत ₹1 लाख थी। इस आरोपी की पहचान 45 वर्षीय विजय यादव, निवासी सोमिया, थाना बाराचट्टी, जिला गया के रूप में हुई।

आरोपियों की स्वीकारोक्ति और कानूनी कार्रवाई

पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपियों ने पूछताछ के दौरान अपना अपराध स्वीकार किया है। मदनपुर थाने में संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है और दोनों को न्यायिक हिरासत में भेजा जा रहा है।

आगे की जाँच

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि जाली नोटों की यह खेप कहाँ से लाई गई थी और इस अंतरराज्यीय सिंडिकेट में और कौन-कौन से लोग शामिल हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई राज्यों में नकली नोटों की तस्करी के मामले सामने आ रहे हैं, जो कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए एक गंभीर चुनौती बने हुए हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

48,500 की यह बरामदगी संख्या में छोटी लग सकती है, लेकिन 'अंतरराज्यीय सिंडिकेट' का संदर्भ इसे महज स्थानीय मामला नहीं रहने देता। गौरतलब है कि बिहार-झारखंड-बंगाल गलियारा वर्षों से नकली नोटों की तस्करी का एक ज्ञात मार्ग रहा है। असली सवाल यह है कि क्या पुलिस इस बार सिर्फ वाहक को पकड़कर रुकेगी, या आपूर्ति श्रृंखला के ऊपरी सिरे तक पहुँचेगी — क्योंकि अब तक के अधिकांश मामलों में निचले स्तर के तस्कर ही पकड़े जाते हैं और मुख्य संचालक बच निकलते हैं।
RashtraPress
15 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

औरंगाबाद में जाली नोट सिंडिकेट का भंडाफोड़ कैसे हुआ?
पुलिस अधीक्षक को जिले में नकली नोटों के परिवहन की सूचना मिली, जिसके बाद मदनपुर थाना क्षेत्र में सघन वाहन जाँच शुरू की गई। रात करीब 8:10 बजे एक संदिग्ध पुलिस को देखकर भागने लगा, जिसे पकड़ने पर ₹1,48,500 के जाली नोट मिले और उसकी निशानदेही पर दूसरा आरोपी भी गिरफ्तार हुआ।
गिरफ्तार आरोपी कौन हैं और उनके पास क्या मिला?
पहले आरोपी सुरेंद्र कुमार (45 वर्ष, निवासी मदनपुर, औरंगाबाद) के पास ₹500 के 297 नकली नोट (कुल ₹1,48,500) मिले। दूसरे आरोपी विजय यादव (45 वर्ष, निवासी बाराचट्टी, गया) के पास ₹500 के 200 नकली नोट (कुल ₹1 लाख) बरामद हुए।
इस मामले में पुलिस आगे क्या कर रही है?
पुलिस अब जाली नोटों की खेप के मूल स्रोत और सिंडिकेट के अन्य सदस्यों की पहचान करने में जुटी है। दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और मदनपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
क्या इसे अंतरराज्यीय सिंडिकेट क्यों माना जा रहा है?
पुलिस के अनुसार दोनों आरोपी अलग-अलग जिलों — औरंगाबाद और गया — से हैं और नोट गया की दिशा से लाए जा रहे थे। जाँच में यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि यह नेटवर्क बिहार से बाहर तक फैला है या नहीं।
जाली नोट रखने पर क्या कानूनी कार्रवाई होती है?
भारतीय दंड संहिता (अब भारतीय न्याय संहिता) के तहत नकली नोट रखना, बनाना या वितरित करना गंभीर अपराध है जिसमें आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। इस मामले में मदनपुर थाने में संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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