उमर अब्दुल्ला बस से पहुंचे दाचीगाम, मंत्रियों संग 19 महीने की सरकार की समीक्षा
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला बुधवार, 3 जून को नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के मंत्रियों और विधायकों के साथ बस में सवार होकर दाचीगाम राष्ट्रीय उद्यान पहुंचे, जहाँ उन्होंने केंद्र शासित प्रदेश की सरकार के लगभग 19 महीने के कार्यकाल की समीक्षा के लिए एक ऑफसाइट बैठक की। इस असामान्य प्रारूप वाली बैठक में सरकार के समर्थक पाँच निर्दलीय विधायकों को भी आमंत्रित किया गया, जबकि कांग्रेस इससे बाहर रही।
ऑफसाइट बैठक का मकसद
अपने फेसबुक पोस्ट में मुख्यमंत्री ने लिखा, 'हम पिछले 19 महीनों की समीक्षा करने के लिए एक ऑफसाइट मीटिंग पर जा रहे हैं। अच्छे, बुरे और इनके बीच की सभी बातों पर विचार-विमर्श करेंगे।' सूत्रों के अनुसार, बैठक का उद्देश्य कैबिनेट और विधायक दल के बीच पिछले डेढ़ साल की उपलब्धियों, चूक और आगे की रणनीति पर खुली चर्चा करना था।
स्थान बदलने की रिपोर्टों का खंडन
उमर ने उन मीडिया रिपोर्टों को भी सिरे से खारिज किया जिनमें दावा किया गया था कि बैठक का स्थान अंतिम समय में बदला गया। दूसरे फेसबुक पोस्ट में उन्होंने लिखा, 'मुझे आपको निराश करने के लिए खेद है, लेकिन बैठक को अंतिम समय में नहीं बदला गया। मेरा हमेशा से यही इरादा था कि यह बैठक ऑफसाइट आयोजित की जाए और सभी व्यवस्थाएं कई दिन पहले ही मेरे द्वारा चुने गए स्थान पर कर ली गई थीं।'
कांग्रेस की दूरी, निर्दलीय शामिल
NC सरकार को समर्थन दे रहे पाँच निर्दलीय विधायक बैठक में आमंत्रित किए गए, परंतु छह विधायकों वाली कांग्रेस को इससे अलग रखा गया। उमर अब्दुल्ला ने अपने मंत्रिमंडल में एक पद कांग्रेस के लिए खाली छोड़ा हुआ है और पार्टी जब चाहे अपने सदस्य का नाम मंत्री पद के लिए दे सकती है। हालाँकि कांग्रेस ने स्पष्ट कर रखा है कि जब तक जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस नहीं मिलता, तब तक वह केंद्र शासित प्रदेश सरकार में शामिल नहीं होगी।
दाचीगाम का ऐतिहासिक संदर्भ
NC सूत्रों के अनुसार, पार्टी ने पहले से ही दाचीगाम नेशनल पार्क में विधायकों के दोपहर के भोजन की व्यवस्था कर रखी थी। पार्क के भीतर एक रेस्ट हाउस है जिसके चारों ओर विशाल लॉन फैले हैं और जहाँ प्रवेश काफी प्रतिबंधित रहता है। गौरतलब है कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी कश्मीर दौरे के दौरान अक्सर इसी दाचीगाम रेस्ट हाउस में ठहरा करती थीं — जो इस स्थान को राजनीतिक रूप से प्रतीकात्मक बनाता है।
आगे क्या
बैठक के निष्कर्ष आने वाले दिनों में सरकार की प्राथमिकताओं और कैबिनेट विस्तार की संभावित दिशा तय कर सकते हैं, खासकर तब जब राज्य का दर्जा बहाल करने का मुद्दा घाटी की राजनीति का केंद्रीय एजेंडा बना हुआ है।