उमर अब्दुल्ला को BJP का 7 दिन का अल्टीमेटम: माफी नहीं तो ₹100 करोड़ का मानहानि मुकदमा
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर से 13 जुलाई 2025 को कानूनी नोटिस भेजा गया है, जिसमें सात दिनों के भीतर रिश्वत संबंधी बयान वापस लेने और लिखित माफी माँगने की माँग की गई है। ऐसा न करने पर उनके विरुद्ध ₹100 करोड़ का दीवानी मानहानि मुकदमा और आपराधिक मानहानि की कार्रवाई शुरू करने की चेतावनी दी गई है।
विवाद की जड़: 11 जुलाई का वह बयान
11 जुलाई को श्रीनगर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कथित तौर पर आरोप लगाया था कि BJP के एक वरिष्ठ नेता और सर्वोच्च न्यायालय के एक वकील ने उनकी पार्टी के एक विधायक से संपर्क कर ₹20 से ₹30 करोड़ की रिश्वत और मंत्री पद देने का प्रस्ताव रखा था। इस बयान के बाद BJP ने तत्काल दो प्रेस कॉन्फ्रेंस कीं — पहली 11 जुलाई की शाम और दूसरी उसके अगले रविवार को — जिनमें मुख्यमंत्री से आरोपों के समर्थन में ठोस प्रमाण माँगे गए।
BJP का कानूनी पक्ष
BJP की ओर से भेजे गए नोटिस पर वकील परिमोक्ष सेठ ने कहा कि यह नोटिस BJP के जम्मू-कश्मीर अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद सतपाल शर्मा के माध्यम से भेजा गया है। उनके अनुसार मुख्यमंत्री द्वारा लगाए गए रिश्वत के आरोप 'पूरी तरह झूठे, निराधार और मानहानिकारक' हैं। उन्होंने कहा कि यह बयान प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित हुआ, जिससे BJP की छवि को नुकसान पहुँचा।
परिमोक्ष सेठ ने स्पष्ट किया कि नोटिस में मुख्यमंत्री से तीन बातें माँगी गई हैं: अपना बयान लिखित रूप में वापस लेना, सार्वजनिक रूप से माफी माँगना और भविष्य में इस प्रकार के आरोप न दोहराने का आश्वासन देना। यदि सात दिनों के भीतर इन माँगों का पालन नहीं किया गया, तो आपराधिक मानहानि के साथ-साथ ₹100 करोड़ का दीवानी मुकदमा दायर किया जाएगा।
BJP का प्रति-आरोप: ध्यान भटकाने की रणनीति
वकील परिमोक्ष सेठ ने यह भी दावा किया कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला अपनी सरकार से जुड़े अन्य विवादों से लोगों का ध्यान हटाने के लिए ये आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में कथित तौर पर 24,000 नौकरियाँ आउटसोर्सिंग और बैकडोर तरीके से दी गई हैं, और इन्हीं मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए BJP पर निराधार आरोप लगाए जा रहे हैं। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री की ओर से अब तक अपने आरोपों के समर्थन में कोई प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
आगे क्या होगा
यह मामला जम्मू-कश्मीर की राजनीति में तेज़ी से नया मोड़ ले रहा है। यदि मुख्यमंत्री निर्धारित समय-सीमा में नोटिस का जवाब नहीं देते, तो BJP के अनुसार अदालती कार्रवाई अवश्यंभावी है। यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनावों के बाद सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव लगातार बढ़ रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इस तरह के कानूनी दाँव-पेच आने वाले महीनों में प्रदेश की राजनीति को और गरमा सकते हैं।