मजार-ए-शुहादा बंद: उमर अब्दुल्ला बोले- 'इतिहास पढ़ना चाहिए था', BJP के ₹100 करोड़ नोटिस पर भी पलटवार
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 13 जुलाई 2026 को श्रीनगर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के नेताओं को मजार-ए-शुहादा जाने से रोके जाने पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने जुल्म के खिलाफ और जम्मू-कश्मीर की गरिमा की रक्षा के लिए संघर्ष किया, आज उन्हें श्रद्धांजलि देने की इजाजत न मिलना गहरे दुख की बात है। इसके साथ ही, उमर अब्दुल्ला ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के ₹100 करोड़ के मानहानि नोटिस पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी।
मजार बंद करने का फैसला और ऐतिहासिक संदर्भ
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट शब्दों में कहा कि शहीद मजार को बंद करने का फैसला लेने वालों को जम्मू-कश्मीर का इतिहास पढ़ना चाहिए था। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस संघर्ष को केवल मजहब की तराजू में तोलना गलत है — यह कोई धार्मिक युद्ध नहीं था, बल्कि लोकतंत्र की रक्षा और अंग्रेजी हुकूमत से आजादी के लिए लड़ी गई लड़ाई थी। उमर अब्दुल्ला ने दृढ़ता से कहा, "आज नहीं तो कल, हम वहाँ जाएँगे, पुष्पांजलि अर्पित करेंगे और फातिहा पढ़ेंगे।"
गौरतलब है कि 13 जुलाई जम्मू-कश्मीर में ऐतिहासिक रूप से संवेदनशील तारीख रही है। मजार-ए-शुहादा उन लोगों की स्मृति में बना है जिन्होंने दशकों पहले तत्कालीन शासन के विरुद्ध संघर्ष में अपनी जान दी थी। नेशनल कॉन्फ्रेंस इस स्थल को अपनी राजनीतिक और सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा मानती है।
BJP के कानूनी नोटिस पर उमर का पलटवार
भाजपा की ओर से भेजे गए ₹100 करोड़ के मानहानि नोटिस पर उमर अब्दुल्ला ने कहा, "मैं इसे बहुत सम्मान की बात मानता हूँ, क्योंकि मैं ही एकमात्र राजनेता हूँ जिसे यह नोटिस मिला है। मैं एक ऐसी राजनीतिक ताकत हूँ, जिसे वे नजरअंदाज नहीं कर सकते।" उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने एक राजनीतिक मंच पर अपनी बात रखी थी और उम्मीद थी कि भाजपा राजनीतिक रूप से जवाब देगी, लेकिन पार्टी ने अदालत का रास्ता चुना।
उमर अब्दुल्ला ने आगे घोषणा की कि नेशनल कॉन्फ्रेंस भी अब NC पर आरोप लगाने वाले भाजपा नेताओं को कानूनी नोटिस भेजना शुरू करेगी। यह बयान दोनों दलों के बीच कानूनी मोर्चे पर एक नई राजनीतिक टकराहट की शुरुआत का संकेत देता है।
विवाद की पृष्ठभूमि
दरअसल, उमर अब्दुल्ला ने हाल ही में एक सार्वजनिक सभा में BJP पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों को तोड़ने और राज्य सरकार को अस्थिर करने की कोशिश के आरोप लगाए थे। भाजपा ने इन आरोपों के सबूत माँगते हुए ₹100 करोड़ के मानहानि मुकदमे की चेतावनी देते हुए कानूनी नोटिस भेजा था। यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनावों के बाद से भाजपा और NC के बीच राजनीतिक तनाव लगातार बना हुआ है।
दिल्ली रैली और आगे की राह
दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित रैली की अनुमति के संदर्भ में उमर अब्दुल्ला ने कहा कि वे दिल्ली पुलिस के नोटिस और उसके जवाब का इंतजार कर रहे हैं। आने वाले दिनों में नेशनल कॉन्फ्रेंस की राजनीतिक सक्रियता और भाजपा के साथ कानूनी टकराव दोनों तेज होने के संकेत हैं।