13 जुलाई 2026
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वायनाड भूस्खलन: प्रियंका-राहुल की अनुपस्थिति पर भाजपा का 'यूज एंड थ्रो' हमला, कांग्रेस ने वीआईपी दौरे को बताया बाधा

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वायनाड भूस्खलन: प्रियंका-राहुल की अनुपस्थिति पर भाजपा का 'यूज एंड थ्रो' हमला, कांग्रेस ने वीआईपी दौरे को बताया बाधा

सारांश

वायनाड भूस्खलन त्रासदी अब राजनीतिक अखाड़े में है। भाजपा ने प्रियंका और राहुल की अनुपस्थिति को 'यूज एंड थ्रो' मॉडल बताया, तो कांग्रेस ने वीआईपी दौरे को राहत कार्यों में बाधा करार दिया। पीड़ितों की पीड़ा के बीच दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज़ है।

मुख्य बातें

वायनाड भूस्खलन के एक सप्ताह बाद भी प्रियंका गांधी वाड्रा और राहुल गांधी ने प्रभावित निर्वाचन क्षेत्र का दौरा नहीं किया।
भाजपा प्रवक्ता सी.आर.
केशवन , शहजाद पूनावाला और तुहिन सिन्हा ने गांधी भाई-बहनों पर 'यूज एंड थ्रो' और 'अनुपस्थित जमींदार' जैसे आरोप लगाए।
कांग्रेस के पवन खेड़ा ने कहा कि जहाँ केरल सरकार सक्रिय रूप से राहत कार्य कर रही है, वहाँ वीआईपी दौरे केवल बाधा उत्पन्न करते हैं।
प्रियंका गांधी वाड्रा ने 2024 उपचुनाव में वायनाड सीट जीती थी, जब राहुल गांधी ने रायबरेली को प्राथमिकता दी थी।
दोनों दलों के बीच यह विवाद वायनाड पुनर्निर्माण की प्रगति के साथ-साथ जारी रहने की संभावना है।

वायनाड भूस्खलन त्रासदी के एक सप्ताह बाद भी कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और पूर्व सांसद राहुल गांधी के प्रभावित निर्वाचन क्षेत्र का दौरा न करने पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तीखा हमला बोला है। 13 जुलाई को भाजपा प्रवक्ताओं ने गांधी भाई-बहनों पर 'यूज एंड थ्रो' राजनीति का आरोप लगाते हुए उन्हें 'अनुपस्थित जमींदार' करार दिया। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) ने पलटवार करते हुए कहा कि वीआईपी दौरे राहत कार्यों में बाधा बनते हैं।

भाजपा के आरोप: 'राजनीतिक मोहरा' और 'अस्थायी राजनेता'

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सी.आर. केशवन ने कहा कि वायनाड कांग्रेस के शीर्ष परिवार के लिए एक राजनीतिक मोहरा मात्र है। उन्होंने आरोप लगाया कि 'प्रियंका गांधी वाड्रा ने वायनाड की पूरी तरह से उपेक्षा की है और इस क्षेत्र को एक अनुपस्थित जमींदार की तरह छोड़ दिया है, ठीक वैसे ही जैसे राहुल गांधी ने सांसद रहते हुए किया था।'

भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने और भी कड़े शब्दों में कहा कि 'वायनाड में हुए ताज़ा भूस्खलन में कई लोगों की जान जाने और व्यापक तबाही के बाद भी न तो राहुल गांधी और न ही प्रियंका वाड्रा को प्रभावित क्षेत्र का दौरा करने या पीड़ितों से मिलने का समय मिला। यही उनका यूज एंड थ्रो वाला मॉडल है।'

भाजपा प्रवक्ता तुहिन सिन्हा ने दोनों नेताओं को 'राजनीतिक पर्यटक' करार देते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर शोक संदेश पोस्ट करने के अलावा वे 'अस्थायी राजनीतिज्ञों' की तरह व्यवहार कर रहे हैं।

कांग्रेस का बचाव: राहत कार्यों में वीआईपी दौरा बाधा

कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार अध्यक्ष पवन खेड़ा ने भाजपा के असंवेदनशीलता के आरोप को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि 'अगर प्राकृतिक आपदा आती है, तो वीआईपी दौरा क्यों होना चाहिए? वीआईपी दौरा केवल सरकार के समक्ष कमियों को उजागर करने के लिए होना चाहिए यदि सरकार पीड़ितों की चिंताओं को दूर करने में असंवेदनशील है।'

खेड़ा ने आगे कहा कि इस समय केरल सरकार सक्रिय है, राहत कार्य जारी हैं, और इन कार्यों में बाधा डालने की कोई आवश्यकता नहीं है। उनके अनुसार, जहाँ सरकार ज़िम्मेदारी से काम कर रही हो, वहाँ विपक्षी वीआईपी दौरे की ज़रूरत नहीं पड़ती।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि प्रियंका गांधी वाड्रा ने 2024 के उपचुनाव में वायनाड लोकसभा सीट जीती थी, जब राहुल गांधी ने रायबरेली और वायनाड दोनों सीटें जीतने के बाद वायनाड छोड़ी थी। यह ऐसे समय में आया है जब वायनाड भूस्खलन की त्रासदी ने पूरे देश को झकझोर दिया है और राहत एवं पुनर्वास को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।

यह पहली बार नहीं है कि किसी प्राकृतिक आपदा के बाद जन प्रतिनिधियों की उपस्थिति या अनुपस्थिति राजनीतिक विवाद का विषय बनी हो। आलोचकों का कहना है कि दोनों पक्ष पीड़ितों की पीड़ा को राजनीतिक हथियार बना रहे हैं।

आगे क्या

भाजपा के हमले जारी रहने की संभावना है, खासकर तब जब वायनाड में राहत और पुनर्निर्माण कार्यों की प्रगति सुर्खियों में बनी रहेगी। कांग्रेस के लिए यह सवाल बना रहेगा कि क्या प्रियंका गांधी वाड्रा निकट भविष्य में अपने निर्वाचन क्षेत्र का दौरा करेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो कांग्रेस का 'वीआईपी दौरे से बाधा' वाला तर्क सुविधाजनक रूप से चुनिंदा है। असली सवाल यह है कि वायनाड के पुनर्निर्माण के लिए संसद में कितनी आवाज़ उठाई गई और राहत पैकेज कितना पर्याप्त है — जो इस शोर में दब गया है। जन प्रतिनिधि की भौतिक उपस्थिति से अधिक ज़रूरी है नीतिगत जवाबदेही, और वह दोनों पक्षों से अभी नदारद है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वायनाड भूस्खलन पर भाजपा और कांग्रेस के बीच विवाद क्यों हुआ?
भाजपा ने वायनाड सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और राहुल गांधी के भूस्खलन के एक सप्ताह बाद भी निर्वाचन क्षेत्र का दौरा न करने पर कड़ी आलोचना की। पार्टी ने इसे गांधी परिवार का 'यूज एंड थ्रो' मॉडल बताया, जिस पर कांग्रेस ने वीआईपी दौरों को राहत कार्यों में बाधा बताकर जवाब दिया।
कांग्रेस ने गांधी परिवार के वायनाड न जाने का क्या बचाव किया?
कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार अध्यक्ष पवन खेड़ा ने कहा कि केरल सरकार सक्रिय रूप से राहत कार्य कर रही है और ऐसे में वीआईपी दौरे केवल बाधा उत्पन्न करते हैं। उनके अनुसार, वीआईपी दौरा तभी ज़रूरी होता है जब सरकार पीड़ितों की समस्याओं को दूर करने में असंवेदनशील हो।
भाजपा ने गांधी परिवार पर क्या-क्या आरोप लगाए?
भाजपा प्रवक्ताओं ने गांधी भाई-बहनों को 'अनुपस्थित जमींदार', 'राजनीतिक पर्यटक' और 'अस्थायी राजनेता' करार दिया। प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि व्यापक तबाही के बाद भी दोनों नेताओं ने पीड़ितों से मिलने का समय नहीं निकाला।
प्रियंका गांधी वाड्रा वायनाड की सांसद कैसे बनीं?
प्रियंका गांधी वाड्रा ने 2024 के उपचुनाव में वायनाड लोकसभा सीट जीती थी। यह उपचुनाव तब हुआ जब राहुल गांधी ने रायबरेली और वायनाड दोनों सीटें जीतने के बाद वायनाड सीट छोड़ दी थी।
वायनाड भूस्खलन के बाद राहत कार्यों की स्थिति क्या है?
कांग्रेस के अनुसार केरल सरकार सक्रिय रूप से राहत और पुनर्निर्माण कार्यों में जुटी है। हालाँकि, राजनीतिक विवाद के बीच वायनाड में राहत पैकेज और पुनर्वास की विस्तृत स्थिति पर स्वतंत्र आकलन अभी सामने नहीं आया है।
राष्ट्र प्रेस
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