राहुल गांधी की सर्वदलीय बैठक से अनुपस्थिति पर मनीषा कायंदे का तीखा निशाना, कहा- बदलें नेता विपक्ष
सारांश
Key Takeaways
- राहुल गांधी की सर्वदलीय बैठक में अनुपस्थिति पर सवाल उठाए गए हैं।
- मनीषा कायंदे ने उनकी जिम्मेदारियों पर प्रकाश डाला।
- यूनिफॉर्म सिविल कोड पर शिवसेना का समर्थन।
- कांग्रेस को अपने नेता को बदलने का सुझाव।
- देवेंद्र फडणवीस का उद्धव पर बयान।
मुंबई, २५ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। शिवसेना की नेता मनीषा कायंदे ने राहुल गांधी द्वारा विदेश नीति पर दिए गए बयान और पश्चिम एशिया संकट के संदर्भ में आयोजित सर्वदलीय बैठक में उनकी अनुपस्थिति पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी अब एक मजाक बनकर रह गए हैं, चाहे वह संसद में हों या बाहर। वह विदेशों में जाकर भी भारत की आलोचना करते रहते हैं। उनका कहना है कि जब केंद्र सरकार इतनी महत्वपूर्ण स्थिति पर बैठक बुला रही है, तो विपक्ष के नेता होने के नाते राहुल गांधी की नैतिक जिम्मेदारी है कि वह उसमें भाग लें और अपनी बात रखें।
मनीषा कायंदे ने तंज करते हुए कहा कि राहुल गांधी पर भरोसा करना मुश्किल है, क्योंकि वह बैठक छोड़कर कभी केरल चले जाते हैं या फिर विदेश निकल जाते हैं। उन्होंने कहा कि एक विपक्ष के नेता की भूमिका लोकतंत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण होती है और उसे देश के हित में जिम्मेदारी से कार्य करना चाहिए, लेकिन राहुल गांधी इस जिम्मेदारी को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। बैठक में शामिल न होना यह दर्शाता है कि वह इस मुद्दे को लेकर गंभीर नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को संसद और बैठकों में तथ्यों के साथ अपनी बात पेश करनी चाहिए, लेकिन वह बिना सबूतों के बयान देते हैं, जिससे लोग उन्हें गंभीरता से नहीं लेते। उन्होंने सुझाव दिया कि कांग्रेस को अब अपने नेता विपक्ष को बदलने पर विचार करना चाहिए।
यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) के संदर्भ में उन्होंने कहा कि शिवसेना हमेशा से इसके समर्थन में रही है। बालासाहब ठाकरे के समय से ही पार्टी यूसीसी की मांग करती रही है और भाजपा को भी इस मुद्दे पर समर्थन देती रही है। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 हटाने और राम मंदिर बनने के बाद अब देश में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू होना चाहिए और महाराष्ट्र में भी इसे लाना आवश्यक है।
सीएम देवेंद्र फडणवीस द्वारा उद्धव ठाकरे पर दिए गए बयान पर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि फडणवीस की अपनी एक शैली है, जिसमें वह कभी शेर-ओ-शायरी या कविता के जरिए अपनी बात रखते हैं और यह उनका अधिकार है। उन्होंने कहा कि जो कुछ भी कहना था, वह कह चुके हैं। उनका कहना है कि उद्धव ठाकरे ने पहले बहुत कुछ कहा है और बाद में कुछ किया भी है।