मनीषा कायंदे ने राहुल गांधी को मानसिक संतुलन खोने का आरोप लगाया
सारांश
Key Takeaways
- राहुल गांधी का मानसिक संतुलन खोने का आरोप
- एआई टेक्नोलॉजी की चर्चा
- टीएमसी सरकार पर मनीषा कायंदे की आलोचना
- गैस किल्लत का वैश्विक प्रभाव
- संविधान में धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार
मुंबई, 10 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। शिवसेना की नेता मनीषा कायंदे ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के हालिया बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि राहुल गांधी अपना मानसिक संतुलन खो बैठे हैं। राहुल गांधी ने एआई समिट में यूथ कांग्रेस के प्रदर्शन का समर्थन किया था।
मनीषा कायंदे ने यह भी कहा कि राहुल गांधी किस काल में जी रहे हैं, यह उनसे पूछना चाहिए। उनका मानना है कि राहुल गांधी अब मानसिक संतुलन से बाहर हैं। देश एआई टेक्नोलॉजी की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जबकि महाराष्ट्र में राहुल गांधी के कार्यकर्ता इस तरह के घिनौने आंदोलनों में लगे हुए हैं, जो देश की प्रगति में बाधा डालते हैं।
टीएमसी सरकार पर निशाना साधते हुए मनीषा कायंदे ने कहा कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर के खिलाफ भारी विरोध हुआ। इसका मुख्य मुद्दा अवैध वोटरों को हटाना था, लेकिन वहां की सरकार और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसका विरोध किया। यह शर्मनाक है कि जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पश्चिम बंगाल दौरे पर थीं, तो उन्हें बार-बार कार्यक्रम स्थल बदलना पड़ा। यहां तक कि मुख्यमंत्री, जो एक महिला हैं, राष्ट्रपति के उपस्थित होने पर भी वहां नहीं पहुंचीं। हम इस घटना की निंदा करते हैं।
गैस की कमी के मुद्दे पर मनीषा कायंदे ने कहा कि विपक्ष को बोलने का मौका मिलता है, लेकिन उन्हें यह भी देखना चाहिए कि वैश्विक स्तर पर युद्ध जैसी परिस्थिति बनी हुई है। इसका असर केवल भारत पर नहीं, बल्कि अन्य देशों पर भी पड़ रहा है। केंद्र सरकार इस स्थिति पर नजर रखे हुए है और समस्या का समाधान खोजने की कोशिश कर रही है।
टी-20 वर्ल्ड कप ट्रॉफी को हनुमान मंदिर ले जाने के मुद्दे पर टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद के बयान पर मनीषा कायंदे ने कहा कि जो व्यक्ति यह पुरस्कार जीतता है, उसकी यह भावना होती है। अगर वह ट्रॉफी मंदिर ले जाना चाहता है, तो यह उसकी व्यक्तिगत इच्छा है। इसमें धर्म का कोई मुद्दा नहीं है।
चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार द्वारा बंगाल के कालीघाट मंदिर में पूजा करने पर मनीषा कायंदे ने कहा कि हमारे संविधान में हर व्यक्ति को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार है। संविधान ने हमें यह अधिकार दिया है, और जो लोग इसकी बात करते हैं, उन्हें इसे समझना चाहिए।