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भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर बीपीसीएल के पूर्व मार्केटिंग डायरेक्टर का बड़ा बयान, वैश्विक संकट में भी नहीं टूटी ईंधन आपूर्ति

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भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर बीपीसीएल के पूर्व मार्केटिंग डायरेक्टर का बड़ा बयान, वैश्विक संकट में भी नहीं टूटी ईंधन आपूर्ति

सारांश

वैश्विक ऊर्जा उथल-पुथल के बीच भारत ने किस तरह अपनी ईंधन आपूर्ति निर्बाध रखी — बीपीसीएल के पूर्व मार्केटिंग डायरेक्टर सुखमल कुमार जैन ने 40 देशों से आयात, रणनीतिक भंडार और मंत्रालयी समन्वय को इसकी असली ताकत बताया। साथ ही नायरा की ₹5 पेट्रोल कटौती ने आम उपभोक्ताओं को राहत दी।

मुख्य बातें

बीपीसीएल के पूर्व मार्केटिंग डायरेक्टर सुखमल कुमार जैन ने 1 जुलाई को कहा कि वैश्विक ऊर्जा संकट में भारत की ईंधन आपूर्ति प्रभावित नहीं हुई।
भारत आज 40 से अधिक देशों से कच्चा तेल आयात करता है, जो आपूर्ति जोखिम को कम करता है।
पिछले 11 वर्षों में रिफाइनरी आधुनिकीकरण, पाइपलाइन, एलएनजी टर्मिनल और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार पर बड़े पैमाने पर निवेश हुआ।
विदेश मंत्रालय , पेट्रोलियम मंत्रालय , इंडियन ऑयल , बीपीसीएल और एचपीसीएल के बीच निरंतर समन्वय संकट प्रबंधन की कुंजी रहा।
ईंधन विक्रेता नायरा ने पेट्रोल में ₹5 और डीजल में ₹3 प्रति लीटर की कटौती की, जिसे उपभोक्ताओं ने सराहा।

भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) के पूर्व मार्केटिंग डायरेक्टर सुखमल कुमार जैन ने 1 जुलाई को कहा कि वैश्विक ऊर्जा संकट के सबसे कठिन दौर में भी भारत में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की आपूर्ति बाधित नहीं हुई — और इसका श्रेय सरकार की सक्रिय कूटनीति, बहु-स्तरीय समन्वय और पूर्व-नियोजित रणनीतिक भंडारण को जाता है। उनके अनुसार, भारत की ऊर्जा सुरक्षा आज केवल एक नीतिगत दस्तावेज़ नहीं, बल्कि एक जीवंत और परीक्षित व्यवस्था बन चुकी है।

कूटनीति और समन्वय: संकट में ढाल

जैन ने बताया कि संकट के दौरान विदेश मंत्रालय, पेट्रोलियम मंत्रालय, शिपिंग एजेंसियों और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों — इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम — के बीच निरंतर समीक्षा बैठकें होती रहीं। उन्होंने कहा, 'भारत का उद्देश्य केवल इतना था कि ऊर्जा आपूर्ति बाधित न हो।' इसी समन्वित प्रयास के चलते एलपीजी कार्गो सुरक्षित रूप से भारत पहुँचते रहे और जनता के बीच किसी प्रकार की घबराहट या अनावश्यक खरीदारी की स्थिति नहीं बनी।

विविध आयात स्रोत: जोखिम प्रबंधन की कुंजी

जैन के अनुसार, भारत आज 40 से अधिक देशों से कच्चा तेल खरीदता है। यह विविधीकरण रणनीति किसी एक क्षेत्र या मार्ग पर निर्भरता को कम करती है और संकट की स्थिति में आपूर्ति जोखिम को काफी हद तक सीमित करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी एक क्षेत्र में व्यवधान आता है, तो वैकल्पिक स्रोत तत्काल सक्रिय किए जा सकते हैं।

बुनियादी ढाँचे में निवेश: 11 वर्षों की तैयारी

जैन ने बताया कि पिछले 11 वर्षों में भारत ने रिफाइनरियों के आधुनिकीकरण, पाइपलाइन नेटवर्क के विस्तार, एलएनजी टर्मिनलों, सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार पर बड़े पैमाने पर निवेश किया है। यही मजबूत बुनियादी ढाँचा संकट के समय काम आया और भारत को पहले की तुलना में कहीं अधिक लचीला और ऊर्जा-सक्षम बनाता है।

नायरा का मूल्य कटौती फैसला: ग्राहकों को राहत

इसी बीच, बुधवार को ईंधन विक्रेता नायरा ने पेट्रोल के दाम ₹5 प्रति लीटर और डीजल के दाम ₹3 प्रति लीटर घटाने का फैसला किया, जिसका ग्राहकों ने स्वागत किया। अहमदाबाद के ग्राहक दीपक रोचवानी ने कहा कि इस फैसले से उबर, रैपिडो और स्विगी जैसे प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले दैनिक उपयोगकर्ताओं को सीधा लाभ मिलेगा। एक अन्य ग्राहक कल्पेश भाई तावनी ने इसे उपभोक्ता हित में सकारात्मक कदम बताया, जबकि मर्गेश सुतारिया ने कहा कि दरें कम होने से ग्राहक वर्ग में खुशी है।

आगे की राह

जैन के बयान ऐसे समय में आए हैं जब वैश्विक तेल बाज़ार में अनिश्चितता बनी हुई है और भू-राजनीतिक तनाव आपूर्ति शृंखलाओं को प्रभावित कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की बहु-स्रोत आयात नीति और रणनीतिक भंडार प्रणाली आने वाले वर्षों में ऊर्जा स्थिरता की आधारशिला बने रहेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ध्यान देने योग्य है कि रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार की वास्तविक क्षमता और उपयोग के आँकड़े सार्वजनिक रूप से सीमित ही रहे हैं। 40 देशों से आयात की विविधता प्रभावशाली है, परंतु रूस पर बढ़ती निर्भरता — जो हाल के वर्षों में भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बना — एक अलग भू-राजनीतिक जोखिम पैदा करती है जिस पर खुलकर चर्चा कम होती है। नायरा की मूल्य कटौती स्वागतयोग्य है, लेकिन सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों द्वारा समान कदम न उठाना उपभोक्ताओं के लिए एक अनुत्तरित प्रश्न छोड़ता है।
RashtraPress
1 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वैश्विक ऊर्जा संकट में भारत की ईंधन आपूर्ति कैसे सुरक्षित रही?
बीपीसीएल के पूर्व मार्केटिंग डायरेक्टर सुखमल कुमार जैन के अनुसार, विदेश मंत्रालय, पेट्रोलियम मंत्रालय और सार्वजनिक तेल कंपनियों के बीच निरंतर समन्वय, वैकल्पिक आपूर्ति व्यवस्था और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार के चलते पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की उपलब्धता बाधित नहीं हुई।
भारत कितने देशों से कच्चा तेल खरीदता है?
जैन के अनुसार भारत आज 40 से अधिक देशों से कच्चा तेल आयात करता है। यह विविधीकरण किसी एक क्षेत्र या आपूर्ति मार्ग पर निर्भरता कम करता है और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती देता है।
नायरा ने पेट्रोल-डीजल के दाम कितने घटाए?
बुधवार को नायरा ने पेट्रोल के दाम ₹5 प्रति लीटर और डीजल के दाम ₹3 प्रति लीटर कम किए। इस फैसले का अहमदाबाद सहित देशभर के ग्राहकों ने स्वागत किया और इसे दैनिक यात्रियों व गिग वर्कर्स के लिए राहत भरा बताया।
पिछले 11 वर्षों में भारत ने ऊर्जा बुनियादी ढाँचे में क्या निवेश किया?
जैन के अनुसार, पिछले 11 वर्षों में रिफाइनरियों का आधुनिकीकरण, पाइपलाइन नेटवर्क का विस्तार, एलएनजी टर्मिनलों का निर्माण, सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार विकसित किए गए। यही निवेश संकट के समय भारत की ऊर्जा स्थिरता की नींव बना।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा नीति का आम जनता पर क्या असर पड़ा?
जैन ने बताया कि लगातार निगरानी और समन्वित प्रबंधन के चलते जनता के बीच कहीं भी घबराहट या अनावश्यक खरीदारी की स्थिति नहीं बनी। सही जानकारी समय पर उपलब्ध कराई गई, जिससे आपूर्ति शृंखला स्थिर रही और उपभोक्ताओं को किसी कमी का सामना नहीं करना पड़ा।
राष्ट्र प्रेस
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