एलपीजी से पीएनजी पर स्विच: केंद्र ने राज्यों से जिला स्तर पर प्रशासनिक सहयोग माँगा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 23 अगस्त 2026 को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से घरेलू रसोई गैस कनेक्शंस को लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) से पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) पर तेज़ी से स्थानांतरित करने के लिए जिला स्तरीय प्रशासनिक सहयोग देने का आग्रह किया है। पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को भेजे पत्र में इस दिशा में ठोस कदम उठाने की अपील की है।
केंद्र का आग्रह और मुख्य घटनाक्रम
पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल ने अपने पत्र में कहा है कि जहाँ पाइपलाइन गैस उपलब्ध है, वहाँ जिला स्तर पर हस्तक्षेप अनिवार्य है। उनके अनुसार, 'पीएनजी एक अधिक सुरक्षित, स्वच्छ और कुशल खाना पकाने का ईंधन उपलब्ध कराती है। यह देश के एनर्जी ट्रांजिशन के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।' साथ ही, सरकार का लक्ष्य एक ऐसा नियामकीय ढाँचा लागू करना है जिसके तहत किसी घर में एलपीजी और पीएनजी दोनों कनेक्शन एक साथ रखने की व्यवस्था को रोका जा सके।
पश्चिम एशिया संकट से मिला सबक
यह पहल ऐसे समय में आई है जब पश्चिम एशिया संकट के दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के ज़रिए एलपीजी आपूर्ति बाधित हुई थी — जिस मार्ग से भारत के करीब 50 प्रतिशत एलपीजी आयात होते हैं। इस व्यवधान ने एलपीजी की सप्लाई चेन में बड़ी बाधा उत्पन्न की थी। संकट के दौरान करीब 7.99 लाख पीएनजी कनेक्शनों को गैसीफाई किया गया, जबकि अतिरिक्त 2.87 लाख कनेक्शनों के लिए बुनियादी ढाँचा तैयार किया गया, जिससे कुल क्षमता 10.86 लाख कनेक्शन तक पहुँच गई। गौरतलब है कि यह आँकड़ा पीएनजी के विस्तार की वास्तविक माँग और तात्कालिकता को रेखांकित करता है।
नई नियामकीय व्यवस्था
सरकार ने लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (सप्लाई एंड डिस्ट्रीब्यूशन का रेगुलेशन) संशोधन आदेश, 2026 भी अधिसूचित किया है, जिसका उद्देश्य पीएनजी अपनाने वाले घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं को अतिरिक्त राहत और सुविधा देना है। इसके अलावा, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने अधिकृत सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (सीजीडी) कंपनियों और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों को प्रत्येक भौगोलिक क्षेत्र में पीएनजी समन्वय समिति (पीसीसी) गठित करने का निर्देश दिया है।
जिला प्रशासन की भूमिका
ये समितियाँ पात्र हाउसिंग सोसाइटियों और घरों की पहचान करेंगी, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) और व्यक्तिगत उपभोक्ताओं को वैधानिक नोटिस जारी करेंगी तथा जागरूकता शिविर आयोजित करेंगी। जिला प्रशासन से अपेक्षा की गई है कि वह राइट ऑफ वे और राइट ऑफ यूज दिलाने में सहायता करे, एलपीजी वितरकों और सीजीडी कंपनियों के बीच ट्रांजिशन को सुगम बनाए, तथा उपभोक्ताओं की शिकायतों का समाधान करे। मंत्रालय के अनुसार, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के अधिकारी इस कार्य के लिए सबसे उपयुक्त हैं, क्योंकि उनका एलपीजी वितरकों के साथ पहले से नियामकीय संपर्क है।
आगे क्या होगा
राज्य सरकारों से कहा गया है कि वे जिला स्तर पर एक नोडल अधिकारी नामित करें जो स्थानीय पीसीसी के साथ औपचारिक रूप से जुड़ा रहे। जहाँ आवश्यक हो, वहाँ गैर-सार्वजनिक क्षेत्रों में प्रवेश से इनकार किए जाने पर संबंधित अधिकारियों को नियंत्रण आदेशों के तहत शक्तियों का उपयोग करने का अधिकार भी दिया जाएगा। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि सरकार समयबद्ध तरीके से पीएनजी के उपयोग को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है, और यह कदम देश के दीर्घकालिक ऊर्जा परिवर्तन लक्ष्यों की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है।