ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद किया, अमेरिकी हमले के बाद IRGC का बड़ा फैसला
सारांश
मुख्य बातें
ईरान की नवगठित समुद्री निगरानी संस्था पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी ने 11 जून को घोषणा की कि रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को 'अगली सूचना तक पूरी तरह बंद' कर दिया गया है। यह आदेश इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) द्वारा बुधवार रात जारी किए जाने के बाद प्रभावी हुआ। ईरान के एक मालवाहक जहाज को अमेरिकी प्रक्षेपास्त्र से निशाना बनाए जाने की घटना इस निर्णय की तात्कालिक वजह बताई जा रही है।
घटनाक्रम: क्या हुआ और कैसे
सिरिक काउंटी के गवर्नर रेजा शाहीदियान के अनुसार, जिस ईरानी मालवाहक जहाज को निशाना बनाया गया, वह 150 टन का स्थानीय स्वामित्व वाला पोत था। यह जहाज ओमान के खासाब बंदरगाह से आवश्यक सामान लेकर जा रहा था और घटना ओमान की खाड़ी में बंदरगाह से लगभग 5 समुद्री मील की दूरी पर हुई।
इसके बाद IRGC ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जारी बयान में कहा: 'अमेरिकी बलों की आक्रामकता से उत्पन्न तनाव और ईरानी सशस्त्र बलों के हालिया बयान के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य को अगले आदेश तक बंद किया जाता है।' साथ ही चेतावनी दी गई कि जो भी जहाज इस मार्ग से गुजरने का प्रयास करेगा, उसे शत्रुपक्ष का सहयोगी माना जाएगा और उसे निशाना बनाया जाएगा।
पहले से अनुमति प्राप्त जहाजों को निर्देश
अधिकारियों के अनुसार, जिन जहाजों को पहले से पारगमन की अनुमति दी जा चुकी थी, उन्हें आगे के निर्देशों की प्रतीक्षा करने और स्थिति सामान्य होने तक धैर्य बनाए रखने को कहा गया है। फिलहाल इन जहाजों के लिए कोई वैकल्पिक मार्ग निर्धारित नहीं किया गया है।
अमेरिका का दावा: जलमार्ग खुला है
ईरान और अमेरिका के बीच इस मुद्दे पर परस्पर विरोधी दावे सामने आए हैं। जहाँ ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह बंद घोषित किया है, वहीं अमेरिकी सेना ने दावा किया कि जलमार्ग बंद नहीं है और जहाज अब भी इस रास्ते से आवाजाही कर रहे हैं। दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।
वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर संभावित असर
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज विश्व के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। यदि यह बंदी लंबे समय तक जारी रही, तो आलोचकों का कहना है कि इसका सीधा प्रभाव अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति पर पड़ सकता है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में हुआ है जब ईरान-अमेरिका तनाव पहले से ही चरम पर है।
आगे क्या होगा
फिलहाल स्थिति अनिश्चित बनी हुई है। दोनों देशों के परस्पर विरोधी दावों के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़रें इस जलमार्ग पर टिकी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि तनाव कम नहीं हुआ तो वैश्विक तेल बाज़ार में अस्थिरता और बढ़ सकती है।