26 जून 2026
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बाड़मेर रिफाइनरी में 5 साल की देरी: गहलोत ने BJP पर साधा निशाना, लागत ₹37,000 करोड़ से बढ़कर ₹80,000 करोड़ पार

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बाड़मेर रिफाइनरी में 5 साल की देरी: गहलोत ने BJP पर साधा निशाना, लागत ₹37,000 करोड़ से बढ़कर ₹80,000 करोड़ पार

सारांश

बाड़मेर रिफाइनरी का उद्घाटन सिर्फ एक समारोह नहीं — यह एक राजनीतिक रणभूमि बन चुकी है। गहलोत ने BJP पर पाँच साल की देरी और ₹43,000 करोड़ की लागत वृद्धि का आरोप लगाकर PM मोदी के दौरे से पहले ही सवालों की झड़ी लगा दी है।

मुख्य बातें

पूर्व CM अशोक गहलोत ने 26 जून को बाड़मेर रिफाइनरी में कथित 5 साल की देरी के लिए BJP पर निशाना साधा।
रिफाइनरी की अनुमानित लागत ₹37,000 करोड़ से बढ़कर ₹80,000 करोड़ से अधिक हो गई।
गहलोत ने परियोजना का श्रेय पूर्व PM मनमोहन सिंह और पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को दिया।
गहलोत ने माँग की कि PM मोदी रिफाइनरी का भव्य सार्वजनिक उद्घाटन करें, न कि परिसर के भीतर बैठक।
BJP नेता किरोड़ी लाल मीना के गोविंद सिंह डोटासरा पर लगाए आरोपों को गहलोत ने बेबुनियाद और राजनीति से प्रेरित बताया।

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शुक्रवार, 26 जून को बाड़मेर रिफाइनरी परियोजना में हुई देरी को लेकर केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर तीखा हमला बोला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित दौरे से ठीक पहले गहलोत ने आरोप लगाया कि राज्य में पिछली BJP सरकार के कार्यकाल में यह परियोजना कथित तौर पर पाँच साल तक ठप रही, जिससे इसकी अनुमानित लागत ₹37,000 करोड़ से बढ़कर ₹80,000 करोड़ से अधिक हो गई।

मुख्य आरोप और सवाल

पत्रकारों से बातचीत में गहलोत ने सीधे पूछा कि पिछली BJP सरकार के दौरान रिफाइनरी का काम पाँच साल तक क्यों रुका रहा। उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री और NDA सरकार को इसका जवाब देना चाहिए। राजस्थान के लोगों को यह जानने का पूरा अधिकार है कि इस लागत वृद्धि और परियोजना में देरी के कारण हुए वित्तीय नुकसान के लिए कौन जिम्मेदार है।'

गहलोत ने यह भी कहा कि उन्होंने अखबारों में पढ़ा कि प्रधानमंत्री बड़ी जनसभा को संबोधित करने की बजाय रिफाइनरी परिसर के भीतर एक बैठक करेंगे। उनके अनुसार, यह परियोजना राजस्थान के लिए इतनी महत्वपूर्ण उपलब्धि है कि इसका भव्य सार्वजनिक उद्घाटन होना चाहिए।

परियोजना की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

गहलोत ने परियोजना की उत्पत्ति का श्रेय कांग्रेस सरकार को देते हुए कहा कि बाड़मेर में तेल की खोज के बाद तत्कालीन कांग्रेस सरकार के निरंतर प्रयासों से ही रिफाइनरी निर्माण संभव हो पाया।

उन्होंने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) और राजस्थान सरकार के बीच समन्वय बनाकर रिफाइनरी कंपनी के गठन में निर्णायक भूमिका निभाई थी।

राहुल गांधी के दो साल पर टिप्पणी

कांग्रेस नेता राहुल गांधी के लोकसभा में विपक्ष के नेता के रूप में दो वर्ष पूरे होने के अवसर पर गहलोत ने इस कार्यकाल को 'ऐतिहासिक' बताया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी किसानों, मजदूरों, युवाओं और गरीबों से जुड़े मुद्दों पर एक सशक्त आवाज बनकर उभरे हैं और संसद के अंदर तथा बाहर दोनों जगह केंद्र की नीतियों पर लगातार सवाल उठाते रहे हैं। गहलोत ने नीट परीक्षा विवाद पर राष्ट्रव्यापी आंदोलन का नेतृत्व करने का श्रेय भी राहुल गांधी को दिया।

डोटासरा पर आरोपों को बताया बेबुनियाद

BJP नेता और राजस्थान के मंत्री किरोड़ी लाल मीना द्वारा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा पर लगाए गए आरोपों पर गहलोत ने कहा कि ये आरोप बेबुनियाद और राजनीति से प्रेरित हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी आरोप को तथ्यों और साक्ष्यों से समर्थित होना चाहिए, और बिना प्रमाण के आरोप लगाना अस्वीकार्य है।

आगे क्या होगा

प्रधानमंत्री मोदी के बाड़मेर दौरे और रिफाइनरी से जुड़े कार्यक्रम पर सभी की निगाहें टिकी हैं। गहलोत के इन सवालों ने राजस्थान की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है — लागत वृद्धि की जवाबदेही और परियोजना के उद्घाटन के स्वरूप को लेकर विपक्ष आने वाले दिनों में और मुखर होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 करोड़ से ₹80,000 करोड़ तक पहुँचना महज एक संख्या नहीं — यह सार्वजनिक धन की जवाबदेही का सवाल है, जिसे दोनों पक्ष अपनी-अपनी सुविधा से परिभाषित कर रहे हैं। गहलोत का हमला तथ्यों पर आधारित है, लेकिन यह भी उतना ही सच है कि कांग्रेस के अपने कार्यकाल में परियोजना की गति को लेकर सवाल उठते रहे हैं। असली जनहित का सवाल यह है कि इस लागत वृद्धि की स्वतंत्र जाँच कब होगी और किसके कंधे पर यह बोझ पड़ेगा — राजस्थान की जनता के या सरकारी खजाने के।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बाड़मेर रिफाइनरी परियोजना में देरी का आरोप किस पर है?
अशोक गहलोत ने आरोप लगाया है कि राजस्थान में पिछली BJP सरकार के कार्यकाल में बाड़मेर रिफाइनरी का काम कथित तौर पर पाँच साल तक रुका रहा। इस देरी के कारण परियोजना की अनुमानित लागत ₹37,000 करोड़ से बढ़कर ₹80,000 करोड़ से अधिक हो गई।
बाड़मेर रिफाइनरी की लागत इतनी क्यों बढ़ी?
गहलोत के अनुसार, परियोजना में कथित पाँच साल की देरी के कारण लागत ₹37,000 करोड़ से बढ़कर ₹80,000 करोड़ से अधिक हो गई। हालाँकि सरकार की ओर से इस पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण अभी सामने नहीं आया है।
बाड़मेर रिफाइनरी परियोजना की शुरुआत कैसे हुई?
गहलोत के अनुसार, बाड़मेर में तेल की खोज के बाद तत्कालीन कांग्रेस सरकार के प्रयासों से यह परियोजना आकार ले सकी। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने HPCL और राजस्थान सरकार के बीच समन्वय स्थापित करके रिफाइनरी कंपनी के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
गहलोत ने PM मोदी के बाड़मेर दौरे पर क्या कहा?
गहलोत ने कहा कि प्रधानमंत्री को रिफाइनरी परिसर के भीतर बैठक करने की बजाय एक भव्य सार्वजनिक उद्घाटन समारोह आयोजित करना चाहिए। उनके अनुसार, यह राजस्थान के लिए एक ऐतिहासिक परियोजना है और इसे उचित सम्मान मिलना चाहिए।
गोविंद सिंह डोटासरा पर किरोड़ी लाल मीना के आरोपों पर गहलोत का क्या कहना है?
गहलोत ने BJP नेता और राजस्थान के मंत्री किरोड़ी लाल मीना द्वारा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा पर लगाए गए आरोपों को बेबुनियाद और राजनीति से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि आरोपों को तथ्यों और सबूतों से समर्थित होना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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