पचपदरा रिफाइनरी विवाद: गहलोत ने भजनलाल के दावे को 'तथ्यात्मक रूप से गलत' बताया, 2013 की तस्वीरें शेयर कीं
सारांश
मुख्य बातें
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 4 जुलाई को बालोतरा जिले की पचपदरा रिफाइनरी को लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के उस कथित बयान को 'तथ्यों के हिसाब से गलत और दुर्भाग्यपूर्ण' करार दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि रिफाइनरी की आधारशिला 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रखी थी। गहलोत ने सोशल मीडिया पर वर्ष 2013 के उस समारोह की तस्वीरें साझा कीं, जिसमें तत्कालीन यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री एम. वीरप्पा मोइली उपस्थित थे।
विवाद की जड़
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कथित तौर पर दावा किया कि पचपदरा रिफाइनरी की आधारशिला 2018 में प्रधानमंत्री मोदी ने रखी थी। इस बयान पर तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए अशोक गहलोत ने कहा कि यह चिंता की बात है कि राज्य के मुखिया को राजस्थान की एक प्रमुख विकास परियोजना के इतिहास की सही जानकारी नहीं है।
गहलोत के अनुसार, आधिकारिक रिकॉर्ड और तस्वीरें स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि इस परियोजना की औपचारिक शुरुआत कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुई थी।
परियोजना में देरी और लागत विस्फोट
गहलोत ने आरोप लगाया कि 2013 में काम शुरू होने के बाद सरकार बदलने के कारण यह परियोजना लगभग पाँच वर्षों तक ठप रही। उनके अनुसार इस देरी का सीधा असर लागत पर पड़ा — परियोजना की अनुमानित लागत ₹37,000 करोड़ से बढ़कर लगभग ₹80,000 करोड़ हो गई, जिससे राज्य पर भारी आर्थिक बोझ पड़ा।
गौरतलब है कि इस स्तर की लागत वृद्धि बड़ी बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं में असामान्य नहीं है, लेकिन विपक्ष इसे राजनीतिक अड़ंगेबाज़ी का परिणाम बता रहा है।
26% हिस्सेदारी और HPCL से समझौते का दावा
गहलोत ने दावा किया कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) को परियोजना में निवेश के लिए राज़ी करने से पहले राजस्थान के लिए 26 प्रतिशत इक्विटी हिस्सेदारी सुनिश्चित की थी। उन्होंने कहा कि यह बातचीत इसलिए उल्लेखनीय है क्योंकि आमतौर पर राज्य सरकारें रिफाइनरी परियोजनाओं में इक्विटी हिस्सेदारी नहीं रखती हैं।
इसी के परिणामस्वरूप संयुक्त उद्यम एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड (HRRL) का गठन संभव हो सका।
गहलोत की भजनलाल से अपील
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से आग्रह किया कि वे परियोजना से जुड़े किसी भी सार्वजनिक बयान से पहले राज्य प्रशासन और सचिवालय में उपलब्ध आधिकारिक फाइलों, रिकॉर्ड और दस्तावेजों को अवश्य देखें। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से ऐतिहासिक तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत किए जाने से रोका जा सकेगा और जनता तक सही जानकारी पहुँचेगी।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब पचपदरा रिफाइनरी परियोजना अपने अंतिम चरणों में है और इसके श्रेय को लेकर राजनीतिक दलों के बीच खींचतान जारी है।