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पचपदरा रिफाइनरी विवाद: गहलोत ने भजनलाल के दावे को 'तथ्यात्मक रूप से गलत' बताया, 2013 की तस्वीरें शेयर कीं

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पचपदरा रिफाइनरी विवाद: गहलोत ने भजनलाल के दावे को 'तथ्यात्मक रूप से गलत' बताया, 2013 की तस्वीरें शेयर कीं

सारांश

पचपदरा रिफाइनरी का श्रेय किसे — यह सवाल अब राजस्थान की राजनीति में नई आग लगा रहा है। गहलोत ने 2013 की तस्वीरें दिखाकर भजनलाल के 2018 वाले दावे को सीधे चुनौती दी है। ₹37,000 करोड़ से ₹80,000 करोड़ तक पहुँची लागत और पाँच साल की देरी — यह विवाद सिर्फ इतिहास का नहीं, जवाबदेही का भी है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कथित तौर पर कहा कि पचपदरा रिफाइनरी की आधारशिला 2018 में PM मोदी ने रखी थी।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस दावे को 'तथ्यात्मक रूप से गलत' बताया और 2013 के समारोह की तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर कीं।
2013 के आधारशिला समारोह में तत्कालीन यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व पेट्रोलियम मंत्री एम.
वीरप्पा मोइली शामिल थे।
गहलोत के अनुसार सरकार बदलने के कारण परियोजना लगभग पाँच वर्षों तक रुकी रही, जिससे लागत ₹37,000 करोड़ से बढ़कर ₹80,000 करोड़ हो गई।
कांग्रेस सरकार ने HPCL से बातचीत कर राजस्थान के लिए 26% इक्विटी हिस्सेदारी सुनिश्चित की और संयुक्त उद्यम HRRL का गठन किया।

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 4 जुलाई को बालोतरा जिले की पचपदरा रिफाइनरी को लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के उस कथित बयान को 'तथ्यों के हिसाब से गलत और दुर्भाग्यपूर्ण' करार दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि रिफाइनरी की आधारशिला 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रखी थी। गहलोत ने सोशल मीडिया पर वर्ष 2013 के उस समारोह की तस्वीरें साझा कीं, जिसमें तत्कालीन यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री एम. वीरप्पा मोइली उपस्थित थे।

विवाद की जड़

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कथित तौर पर दावा किया कि पचपदरा रिफाइनरी की आधारशिला 2018 में प्रधानमंत्री मोदी ने रखी थी। इस बयान पर तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए अशोक गहलोत ने कहा कि यह चिंता की बात है कि राज्य के मुखिया को राजस्थान की एक प्रमुख विकास परियोजना के इतिहास की सही जानकारी नहीं है।

गहलोत के अनुसार, आधिकारिक रिकॉर्ड और तस्वीरें स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि इस परियोजना की औपचारिक शुरुआत कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुई थी।

परियोजना में देरी और लागत विस्फोट

गहलोत ने आरोप लगाया कि 2013 में काम शुरू होने के बाद सरकार बदलने के कारण यह परियोजना लगभग पाँच वर्षों तक ठप रही। उनके अनुसार इस देरी का सीधा असर लागत पर पड़ा — परियोजना की अनुमानित लागत ₹37,000 करोड़ से बढ़कर लगभग ₹80,000 करोड़ हो गई, जिससे राज्य पर भारी आर्थिक बोझ पड़ा।

गौरतलब है कि इस स्तर की लागत वृद्धि बड़ी बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं में असामान्य नहीं है, लेकिन विपक्ष इसे राजनीतिक अड़ंगेबाज़ी का परिणाम बता रहा है।

26% हिस्सेदारी और HPCL से समझौते का दावा

गहलोत ने दावा किया कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) को परियोजना में निवेश के लिए राज़ी करने से पहले राजस्थान के लिए 26 प्रतिशत इक्विटी हिस्सेदारी सुनिश्चित की थी। उन्होंने कहा कि यह बातचीत इसलिए उल्लेखनीय है क्योंकि आमतौर पर राज्य सरकारें रिफाइनरी परियोजनाओं में इक्विटी हिस्सेदारी नहीं रखती हैं।

इसी के परिणामस्वरूप संयुक्त उद्यम एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड (HRRL) का गठन संभव हो सका।

गहलोत की भजनलाल से अपील

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से आग्रह किया कि वे परियोजना से जुड़े किसी भी सार्वजनिक बयान से पहले राज्य प्रशासन और सचिवालय में उपलब्ध आधिकारिक फाइलों, रिकॉर्ड और दस्तावेजों को अवश्य देखें। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से ऐतिहासिक तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत किए जाने से रोका जा सकेगा और जनता तक सही जानकारी पहुँचेगी।

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब पचपदरा रिफाइनरी परियोजना अपने अंतिम चरणों में है और इसके श्रेय को लेकर राजनीतिक दलों के बीच खींचतान जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह है कि पाँच साल की देरी और ₹43,000 करोड़ की अतिरिक्त लागत की ज़िम्मेदारी कौन लेगा। दोनों पक्ष दस्तावेज़ों और तस्वीरों की आड़ में जनता का ध्यान इस आर्थिक नुकसान से भटका रहे हैं। जब तक परियोजनाओं में देरी के लिए कोई संस्थागत जवाबदेही तय नहीं होती, ऐसे विवाद बार-बार उठते रहेंगे।
RashtraPress
4 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पचपदरा रिफाइनरी की आधारशिला वास्तव में कब रखी गई थी?
अशोक गहलोत के अनुसार पचपदरा रिफाइनरी की आधारशिला 2013 में रखी गई थी, जिसमें तत्कालीन यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व पेट्रोलियम मंत्री एम. वीरप्पा मोइली उपस्थित थे। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कथित तौर पर 2018 में PM मोदी द्वारा आधारशिला रखे जाने का दावा किया था, जिसे गहलोत ने गलत बताया है।
पचपदरा रिफाइनरी की लागत इतनी क्यों बढ़ गई?
गहलोत के अनुसार 2013 में काम शुरू होने के बाद सरकार बदलने से परियोजना लगभग पाँच वर्षों तक रुकी रही। इस देरी के कारण अनुमानित लागत ₹37,000 करोड़ से बढ़कर लगभग ₹80,000 करोड़ हो गई।
HRRL (एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड) क्या है?
HRRL, HPCL और राजस्थान सरकार का संयुक्त उद्यम है। गहलोत का दावा है कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने HPCL से बातचीत कर राजस्थान के लिए 26% इक्विटी हिस्सेदारी सुनिश्चित की, जो राज्य सरकारों के लिए असामान्य है, और इसी के आधार पर HRRL का गठन हुआ।
गहलोत ने भजनलाल से क्या माँग की है?
गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से आग्रह किया है कि वे परियोजना से जुड़े सार्वजनिक बयान देने से पहले राज्य सचिवालय में उपलब्ध आधिकारिक फाइलों और दस्तावेजों को देखें। उनका कहना है कि इससे ऐतिहासिक तथ्यों की गलत प्रस्तुति रोकी जा सकेगी।
पचपदरा रिफाइनरी राजस्थान के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
पचपदरा रिफाइनरी बालोतरा जिले में स्थित राजस्थान की सबसे बड़ी औद्योगिक परियोजनाओं में से एक है। इसकी अनुमानित लागत लगभग ₹80,000 करोड़ है और यह राज्य में रोज़गार सृजन व पेट्रोलियम उत्पादन क्षमता के लिहाज़ से रणनीतिक महत्व रखती है।
राष्ट्र प्रेस
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