18 जुलाई 2026
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गहलोत ने केंद्र सरकार पर किया तीखा हमला, पचपदरा रिफाइनरी में देरी से विकास और रोजगार पर असर

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गहलोत ने केंद्र सरकार पर किया तीखा हमला, पचपदरा रिफाइनरी में देरी से विकास और रोजगार पर असर

सारांश

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पचपदरा रिफाइनरी प्रोजेक्ट में देरी को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि इस देरी ने विकास और रोजगार के अवसरों को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया है।

मुख्य बातें

गहलोत ने पचपदरा रिफाइनरी में देरी को मुद्दा बनाया है।
केंद्र सरकार पर जानबूझकर देरी का आरोप लगाया गया है।
परियोजना की लागत में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है।
राजस्थान की अर्थव्यवस्था और रोजगार पर नकारात्मक प्रभाव।
सोनिया गांधी द्वारा परियोजना की आधारशिला रखी गई थी।

जयपुर, 10 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पचपदरा रिफाइनरी प्रोजेक्ट को लेकर मौजूदा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने इस परियोजना के संचालन के तरीके की आलोचना करते हुए कहा कि इसमें लगातार देरी की गई है, जिससे इसकी लागत कई गुना बढ़ गई है।

गहलोत ने बताया कि इस परियोजना की प्रारंभिक लागत लगभग 37,229 करोड़ रुपए थी, जो अब बढ़कर करीब 80,000 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है। यह बढ़ोतरी खराब योजना और राजनीतिक कारणों से हुई देरी का परिणाम है। उन्होंने इसे विकास कार्यों में देरी का एक उदाहरण बताते हुए “इंतजार शास्त्र” का मेगा चैप्टर कहा।

पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने जानबूझकर इस परियोजना में देरी की है, जिससे राज्य की जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय इस परियोजना का लगभग 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका था, लेकिन बाद में इसमें रुकावटें आईं।

गहलोत ने यह भी कहा कि इस देरी के कारण राजस्थान की अर्थव्यवस्था और युवाओं के रोजगार के अवसरों पर नकारात्मक असर पड़ा है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर भाजपा राजस्थान के विकास को लेकर इतनी उदासीन क्यों है?

उन्होंने परियोजना के आरंभ का जिक्र करते हुए बताया कि इसकी परिकल्पना 2008 में कांग्रेस सरकार के दौरान की गई थी। उस समय हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के साथ बातचीत शुरू हुई थी, हालांकि शुरुआत में कंपनी इस परियोजना के प्रति संदेह में थी। बाद में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी के हस्तक्षेप के बाद इस परियोजना को मंजूरी मिली थी। उन्होंने यह भी बताया कि सोनिया गांधी ने इसकी आधारशिला रखी थी, जिसका उद्देश्य राजस्थान को ऊर्जा क्षेत्र में मजबूत बनाना था।

गहलोत का कहना है कि सरकार बदलने के बाद इस परियोजना में राजनीतिक कारणों से बाधाएं आईं और काम की गति धीमी पड़ गई। उन्होंने आरोप लगाया कि इस वजह से यह महत्वपूर्ण परियोजना प्रभावित हुई है और राज्य के विकास पर इसका असर पड़ा है।

अशोक गहलोत ने कहा कि यह प्रोजेक्ट कई साल तक अटका रहा। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस को इसके लिए कई बार विरोध प्रदर्शन करने पड़े और दबाव बनने के बाद ही भाजपा ने 2018 में इस पर दोबारा काम शुरू किया।

गहलोत ने अपनी सरकार के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि जब कांग्रेस फिर से सत्ता में आई, तो इस प्रोजेक्ट को प्राथमिकता दी गई। उनके अनुसार, कोविड-19 महामारी की चुनौतियों के बावजूद काम लगातार आगे बढ़ता रहा और उनकी सरकार के दौरान लगभग 80 प्रतिशत काम पूरा कर लिया गया।

उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रोजेक्ट में हुई देरी का सीधा असर रोजगार और आर्थिक विकास पर पड़ा है। गहलोत के मुताबिक इस देरी की वजह से राजस्थान के युवाओं को कई महत्वपूर्ण अवसरों से वंचित होना पड़ा।

पूर्व मुख्यमंत्री ने पचपदरा रिफाइनरी को कांग्रेस सरकार की एक बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि जब यह परियोजना लगभग पूरी होने की स्थिति में है तो इसका आकार और प्रगति जनहित के प्रति उनकी सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। उनके अनुसार, यह एक ऐसा विकास मॉडल है जिसमें राजनीतिक हितों से ऊपर जनता के हित को प्राथमिकता दी गई।

पचपदरा रिफाइनरी से इस क्षेत्र की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, हालांकि इस परियोजना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और बहस अब भी जारी है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पचपदरा रिफाइनरी परियोजना का उद्देश्य क्या है?
इस परियोजना का उद्देश्य राजस्थान को ऊर्जा क्षेत्र में मजबूती प्रदान करना है।
गहलोत ने केंद्र सरकार पर क्या आरोप लगाए हैं?
गहलोत ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार ने जानबूझकर परियोजना में देरी की है, जिससे लागत में वृद्धि हुई है।
इस परियोजना में देरी का असर क्या है?
इस देरी ने राज्य की अर्थव्यवस्था और युवाओं के रोजगार अवसरों पर नकारात्मक असर डाला है।
इस परियोजना की लागत में कितनी वृद्धि हुई है?
इसकी प्रारंभिक लागत 37,229 करोड़ रुपए थी, जो अब 80,000 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है।
कब इस परियोजना की शुरुआत हुई थी?
इस परियोजना की परिकल्पना 2008 में कांग्रेस सरकार के दौरान की गई थी।
राष्ट्र प्रेस
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