3 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

HRRL रिफाइनरी उद्घाटन: PM मोदी करेंगे पचपदरा में 15 साल की देरी के बाद मेगा प्रोजेक्ट का लोकार्पण

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
HRRL रिफाइनरी उद्घाटन: PM मोदी करेंगे पचपदरा में 15 साल की देरी के बाद मेगा प्रोजेक्ट का लोकार्पण

सारांश

15 साल, दो शिलान्यास, एक अग्निकांड और अनगिनत राजनीतिक विवादों के बाद पचपदरा की HRRL रिफाइनरी आखिरकार PM मोदी के हाथों लोकार्पित होने को तैयार है। यह सिर्फ एक उद्घाटन नहीं — राजस्थान के ऊर्जा भविष्य की नींव है।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी शनिवार को राजस्थान के पचपदरा में HRRL — देश की पहली ग्रीनफील्ड BS-6 एकीकृत रिफाइनरी — का उद्घाटन करेंगे।
रिफाइनरी की क्षमता 9 MMTPA है और इसका नेल्सन कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स (NCI) भारत में सर्वोच्च स्तरों में से एक है।
20 अप्रैल 2026 को CDU-VDU यूनिट में आग लगने के कारण 21 अप्रैल को निर्धारित उद्घाटन अंतिम क्षणों में स्थगित करना पड़ा था।
परियोजना में HPCL की 74% और राजस्थान सरकार की 26% हिस्सेदारी है।
स्थान विवाद पर बायतू विधायक कर्नल सोनाराम चौधरी ने अपनी सरकार के विरुद्ध विद्रोह किया; तत्कालीन राजस्व मंत्री हेमाराम चौधरी ने इस्तीफा दिया।
कांग्रेस और BJP दोनों परियोजना का श्रेय लेने की होड़ में हैं — अशोक गहलोत ने BJP पर 5 साल काम रोकने का आरोप लगाया, जबकि BJP ने 2018-2023 के कांग्रेस कार्यकाल को धीमेपन के लिए जिम्मेदार ठहराया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को राजस्थान के बालोतरा जिले के पचपदरा में स्थित एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड (HRRL) का उद्घाटन करेंगे — देश की पहली ग्रीनफील्ड BS-6 मानक एकीकृत रिफाइनरी एवं पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स। करीब 15 वर्षों की यात्रा में यह परियोजना राजनीतिक विवाद, भूमि अधिग्रहण संघर्ष, बार-बार की देरी, बढ़ती लागत और एक गंभीर अग्निकांड जैसी बाधाओं से गुज़री। 20 अप्रैल 2026 को CDU-VDU यूनिट में रिसाव के बाद लगी आग के कारण 21 अप्रैल को निर्धारित उद्घाटन को अंतिम क्षणों में स्थगित करना पड़ा था।

परियोजना का तकनीकी परिचय

HRRL की रिफाइनिंग क्षमता 9 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MMTPA) है। इसका नेल्सन कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स (NCI) भारतीय रिफाइनरियों में सर्वोच्च स्तरों में से एक है, जिसके चलते यह दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले भारी और निम्न-गुणवत्ता वाले कच्चे तेल को पेट्रोल, डीजल, पॉलीप्रोपाइलीन और अन्य पेट्रोकेमिकल उत्पादों में परिवर्तित करने में सक्षम है।

रिएक्टर, कॉलम और स्टोरेज टैंक सहित अधिकांश भारी उपकरण 'आत्मनिर्भर भारत' पहल के अंतर्गत भारत में ही निर्मित हैं। हालाँकि अत्याधुनिक कंट्रोल सिस्टम और हाई-प्रेशर कंप्रेसर जैसे विशेष उपकरण अमेरिका, जापान और यूरोप से आयात किए गए हैं। नीदरलैंड के विशेषज्ञों ने वेल्डिंग और फिनिशिंग कार्यों की निगरानी की।

राजस्थान के कच्चे तेल में मोम (वैक्स) की उच्च मात्रा को देखते हुए इंजीनियरों ने गुजरात के मुंद्रा से पचपदरा तक एक विशेष हीटेड क्रूड ऑयल पाइपलाइन बिछाई है, जिसमें थर्मल इंसुलेशन और हीटिंग स्टेशन लगाए गए हैं।

स्थान विवाद और राजनीतिक उठापटक

मूल रूप से यह रिफाइनरी बायतू क्षेत्र के लिलाला गाँव में प्रस्तावित थी। घोषणा होते ही प्रभावशाली कारोबारियों और निवेशकों ने हज़ारों बीघा भूमि खरीद ली। जब भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू हुई, तो कई किसानों ने प्रति बीघा ₹1 करोड़ तक की माँग करते हुए जमीन देने से इनकार कर दिया।

बढ़ते विरोध के बाद तत्कालीन कांग्रेस मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सरकार ने रिफाइनरी को पचपदरा स्थानांतरित कर दिया, जहाँ पर्याप्त सरकारी भूमि उपलब्ध थी। इस निर्णय पर बायतू के तत्कालीन विधायक कर्नल सोनाराम चौधरी अपनी ही सरकार के विरुद्ध खड़े हो गए। उन्होंने आरोप लगाया कि रिफाइनरी को जोधपुर क्षेत्र को लाभ पहुँचाने के लिए काकानी में डाउनस्ट्रीम पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स के साथ स्थानांतरित किया जा रहा है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था, 'मैं अपनी जान दे दूंगा, लेकिन रिफाइनरी को यहाँ से जाने नहीं दूंगा।'

विवाद तब और गहरा गया जब तत्कालीन राजस्व मंत्री हेमाराम चौधरी ने इस्तीफा दे दिया, जिससे यह परियोजना राजस्थान की सर्वाधिक राजनीतिक रूप से विवादास्पद अवसंरचना परियोजनाओं में शुमार हो गई।

कांग्रेस और भाजपा के बीच श्रेय का संघर्ष

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने हाल ही में आरोप लगाया कि पिछली भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार के कार्यकाल में रिफाइनरी का कार्य पाँच वर्षों तक ठप पड़ा रहा, जिससे लागत में भारी वृद्धि हुई। उन्होंने कहा कि यह परियोजना बाड़मेर में तेल की खोज के बाद कांग्रेस सरकार के प्रयासों से शुरू हुई थी, और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह तथा कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के सहयोग से हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) और राजस्थान सरकार के बीच समझौता संभव हुआ।

गहलोत ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री किसी बड़ी जनसभा के बजाय रिफाइनरी परिसर के भीतर ही कार्यक्रम करेंगे, जबकि इतनी बड़ी उपलब्धि का सार्वजनिक और भव्य उद्घाटन होना चाहिए।

इसके जवाब में BJP के राज्यसभा सदस्य राजेंद्र गहलोत ने कहा कि अशोक गहलोत के कार्यकाल में न तो परियोजना स्थल ठीक से निर्धारित हुआ और न ही कोई ठोस वित्तीय ढाँचा तैयार किया गया। उन्होंने दावा किया कि 2016 में तत्कालीन BJP सरकार के दौरान ही प्रोजेक्ट साइट को अंतिम रूप दिया गया और व्यवस्थित वित्तीय योजना बनाई गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 2018 से 2023 के बीच कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में परियोजना पर बहुत कम काम हुआ।

HRRL की संरचना और आर्थिक महत्त्व

HRRL, HPCL और राजस्थान सरकार का संयुक्त उपक्रम है, जिसमें HPCL की 74% और राजस्थान सरकार की 26% हिस्सेदारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना के चालू होने से राजस्थान केवल कच्चे तेल के उत्पादक राज्य की भूमिका से आगे बढ़कर एक प्रमुख पेट्रोकेमिकल विनिर्माण केंद्र के रूप में उभरेगा।

आगे की राह

दो बार हुए शिलान्यास, बार-बार टली उद्घाटन तिथियाँ, अग्निकांड और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बाद अब HRRL के परिचालन की शुरुआत राजस्थान के ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक नए अध्याय का सूत्रपात करेगी। यह देखना होगा कि परियोजना अपने वादों — रोज़गार सृजन, पेट्रोकेमिकल उत्पादन और राज्य के राजस्व में वृद्धि — को किस हद तक पूरा कर पाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न परियोजना की परिपक्वता के अनुसार। अप्रैल 2026 का अग्निकांड महज़ एक तकनीकी दुर्घटना नहीं थी — यह उस दबाव का नतीजा भी हो सकता है जिसमें समय-सीमा से पहले परिचालन शुरू करने की जल्दबाज़ी की जाती है। असली परीक्षा अब उद्घाटन के बाद है: क्या HRRL राजस्थान को वास्तव में पेट्रोकेमिकल विनिर्माण केंद्र बना पाएगी, या यह भी उन मेगा-प्रोजेक्टों की सूची में जुड़ जाएगी जो उद्घाटन के बाद सुर्खियों से ओझल हो जाते हैं?
RashtraPress
3 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

HRRL रिफाइनरी क्या है और यह कहाँ स्थित है?
एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड (HRRL) राजस्थान के बालोतरा जिले के पचपदरा में स्थित देश का पहला ग्रीनफील्ड BS-6 मानक एकीकृत रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स है। इसकी रिफाइनिंग क्षमता 9 MMTPA है और यह HPCL (74%) तथा राजस्थान सरकार (26%) का संयुक्त उपक्रम है।
HRRL रिफाइनरी के उद्घाटन में इतनी देरी क्यों हुई?
परियोजना को करीब 15 वर्षों में कई बाधाओं का सामना करना पड़ा — स्थान को लेकर राजनीतिक विवाद, भूमि अधिग्रहण में किसानों का विरोध, लागत में भारी वृद्धि और बार-बार बदलती उद्घाटन तिथियाँ। सबसे हालिया देरी 20 अप्रैल 2026 को CDU-VDU यूनिट में आग लगने के कारण हुई, जिससे 21 अप्रैल का निर्धारित उद्घाटन स्थगित करना पड़ा।
HRRL रिफाइनरी राजस्थान के लिए क्यों महत्त्वपूर्ण है?
यह रिफाइनरी राजस्थान को केवल कच्चे तेल उत्पादक राज्य की भूमिका से आगे ले जाकर एक प्रमुख पेट्रोकेमिकल विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने की क्षमता रखती है। इसका उच्च नेल्सन कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स इसे भारी और निम्न-गुणवत्ता वाले कच्चे तेल को उच्च-मूल्य उत्पादों में बदलने में सक्षम बनाता है।
HRRL परियोजना पर कांग्रेस और BJP के बीच विवाद क्या है?
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का दावा है कि कांग्रेस सरकार ने इस परियोजना की नींव रखी और BJP ने अपने कार्यकाल में पाँच साल काम रोके रखा। BJP के राज्यसभा सदस्य राजेंद्र गहलोत ने पलटवार करते हुए कहा कि 2016 में BJP सरकार ने ही प्रोजेक्ट साइट को अंतिम रूप दिया और 2018-2023 के कांग्रेस कार्यकाल में बहुत कम काम हुआ।
HRRL रिफाइनरी में किन देशों की तकनीक का उपयोग हुआ है?
अधिकांश भारी उपकरण 'आत्मनिर्भर भारत' के तहत भारत में ही निर्मित हैं। हाई-प्रेशर कंप्रेसर और उन्नत कंट्रोल सिस्टम अमेरिका, जापान और यूरोप से आयात किए गए हैं, जबकि नीदरलैंड के विशेषज्ञों ने वेल्डिंग और फिनिशिंग कार्यों की निगरानी की।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 दिन पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 2 सप्ताह पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 2 महीने पहले
  8. 2 महीने पहले