14 जुलाई 2026
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सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना पर लगाया ₹3 लाख जुर्माना, कहा — 'अदालत को गुमराह किया'

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सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना पर लगाया ₹3 लाख जुर्माना, कहा — 'अदालत को गुमराह किया'

सारांश

सर्वोच्च न्यायालय ने कॉमेडियन समय रैना को कड़ा संदेश दिया — ₹3 लाख का जुर्माना और यह फटकार कि अदालत को गुमराह किया गया। 'इंडियाज गॉट लेटेंट' में दिव्यांगों के उपहास का यह मामला अब डिजिटल कंटेंट की जवाबदेही की एक बड़ी मिसाल बनता जा रहा है।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 14 जुलाई 2026 को समय रैना सहित 'इंडियाज गॉट लेटेंट' के कॉमेडियन्स व मेहमानों पर ₹3-3 लाख का जुर्माना लगाया।
अदालत ने कहा कि रैना ने न्यायालय के समक्ष गलत बयान दिए और उसे गुमराह करने की कोशिश की।
क्योर एसएमए फाउंडेशन ने बताया कि रैना ने अदालत के निर्देश के बावजूद संस्था से कोई संपर्क नहीं किया और न ही माफ़ी माँगी।
जुर्माना दो सप्ताह में जमा न होने पर और कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई।
मूल विवाद SMA से पीड़ित नवजात — जिसे ₹16 करोड़ के इंजेक्शन की ज़रूरत थी — के उपहास से जुड़ा है।

सर्वोच्च न्यायालय ने 14 जुलाई 2026 को कॉमेडियन समय रैना और विवादित शो 'इंडियाज गॉट लेटेंट' में शामिल अन्य कॉमेडियन व मेहमानों पर प्रत्येक को ₹3 लाख का जुर्माना लगाया। अदालत ने कड़े शब्दों में कहा कि रैना ने न्यायालय के समक्ष गलत बयान देकर उसे गुमराह करने की कोशिश की। यह मामला दिव्यांगों का उपहास उड़ाने से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया।

मामले की पृष्ठभूमि

यह विवाद तब शुरू हुआ जब शो 'इंडियाज गॉट लेटेंट' में होस्ट समय रैना, रणवीर इलाहाबादिया और अन्य इन्फ्लुएंसर्स ने दिव्यांगों का मज़ाक उड़ाया। इसके अलावा, क्योर एसएमए फाउंडेशन ने आरोप लगाया कि रैना ने अपने स्टैंडअप शो 'दैट कॉमेडी क्लब' में स्पाइनल मस्क्यूलर अट्रॉफी (SMA) से पीड़ित एक नेत्रहीन नवजात का उपहास किया था — जिसे जीवित रहने के लिए ₹16 करोड़ के इंजेक्शन की आवश्यकता थी।

उस शो में रैना ने कहा था, 'देखो, चैरिटी अच्छी बात है, करनी चाहिए। मैं एक चैरिटी देख रहा था, जिसमें एक दो महीने का बच्चा है, जिसे कुछ तो क्रेजी हो गया था। इलाज के लिए उसे ₹16 करोड़ का इंजेक्शन चाहिए था।' इसके बाद उन्होंने शो में बैठी एक महिला से पूछा था कि यदि वह उस बच्चे की माँ होतीं और बैंक में ₹16 करोड़ आ जाते, तो क्या वह वह राशि इंजेक्शन पर खर्च करतीं — यह कहते हुए कि बच्चा बचेगा भी या नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं।

अदालत में क्या हुआ

क्योर एसएमए फाउंडेशन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने सर्वोच्च न्यायालय को बताया कि रैना ने पहले यह आश्वासन दिया था कि उन्होंने दिव्यांगों के लिए कुछ कार्यक्रम आयोजित किए हैं। परंतु अदालत के निर्देश के बावजूद उन्होंने संस्था से कोई संपर्क नहीं किया। संस्था के वकीलों ने यह भी स्पष्ट किया कि रैना की ओर से इस पूरे प्रकरण में कोई सार्वजनिक या न्यायिक माफ़ी नहीं माँगी गई है।

अदालत की सख्त चेतावनी

सर्वोच्च न्यायालय ने ₹3-3 लाख का जुर्माना लगाने के साथ यह भी चेतावनी दी कि यदि यह राशि दो सप्ताह के भीतर जमा नहीं की गई, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध और कड़े कदम उठाए जाएंगे। अदालत ने रैना और अन्य कॉमेडियन्स से यह भी पूछा कि उन्होंने अपने आचरण में सुधार के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए हैं।

व्यापक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब डिजिटल कंटेंट निर्माताओं की जवाबदेही को लेकर न्यायपालिका और नियामक संस्थाएँ दोनों सक्रिय हो रही हैं। गौरतलब है कि रणवीर इलाहाबादिया के मामले में भी इसी शो को लेकर अलग कार्यवाही चल रही है। आलोचकों का कहना है कि 'फ्री स्पीच' की आड़ में दिव्यांगों की पीड़ा का व्यावसायिक दोहन संवैधानिक गरिमा के विरुद्ध है।

आगे क्या होगा

अदालत ने अगली सुनवाई में रैना और अन्य प्रतिवादियों से जुर्माना जमा करने का प्रमाण और सुधारात्मक कदमों का ब्यौरा माँगा है। क्योर एसएमए फाउंडेशन ने संकेत दिया है कि वह इस मामले में और सख्त राहत की माँग करेगा यदि अनुपालन नहीं हुआ।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना पर जुर्माना क्यों लगाया?
सर्वोच्च न्यायालय ने पाया कि समय रैना ने अदालत के समक्ष गलत बयान दिए और पहले दिए गए आश्वासन के बावजूद क्योर एसएमए फाउंडेशन से कोई संपर्क नहीं किया। इसी के चलते अदालत ने उन्हें और शो के अन्य प्रतिभागियों को ₹3-3 लाख का जुर्माना लगाया।
'इंडियाज गॉट लेटेंट' विवाद क्या है?
यह विवाद उस शो से जुड़ा है जिसमें होस्ट समय रैना, रणवीर इलाहाबादिया और अन्य इन्फ्लुएंसर्स ने दिव्यांगों का मज़ाक उड़ाया। इसके अलावा, रैना पर 'दैट कॉमेडी क्लब' में SMA से पीड़ित एक नवजात — जिसे ₹16 करोड़ के इंजेक्शन की ज़रूरत थी — का उपहास करने का भी आरोप है।
क्योर एसएमए फाउंडेशन इस मामले में कैसे शामिल है?
क्योर एसएमए फाउंडेशन ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की और वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह के माध्यम से अदालत को बताया कि रैना ने संस्था से संपर्क का वादा करने के बाद भी कोई संवाद नहीं किया और न ही माफ़ी माँगी।
जुर्माना न भरने पर क्या होगा?
सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि दो सप्ताह के भीतर ₹3 लाख की जुर्माना राशि जमा नहीं की गई, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध और कड़े कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
इस मामले का डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स पर क्या असर पड़ेगा?
यह फैसला डिजिटल इन्फ्लुएंसर्स और कॉमेडियन्स के लिए एक स्पष्ट संकेत है कि न्यायपालिका ऑनलाइन मंचों पर दिव्यांगों या कमज़ोर वर्गों के उपहास को गंभीरता से लेती है। आलोचकों का कहना है कि इससे डिजिटल कंटेंट की जवाबदेही तय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण नज़ीर स्थापित हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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