सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना पर लगाया ₹3 लाख जुर्माना, कहा — 'अदालत को गुमराह किया'
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 14 जुलाई 2026 को कॉमेडियन समय रैना और विवादित शो 'इंडियाज गॉट लेटेंट' में शामिल अन्य कॉमेडियन व मेहमानों पर प्रत्येक को ₹3 लाख का जुर्माना लगाया। अदालत ने कड़े शब्दों में कहा कि रैना ने न्यायालय के समक्ष गलत बयान देकर उसे गुमराह करने की कोशिश की। यह मामला दिव्यांगों का उपहास उड़ाने से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया।
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद तब शुरू हुआ जब शो 'इंडियाज गॉट लेटेंट' में होस्ट समय रैना, रणवीर इलाहाबादिया और अन्य इन्फ्लुएंसर्स ने दिव्यांगों का मज़ाक उड़ाया। इसके अलावा, क्योर एसएमए फाउंडेशन ने आरोप लगाया कि रैना ने अपने स्टैंडअप शो 'दैट कॉमेडी क्लब' में स्पाइनल मस्क्यूलर अट्रॉफी (SMA) से पीड़ित एक नेत्रहीन नवजात का उपहास किया था — जिसे जीवित रहने के लिए ₹16 करोड़ के इंजेक्शन की आवश्यकता थी।
उस शो में रैना ने कहा था, 'देखो, चैरिटी अच्छी बात है, करनी चाहिए। मैं एक चैरिटी देख रहा था, जिसमें एक दो महीने का बच्चा है, जिसे कुछ तो क्रेजी हो गया था। इलाज के लिए उसे ₹16 करोड़ का इंजेक्शन चाहिए था।' इसके बाद उन्होंने शो में बैठी एक महिला से पूछा था कि यदि वह उस बच्चे की माँ होतीं और बैंक में ₹16 करोड़ आ जाते, तो क्या वह वह राशि इंजेक्शन पर खर्च करतीं — यह कहते हुए कि बच्चा बचेगा भी या नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं।
अदालत में क्या हुआ
क्योर एसएमए फाउंडेशन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने सर्वोच्च न्यायालय को बताया कि रैना ने पहले यह आश्वासन दिया था कि उन्होंने दिव्यांगों के लिए कुछ कार्यक्रम आयोजित किए हैं। परंतु अदालत के निर्देश के बावजूद उन्होंने संस्था से कोई संपर्क नहीं किया। संस्था के वकीलों ने यह भी स्पष्ट किया कि रैना की ओर से इस पूरे प्रकरण में कोई सार्वजनिक या न्यायिक माफ़ी नहीं माँगी गई है।
अदालत की सख्त चेतावनी
सर्वोच्च न्यायालय ने ₹3-3 लाख का जुर्माना लगाने के साथ यह भी चेतावनी दी कि यदि यह राशि दो सप्ताह के भीतर जमा नहीं की गई, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध और कड़े कदम उठाए जाएंगे। अदालत ने रैना और अन्य कॉमेडियन्स से यह भी पूछा कि उन्होंने अपने आचरण में सुधार के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए हैं।
व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब डिजिटल कंटेंट निर्माताओं की जवाबदेही को लेकर न्यायपालिका और नियामक संस्थाएँ दोनों सक्रिय हो रही हैं। गौरतलब है कि रणवीर इलाहाबादिया के मामले में भी इसी शो को लेकर अलग कार्यवाही चल रही है। आलोचकों का कहना है कि 'फ्री स्पीच' की आड़ में दिव्यांगों की पीड़ा का व्यावसायिक दोहन संवैधानिक गरिमा के विरुद्ध है।
आगे क्या होगा
अदालत ने अगली सुनवाई में रैना और अन्य प्रतिवादियों से जुर्माना जमा करने का प्रमाण और सुधारात्मक कदमों का ब्यौरा माँगा है। क्योर एसएमए फाउंडेशन ने संकेत दिया है कि वह इस मामले में और सख्त राहत की माँग करेगा यदि अनुपालन नहीं हुआ।