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'एक राष्ट्र, एक चुनाव' से समय-संसाधन की बचत होगी: JPC से बोले UP विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना

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'एक राष्ट्र, एक चुनाव' से समय-संसाधन की बचत होगी: JPC से बोले UP विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना

सारांश

'एक राष्ट्र, एक चुनाव' पर JPC का लखनऊ दौरा महज औपचारिकता नहीं — UP विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने समर्थन में ठोस तर्क रखे: बार-बार चुनाव से संसाधन और प्रशासनिक ऊर्जा बर्बाद होती है। 39 सदस्यीय समिति अब तक 8 राज्यों में सुझाव जुटा चुकी है।

मुख्य बातें

UP विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने 14 जुलाई 2026 को लखनऊ में JPC के समक्ष 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' का समर्थन किया।
उन्होंने कहा कि एक साथ चुनाव से समय, संसाधन और प्रशासनिक ऊर्जा की बचत होगी।
JPC संविधान (129वाँ संशोधन) विधेयक, 2024 और संघ राज्य क्षेत्र कानून (संशोधन) विधेयक, 2024 की समीक्षा कर रही है।
समिति में लोकसभा और राज्यसभा के कुल 39 सदस्य हैं; भाजपा सांसद पीपी चौधरी इसके अध्यक्ष हैं।
समिति अब तक महाराष्ट्र, उत्तराखंड, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात और गोवा सहित कई राज्यों में परामर्श कर चुकी है।

उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने 14 जुलाई 2026 को लखनऊ में संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के समक्ष कहा कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने से समय, संसाधन और प्रशासनिक ऊर्जा की उल्लेखनीय बचत होगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस व्यवस्था से जनप्रतिनिधि चुनावी भागदौड़ की बजाय विकास कार्यों और जनसेवा पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।

मुख्य घटनाक्रम

संविधान (129वाँ संशोधन) विधेयक, 2024 और संघ राज्य क्षेत्र कानून (संशोधन) विधेयक, 2024 की समीक्षा कर रही JPC ने मंगलवार को लखनऊ के गोमतीनगर स्थित एक होटल में हितधारकों के साथ संवाद शुरू किया। इसी बैठक में समिति ने विधानसभा अध्यक्ष महाना से 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' प्रस्ताव पर उनके विचार और सुझाव प्राप्त किए। समिति भाजपा सांसद पीपी चौधरी के नेतृत्व में तीन दिवसीय अध्ययन दौरे पर उत्तर प्रदेश में है।

सतीश महाना के तर्क

महाना ने समिति को बताया कि देश में एक साथ चुनाव कराने की भावना लंबे समय से विद्यमान है। उनके अनुसार, बार-बार चुनाव होने से जनता, जनप्रतिनिधि और शासन-प्रशासन — तीनों प्रभावित होते हैं। उन्होंने कहा कि लगातार चुनावी चक्र के कारण जनप्रतिनिधियों का बड़ा समय चुनावी गतिविधियों में खप जाता है, जबकि जनता की प्राथमिकता अपने क्षेत्र के विकास और समस्याओं का निरंतर समाधान है।

महाना ने यह भी रेखांकित किया कि बार-बार होने वाले चुनावों में प्रशासनिक मशीनरी, सुरक्षा बल और सरकारी संसाधनों का बड़ा हिस्सा चुनावी प्रक्रिया में व्यस्त हो जाता है। एक साथ चुनाव होने पर इन संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग संभव होगा और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन की गति भी बाधित नहीं होगी।

लोकतांत्रिक भागीदारी पर जोर

विधानसभा अध्यक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव व्यवस्था में किसी भी सुधार के दौरान सभी राजनीतिक दलों, संवैधानिक संस्थाओं, विशेषज्ञों और आम नागरिकों के सुझावों को समुचित महत्व दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता की भागीदारी सर्वोपरि है और यह सुधार केवल राजनीतिक दलों के लिए नहीं, बल्कि आम जनता के लिए भी अधिक सुविधाजनक व्यवस्था सिद्ध होगी।

JPC का व्यापक परामर्श अभियान

लोकसभा और राज्यसभा के कुल 39 सदस्यों वाली यह समिति उत्तर प्रदेश में जनप्रतिनिधियों, राजनीतिक दलों, राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, मुख्य निर्वाचन अधिकारी, विधि विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, उद्योग एवं व्यापार संगठनों और मीडिया प्रतिनिधियों से सुझाव जुटा रही है। गौरतलब है कि समिति इससे पहले महाराष्ट्र, उत्तराखंड, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात और गोवा सहित कई राज्यों में भी हितधारकों से विचार-विमर्श कर चुकी है।

आगे क्या होगा

समिति सभी राज्यों से प्राप्त सुझावों को अपनी अंतिम रिपोर्ट में शामिल करेगी, जो संसद में पेश की जाएगी। यह रिपोर्ट 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' के संवैधानिक, प्रशासनिक और व्यावहारिक पहलुओं पर निर्णायक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि JPC का यह परामर्श अभियान कितना समावेशी है — विपक्षी दलों की भागीदारी और उनके आपत्तियों को रिपोर्ट में कितना स्थान मिलेगा, यह अभी अनुत्तरित है। 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' के संवैधानिक पहलू जटिल हैं: संघीय ढाँचे पर इसके प्रभाव और अविश्वास प्रस्ताव की स्थिति में चुनाव-चक्र के टूटने की समस्या पर समिति की रिपोर्ट में स्पष्टता ज़रूरी होगी। संसाधन बचत का तर्क आकर्षक है, लेकिन क्रियान्वयन की व्यावहारिक चुनौतियाँ — खासकर राज्य सरकारों के कार्यकाल के साथ तालमेल — इसे उतना सरल नहीं बनातीं जितना समर्थक दर्शाते हैं।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'एक राष्ट्र, एक चुनाव' प्रस्ताव क्या है?
यह प्रस्ताव लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने की व्यवस्था से संबंधित है। इसके लिए संविधान (129वाँ संशोधन) विधेयक, 2024 और संघ राज्य क्षेत्र कानून (संशोधन) विधेयक, 2024 लाए गए हैं, जिनकी समीक्षा 39 सदस्यीय JPC कर रही है।
JPC लखनऊ में क्यों आई है?
JPC 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' से जुड़े संवैधानिक, प्रशासनिक और व्यावहारिक पहलुओं पर हितधारकों से सुझाव जुटाने के लिए तीन दिवसीय अध्ययन दौरे पर लखनऊ में है। समिति जनप्रतिनिधियों, विधि विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और उद्योग संगठनों से विचार-विमर्श कर रही है।
सतीश महाना ने JPC को क्या सुझाव दिए?
UP विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने JPC को बताया कि एक साथ चुनाव होने से समय, संसाधन और प्रशासनिक ऊर्जा की बचत होगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस व्यवस्था से जनप्रतिनिधि विकास कार्यों और जनसेवा पर अधिक ध्यान दे सकेंगे, और किसी भी सुधार में सभी राजनीतिक दलों व नागरिकों के सुझावों को महत्व मिलना चाहिए।
JPC अब तक कितने राज्यों में परामर्श कर चुकी है?
JPC उत्तर प्रदेश से पहले महाराष्ट्र, उत्तराखंड, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात और गोवा सहित कई राज्यों में हितधारकों से विचार-विमर्श कर चुकी है। लोकसभा और राज्यसभा के 39 सदस्यों वाली यह समिति प्राप्त सुझावों को अपनी अंतिम रिपोर्ट में शामिल करेगी।
'एक राष्ट्र, एक चुनाव' से आम जनता को क्या फायदा होगा?
समर्थकों के अनुसार, बार-बार चुनाव होने से जनता, जनप्रतिनिधि और प्रशासन तीनों प्रभावित होते हैं। एक साथ चुनाव से प्रशासनिक मशीनरी और सुरक्षा बलों का अधिक प्रभावी उपयोग होगा, विकास योजनाओं की गति बनी रहेगी और जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र की समस्याओं पर निरंतर ध्यान दे सकेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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