संजय राउत को मानहानि मामले में मिली राहत, मेधा सोमैया के आरोपों से बरी
सारांश
Key Takeaways
- संजय राउत को मानहानि मामले में राहत मिली।
- अदालत ने मजिस्ट्रेट कोर्ट का फैसला पलटा।
- मेधा सोमैया ने आरोप लगाया था कि राउत ने झूठे बयान दिए।
- राउत ने कहा कि न्यायालय ने उनकी निर्दोषता साबित की।
- राजनीतिक हलचल जारी है।
मुंबई, 26 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। मुंबई की एक सत्र अदालत ने शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख और राज्यसभा सांसद संजय राउत को मानहानि के मामले में बड़ी राहत प्रदान करते हुए बरी कर दिया है। यह मामला मेधा सोमैया द्वारा दायर किया गया था, जो भाजपा नेता किरिट सोमैया की पत्नी हैं।
संजय राउत ने कहा, "मुझे बड़ी राहत मिली है। पहले की निचली अदालत ने मुझे 15 दिन की सजा सुनाई थी। मीरा-भायंदर नगर निगम में एक घोटाले का मुद्दा उठाया गया था, और मैंने उस पर कोई टिप्पणी नहीं की, इस पर विधानसभा में चर्चा हुई थी। विधायक प्रताप सरनाईक ने भी इस पर शिकायत दर्ज की थी। मेरी ओर से दिए गए बयान पर मानहानि का कोई सवाल ही नहीं था। लेकिन निचली अदालत ने मुझे 15 दिन की सजा सुनाई थी। हमारे वकीलों ने अदालत में अपना पक्ष रखा। आज मैं बहुत खुश हूं और मेरी पार्टी भी खुश है कि अदालत ने हमें निर्दोष बताया है।"
मेधा सोमैया ने आरोप लगाया था कि संजय राउत ने मीडिया में उनके और उनके पति के खिलाफ झूठे और अपमानजनक बयान दिए थे। संजय राउत ने उन पर मीरा-भायंदर नगर निगम में सार्वजनिक शौचालयों के निर्माण के नाम पर 100 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का आरोप लगाया था। सोमैया का कहना था कि ये आरोप पूरी तरह से निराधार हैं और उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से लगाए गए।
इस मामले में पहले मजिस्ट्रेट कोर्ट ने संजय राउत को मानहानि का दोषी ठहराया था। अदालत ने उन्हें 15 दिन की सजा और 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया था। हालांकि, ऊपरी अदालत में अपील करने के लिए सजा पर अस्थायी रोक लगा दी गई थी। इसके बाद राउत ने सत्र न्यायालय में इस फैसले को चुनौती दी थी।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिस पर अदालत ने गुरुवार को अपना निर्णय सुनाते हुए मजिस्ट्रेट कोर्ट के फैसले को पलट दिया और संजय राउत को आरोपों से बरी कर दिया।