भारत की इथेनॉल ब्लेंडिंग रणनीति की वैश्विक चर्चा, 20% मिश्रण लक्ष्य तय समय से पहले हासिल

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भारत की इथेनॉल ब्लेंडिंग रणनीति की वैश्विक चर्चा, 20% मिश्रण लक्ष्य तय समय से पहले हासिल

सारांश

वैश्विक तेल संकट के बीच भारत की इथेनॉल ब्लेंडिंग नीति दुनिया भर में मिसाल बन रही है। 2003 में 5% लक्ष्य से शुरू होकर आज 20% मिश्रण हासिल करने वाला भारत अब E85 और E100 की ओर बढ़ रहा है — यह सिर्फ पर्यावरण नीति नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा और ग्रामीण विकास की राष्ट्रीय रणनीति है।

मुख्य बातें

भारत ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य निर्धारित समय से पहले हासिल किया।
2003 में 5% से शुरू हुई यात्रा में 2014 तक औसत ब्लेंडिंग केवल 1.53% थी।
2018 की राष्ट्रीय बायोफ्यूल नीति ने इथेनॉल उत्पादन का दायरा गन्ने से बढ़ाकर मक्का, चावल और कृषि अवशेषों तक किया।
भारत अब E85 और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए E100 ईंधन की तैयारी कर रहा है।
कार्यक्रम से कच्चे तेल आयात में कमी, विदेशी मुद्रा की बचत और ग्रामीण क्षेत्रों में नए रोज़गार के अवसर पैदा हो रहे हैं।

मध्य पूर्व संकट के कारण वैश्विक तेल सप्लाई में आई रुकावट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच भारत की इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल नीति दुनिया भर में चर्चा का केंद्र बन गई है। 'द टाइम्स कुवैत' की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत आज दुनिया की सबसे सफल बायोफ्यूल कहानियों में शामिल हो गया है और होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से उत्पन्न तेल आपूर्ति संकट के प्रभाव को कम करने में सफल रहा है।

दो दशकों की यात्रा: 5% से 20% तक

रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने 2003 में मात्र 5 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग लक्ष्य के साथ यह सफर शुरू किया था। 2014 तक देश में औसत इथेनॉल ब्लेंडिंग स्तर केवल 1.53 प्रतिशत था। लेकिन निरंतर सरकारी समर्थन, डिस्टिलरी क्षमता में निवेश और दीर्घकालिक योजना ने इस कार्यक्रम को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। आज भारत पेट्रोल में लगभग 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण हासिल कर चुका है — और वह भी निर्धारित समय-सीमा से पहले।

2018 की राष्ट्रीय बायोफ्यूल नीति: निर्णायक मोड़

रिपोर्ट में बताया गया है कि इस अभियान का सबसे बड़ा बदलाव 2018 में आया, जब राष्ट्रीय बायोफ्यूल नीति लागू की गई। इस नीति ने इथेनॉल उत्पादन के कच्चे माल का दायरा केवल गन्ने के शीरे से बढ़ाकर खराब खाद्यान्न, अतिरिक्त चावल, मक्का और कृषि अवशेषों तक कर दिया। इससे पानी की अधिक खपत करने वाले गन्ने पर निर्भरता घटी और उत्तर एवं मध्य भारत के अनाज उत्पादक क्षेत्रों को भी इथेनॉल अर्थव्यवस्था से जोड़ा गया।

आगे की राह: E85 और E100 की तैयारी

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत अब अगले चरण की तैयारी में है। देश E85 पेट्रोल यानी 85 प्रतिशत इथेनॉल वाले ईंधन और मल्टीपल इथेनॉल मिश्रण पर चलने वाले फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए E100 ईंधन की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। यह कदम भारत को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर और तेज़ी से ले जाएगा।

ऊर्जा सुरक्षा और विदेशी मुद्रा की बचत

रिपोर्ट के अनुसार, यह कार्यक्रम भारत को कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाकर विदेशी मुद्रा में अरबों डॉलर की बचत करने में मदद कर रहा है। यह ऐसे समय में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जब पश्चिम एशिया में अस्थिरता के कारण वैश्विक सप्लाई चेन में अनिश्चितता बनी हुई है। जो पहल शुरुआत में केवल कार्बन उत्सर्जन कम करने के पर्यावरणीय उद्देश्य से शुरू हुई थी, वह आज ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक मजबूती और ग्रामीण विकास की व्यापक राष्ट्रीय रणनीति बन चुकी है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि इथेनॉल अभियान से भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बड़ा लाभ मिल रहा है। बायोफ्यूल के लिए कच्चे माल की बढ़ती माँग से गन्ना किसानों, अनाज उत्पादकों, डिस्टिलरी उद्योग और बायोफ्यूल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपर्स को सीधा फायदा हो रहा है। इसके साथ ही कृषि, परिवहन, लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में नए रोज़गार के अवसर भी उत्पन्न हो रहे हैं। वैश्विक ऊर्जा अनिश्चितता के इस दौर में भारत का यह मॉडल अन्य विकासशील देशों के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण बनता जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके साथ कुछ अनुत्तरित सवाल भी हैं। गन्ने से मक्के और चावल की ओर विविधीकरण सराहनीय है, फिर भी खाद्य सुरक्षा बनाम ईंधन उत्पादन की पुरानी बहस पूरी तरह सुलझी नहीं है — खासकर तब जब अनाज उत्पादन में उतार-चढ़ाव आता है। दूसरा, 20% ब्लेंडिंग की उपलब्धि मुख्यतः कुछ राज्यों तक केंद्रित है; राष्ट्रीय औसत और ज़मीनी वास्तविकता के बीच का अंतर स्पष्ट नहीं किया जाता। E85 और E100 की ओर छलांग लगाने से पहले वाहन उद्योग और पेट्रोल स्टेशन नेटवर्क की तैयारी का मूल्यांकन ज़रूरी है — वरना यह भी एक महत्वाकांक्षी घोषणा बनकर रह सकती है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत की इथेनॉल ब्लेंडिंग नीति क्या है?
भारत की इथेनॉल ब्लेंडिंग नीति के तहत पेट्रोल में एक निश्चित अनुपात में इथेनॉल मिलाया जाता है ताकि कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटे और कार्बन उत्सर्जन कम हो। 2003 में 5% लक्ष्य से शुरू होकर भारत आज लगभग 20% मिश्रण हासिल कर चुका है।
भारत ने 20% इथेनॉल ब्लेंडिंग लक्ष्य कब हासिल किया?
रिपोर्टों के अनुसार भारत ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य निर्धारित समय-सीमा से पहले ही हासिल कर लिया। यह उपलब्धि 2014 में मात्र 1.53% औसत ब्लेंडिंग से शुरू हुई लंबी यात्रा का परिणाम है।
2018 की राष्ट्रीय बायोफ्यूल नीति से क्या बदला?
2018 में लागू राष्ट्रीय बायोफ्यूल नीति ने इथेनॉल उत्पादन के कच्चे माल का दायरा गन्ने के शीरे से बढ़ाकर खराब खाद्यान्न, अतिरिक्त चावल, मक्का और कृषि अवशेषों तक कर दिया। इससे उत्तर और मध्य भारत के अनाज उत्पादक क्षेत्र भी इथेनॉल अर्थव्यवस्था से जुड़ गए।
E85 और E100 ईंधन क्या होते हैं?
E85 वह ईंधन है जिसमें 85 प्रतिशत इथेनॉल होता है, जबकि E100 शुद्ध इथेनॉल आधारित ईंधन है जो मुख्यतः फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए उपयुक्त है। भारत इन उच्च-मिश्रण ईंधनों की दिशा में अगले चरण की तैयारी कर रहा है।
इथेनॉल कार्यक्रम से भारत को क्या आर्थिक लाभ हो रहा है?
इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम से भारत कच्चे तेल के आयात में कमी लाकर विदेशी मुद्रा में अरबों डॉलर की बचत कर रहा है। इसके अलावा गन्ना किसानों, अनाज उत्पादकों, डिस्टिलरी उद्योग और बायोफ्यूल इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में नए रोज़गार के अवसर भी पैदा हो रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस