11 अगस्त 2026
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लोकसभा में 'केरल (नाम परिवर्तन) बिल 2026' पास, अब केरल कहलाएगा 'केरलम'

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लोकसभा में 'केरल (नाम परिवर्तन) बिल 2026' पास, अब केरल कहलाएगा 'केरलम'

सारांश

दशकों की माँग और केरल विधानसभा के सर्वसम्मत प्रस्ताव के बाद लोकसभा ने 11 अगस्त 2026 को 'केरल (नाम परिवर्तन) बिल 2026' पारित कर दिया। विपक्ष की नारेबाजी के बीच बिना चर्चा के पास यह बिल अब 'केरल' को संविधान में 'केरलम' बनाने की दिशा में निर्णायक कदम है।

मुख्य बातें

लोकसभा ने 11 अगस्त 2026 को 'केरल (नाम परिवर्तन) बिल, 2026' ध्वनि मत से पारित किया।
बिल के ज़रिये संविधान की पहली अनुसूची में 'केरल' की जगह 'केरलम' दर्ज किया जाएगा।
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बिल सदन में पेश किया; विपक्ष नीट मुद्दे पर नारेबाजी करता रहा।
केरल विधानसभा ने 24 जून 2024 को सर्वसम्मति से नाम परिवर्तन का प्रस्ताव पारित किया था।
फरवरी 2026 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।
अब बिल राज्यसभा और राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद ही कानून बनेगा।

लोकसभा में 11 अगस्त 2026 को विपक्षी सांसदों की जोरदार नारेबाजी के बीच 'केरल (नाम परिवर्तन) बिल, 2026' को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। इस विधेयक के ज़रिये संविधान की पहली अनुसूची में संशोधन कर केरल राज्य का नाम बदलकर 'केरलम' किया जाएगा — जो मलयालम भाषा में राज्य का परंपरागत नाम है।

सदन में क्या हुआ

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने सदन में यह बिल पेश किया। इसी दौरान विपक्षी सांसद 20 जुलाई को नीट प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति और बयान की माँग को लेकर नारेबाजी करते रहे। सदन की अध्यक्षता कर रहे कृष्णा प्रसाद टेनेटी ने विपक्षी सदस्यों से सदन को सुचारू रूप से चलने देने का आग्रह किया, लेकिन हंगामा नहीं थमा।

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर बिल पर चर्चा से बचने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'यह दुखद है कि केसी वेणुगोपाल जैसे वरिष्ठ कांग्रेस नेता भी इस बिल पर नहीं बोलेंगे।' अंततः बिना किसी विधिवत चर्चा के ध्वनि मत से विधेयक पारित कर दिया गया।

मंत्रिमंडल और विधानसभा की पृष्ठभूमि

यह बिल एक लंबी विधायी प्रक्रिया की परिणति है। फरवरी 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 'केरल' का नाम बदलकर 'केरलम' करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इससे भी पहले 24 जून 2024 को केरल विधानसभा ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत यह नाम परिवर्तन करने की अपील की थी।

उस प्रस्ताव में स्पष्ट किया गया था कि 1 नवंबर 1956 को भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन के समय से मलयालम भाषी लोगों के लिए 'संयुक्त केरल' की माँग रही है, और मलयालम में राज्य का नाम सदा से 'केरलम' ही रहा है। 1 नवंबर को 'केरल पिरवी दिवस' के रूप में मनाया जाता है।

संवैधानिक प्रक्रिया

नाम परिवर्तन के लिए संविधान की पहली अनुसूची में संशोधन आवश्यक है, जो अनुच्छेद 3 के अंतर्गत संसद के अधिकार क्षेत्र में आता है। केरल सरकार ने भी केंद्र को आधिकारिक अनुरोध भेजा था कि इस संशोधन के लिए तत्काल कदम उठाए जाएँ। लोकसभा में पारित होने के बाद अब यह बिल राज्यसभा में जाएगा, और वहाँ से पारित होने पर राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा।

विपक्ष की प्रतिक्रिया

विपक्षी दलों ने बिल का सीधा विरोध नहीं किया, लेकिन नीट मुद्दे पर गृह मंत्री की जवाबदेही की माँग को लेकर सदन में व्यवधान उत्पन्न किया। इस कारण बिल पर कोई विधिवत बहस नहीं हो सकी। आलोचकों का कहना है कि इतने महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधन को बिना चर्चा के पारित करना संसदीय परंपराओं के अनुकूल नहीं है।

आगे क्या होगा

लोकसभा से पारित होने के बाद बिल को राज्यसभा की मंजूरी और तत्पश्चात राष्ट्रपति के हस्ताक्षर की आवश्यकता होगी। इसके बाद संविधान की पहली अनुसूची में 'केरल' की जगह 'केरलम' दर्ज होगा — और यह नाम परिवर्तन आधिकारिक रूप से प्रभावी हो जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह प्रक्रियागत सवाल उठाता है। संविधान की पहली अनुसूची में बदलाव एक गंभीर विधायी कदम है, और इस पर विस्तृत चर्चा का अवसर न मिलना — चाहे उसके कारण जो भी हों — संसदीय लोकतंत्र की गरिमा के अनुरूप नहीं कहा जा सकता।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल (नाम परिवर्तन) बिल 2026 क्या है?
यह वह विधेयक है जो संविधान की पहली अनुसूची में 'केरल' की जगह 'केरलम' दर्ज करने का प्रावधान करता है। लोकसभा ने इसे 11 अगस्त 2026 को ध्वनि मत से पारित किया। मलयालम भाषा में राज्य का नाम सदा से 'केरलम' रहा है।
केरल का नाम 'केरलम' करने की माँग कब से थी?
केरल विधानसभा ने 24 जून 2024 को सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत नाम बदलने की अपील की थी। इसके बाद फरवरी 2026 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दी।
यह बिल कानून कब बनेगा?
लोकसभा से पारित होने के बाद बिल को राज्यसभा की मंजूरी और फिर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर की आवश्यकता होगी। इन दोनों चरणों के बाद ही 'केरलम' नाम संवैधानिक रूप से प्रभावी होगा।
विपक्ष ने बिल का विरोध क्यों किया?
विपक्षी सांसदों ने बिल का सीधा विरोध नहीं किया, बल्कि वे 20 जुलाई को नीट प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति और बयान की माँग पर नारेबाजी कर रहे थे। इस हंगामे के कारण बिल पर कोई विधिवत बहस नहीं हो सकी।
संविधान के किस प्रावधान के तहत यह नाम परिवर्तन होगा?
संविधान का अनुच्छेद 3 संसद को किसी राज्य का नाम बदलने का अधिकार देता है। इसके लिए संविधान की पहली अनुसूची में संशोधन किया जाता है, जिसमें सभी राज्यों के नाम सूचीबद्ध हैं।
राष्ट्र प्रेस
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