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मलयाली साहित्यकारों ने पीएम मोदी से मिलकर केरल का नाम 'केरलम' रखने पर आभार व्यक्त किया

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मलयाली साहित्यकारों ने पीएम मोदी से मिलकर केरल का नाम 'केरलम' रखने पर आभार व्यक्त किया

सारांश

प्रमुख मलयाली साहित्यकारों ने पीएम मोदी से भेंट कर केरल का नाम बदलने पर आभार जताया। यह वार्ता साहित्यकारों की गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। जानिए इस महत्वपूर्ण मुलाकात के बारे में और क्या कहा पीएम मोदी ने।

मुख्य बातें

प्रधानमंत्री मोदी ने साहित्यकारों के प्रति अपनी खुशी व्यक्त की।
केरल का नाम बदलकर केरलम करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
यह नाम परिवर्तन मलयालम और केरल की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करेगा।
साहित्यकारों का समर्पण और संस्कृति के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उजागर हुई।
राज्य विधानसभा से स्वीकृति के बाद इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।

नई दिल्ली, 27 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। प्रसिद्ध मलयाली साहित्यकारों के एक समूह ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से भेंट की और केरल का नाम बदलकर केरलम किए जाने के लिए आभार व्यक्त किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें प्रख्यात मलयाली साहित्यकारों से मिलकर अत्यधिक खुशी हुई है। उन्होंने कहा कि यह वार्ता बहुत ज्ञानवर्धक रही। उन्होंने यह भी कहा कि इस भेंट से केरलम और मलयालम के प्रति साहित्यकारों की गहरी प्रतिबद्धता स्पष्ट होती है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में प्रधानमंत्री ने लिखा, "केरल का नाम बदलकर केरलम किए जाने पर आभार व्यक्त करने आए प्रसिद्ध मलयाली साहित्यकारों के समूह से मिलकर मुझे बेहद खुशी हुई। यह संवाद ज्ञानवर्धक रहा और उनके केरलम और मलयालम के प्रति अटूट समर्पण को प्रकट करता है।"

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 'केरल' राज्य का नाम बदलकर 'केरलम' करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल की स्वीकृति के बाद, राष्ट्रपति द्वारा केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 को केरल राज्य विधानसभा में विचार के लिए भेजा जाएगा। विधानसभा की राय प्राप्त होने के बाद, भारत सरकार आगे की प्रक्रिया को पूरा करेगी और संसद में केरल राज्य का नाम बदलने के लिए राष्ट्रपति की सिफारिश प्राप्त की जाएगी।

केरल विधानसभा ने 24 जून 2024 को एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें राज्य का नाम बदलकर 'केरलम' करने का निर्णय लिया गया। इसमें कहा गया, "मलयालम भाषा में हमारे राज्य का नाम 'केरलम' है। 1 नवंबर, 1956 को भाषा के आधार पर राज्यों का गठन हुआ था। केरल पिरवी दिवस भी इसी दिन मनाया जाता है।"

इसके बाद, केरल सरकार ने भारत सरकार से संविधान के अनुच्छेद 3 के अनुसार 'केरल' राज्य का नाम बदलकर 'केरलम' करने हेतु आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध किया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

दोनों ही केरल के सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत करते हैं। इस समय में, जब भाषा और संस्कृति की अहमियत बढ़ रही है, इस तरह के कदम महत्वपूर्ण हैं।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल का नाम बदलकर केरलम कब रखा जाएगा?
केरल का नाम बदलने का प्रस्ताव केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत किया गया है, और यह विधेयक केरल राज्य विधानसभा को भेजा जाएगा।
यह मुलाकात कब हुई थी?
यह मुलाकात 27 फरवरी को हुई थी, जिसमें प्रमुख मलयाली साहित्यकारों ने पीएम मोदी से भेंट की।
प्रधानमंत्री ने इस भेंट पर क्या कहा?
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वह साहित्यकारों से मिलकर प्रसन्न हैं और यह संवाद ज्ञानवर्धक रहा।
केरल का नाम बदलने का औचित्य क्या है?
यह नाम परिवर्तन मलयालम भाषा और संस्कृति की पहचान को मजबूत करने के लिए किया जा रहा है।
क्या इस निर्णय का कोई राजनीतिक प्रभाव होगा?
यह निर्णय सांस्कृतिक और राजनीतिक दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, जिससे राज्य की पहचान और भी मजबूत होगी।
राष्ट्र प्रेस
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