केरल का नाम 'केरलम' रखने का प्रस्ताव: सीपीआई ने केंद्रीय कैबिनेट को दी बधाई

Click to start listening
केरल का नाम 'केरलम' रखने का प्रस्ताव: सीपीआई ने केंद्रीय कैबिनेट को दी बधाई

सारांश

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने केरल का नाम बदलकर 'केरलम' करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस निर्णय पर सीपीआई ने केरल के नागरिकों को बधाई दी है। यह कदम राज्य की सांस्कृतिक पहचान को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण है।

Key Takeaways

  • केरल का नाम बदलकर 'केरलम' किया गया है।
  • सीपीआई ने इस प्रस्ताव का स्वागत किया है।
  • यह निर्णय राज्य की सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ करता है।
  • सभी राजनीतिक दलों के बीच सहमति दर्शाता है।
  • यह भारत के बहुभाषी और संघीय ढांचे की पुष्टि करता है।

नई दिल्ली, 24 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राज्य का नाम बदलकर 'केरलम' करने का प्रस्ताव मंजूर किया है, जिसके लिए कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई) ने केरलवासियों को दिल से बधाई दी है।

यह निर्णय 24 फरवरी 2026 को लिया गया और यह केरल की ऐतिहासिक, भाषाई और सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ करने वाला एक महत्वपूर्ण कदम है। 'केरलम' नाम मलयालम में राज्य के मूल स्वरूप का प्रतीक है, जो राज्य की सभ्यता की निरंतरता और सामूहिक आत्म-सम्मान को दर्शाता है।

सीपीआई ने कहा कि यह परिवर्तन केरल के लोगों की लंबे समय से चली आ रही लोकतांत्रिक मांग का परिणाम है। यह उस अंग्रेजीकरण को सुधारने का प्रयास है जो उपनिवेशी काल में हुआ था, और यह भारत की बहुभाषी एवं संघीय संरचना की पुष्टि करता है।

पार्टी ने याद दिलाया कि केरल विधानसभा ने जून 2024 में मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के प्रस्ताव पर सर्वसम्मति से केंद्र सरकार से नाम बदलने की मांग की थी। यह प्रस्ताव राज्य में सभी वर्गों और राजनीतिक दलों के बीच व्यापक सहमति का प्रतीक है, जो लोगों की लोकप्रिय इच्छा को दर्शाता है।

सीपीआई ने लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) सरकार की लगातार और सिद्धांतवादी कोशिशों की सराहना की है। एलडीएफ ने इस मांग को राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर उठाया, विधानसभा में औपचारिक प्रस्ताव पेश किया और केंद्र के साथ संवाद किया।

यह कदम केरल की भाषाई-सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। पार्टी ने विशेष रूप से सीपीआई के राज्यसभा नेता पी. संतोष कुमार की प्रशंसा की, जिन्होंने 22 जुलाई 2024 को राज्यसभा में इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाकर केरल की आवाज को राष्ट्रीय मंच पर पहुंचाया। यह फैसला यह सिद्ध करता है कि निरंतर लोकतांत्रिक संघर्ष, कानूनी प्रक्रिया और जन-आंदोलन से सकारात्मक बदलाव संभव हैं।

सीपीआई ने कहा कि भाषाई विविधता का सम्मान देश की एकता को कमजोर नहीं, बल्कि मजबूत बनाता है। पार्टी भारत के बहुलवाद, संघवाद और राज्यों के अपने सांस्कृतिक-भाषाई पहचान को सम्मानपूर्वक व्यक्त करने के अधिकार की रक्षा के अपने वादे को दोहराती है।

Point of View

बल्कि यह केरल के लोगों की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने का एक प्रयास है। यह बदलाव उन्हें अपने इतिहास और भाषा के प्रति गर्व महसूस कराता है।
NationPress
24/02/2026

Frequently Asked Questions

केरल का नाम क्यों बदला गया?
केरल का नाम बदलकर 'केरलम' करने का निर्णय राज्य की सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ करने के लिए लिया गया है।
सीपीआई ने इस निर्णय पर क्या प्रतिक्रिया दी?
सीपीआई ने इस निर्णय पर केरलवासियों को बधाई दी और इसे उनकी लंबे समय से चली आ रही लोकतांत्रिक मांग का परिणाम बताया।
यह प्रस्ताव कब मंजूर किया गया?
यह प्रस्ताव 24 फरवरी 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मंजूर किया गया।
क्या यह निर्णय सभी राजनीतिक पार्टियों के बीच सहमति से लिया गया?
हाँ, यह निर्णय सभी वर्गों और राजनीतिक दलों के बीच व्यापक सहमति का प्रतीक है।
इस परिवर्तन का महत्व क्या है?
यह परिवर्तन केरल की भाषाई-सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण है और भारत के संघीय ढांचे की पुष्टि करता है।
Nation Press