12 अगस्त 2026
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राज्यसभा ने 'केरलम' नाम परिवर्तन विधेयक 2026 पारित किया, संसद की मंजूरी पूरी

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राज्यसभा ने 'केरलम' नाम परिवर्तन विधेयक 2026 पारित किया, संसद की मंजूरी पूरी

सारांश

संसद के दोनों सदनों ने केरल नाम परिवर्तन विधेयक 2026 पारित कर दिया — मलयालम में राज्य का नाम 'केरलम' है, और अब यही नाम संविधान की पहली और चौथी अनुसूची में दर्ज होगा। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह बदलाव आधिकारिक हो जाएगा।

मुख्य बातें

राज्यसभा ने 12 अगस्त 2026 को केरल नाम परिवर्तन विधेयक, 2026 पारित किया; लोकसभा पहले ही इसे मंजूरी दे चुकी थी।
विधेयक के तहत संविधान की पहली और चौथी अनुसूची में संशोधन कर राज्य का नाम 'केरल' से 'केरलम' किया जाएगा।
15वीं केरल विधानसभा ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर अनुच्छेद 3 के तहत नाम बदलने का केंद्र से अनुरोध किया था।
केरल सरकार का तर्क: मलयालम भाषा में राज्य का नाम 'केरलम' है, इसलिए संवैधानिक नाम को भाषाई वास्तविकता के अनुरूप बनाया जाए।
अब विधेयक राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा; मंजूरी के बाद नियत तारीख से 'केरलम' आधिकारिक नाम होगा।
पश्चिम बंगाल के नाम परिवर्तन पर केंद्र ने कहा — औपचारिक प्रस्ताव आने पर विचार किया जा सकता है।

राज्यसभा ने 12 अगस्त 2026 को केरल नाम परिवर्तन विधेयक, 2026 पास कर दिया, जिससे राज्य का आधिकारिक नाम 'केरल' से बदलकर 'केरलम' हो जाएगा। इससे पहले लोकसभा भी यह विधेयक पारित कर चुकी थी, अतः अब संसद के दोनों सदनों की स्वीकृति पूरी हो गई है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में चर्चा का जवाब देते हुए विधेयक की पृष्ठभूमि और संवैधानिक आधार स्पष्ट किया।

विधेयक की पृष्ठभूमि और संवैधानिक प्रक्रिया

15वीं केरल विधानसभा ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत राज्य का नाम बदलने का अनुरोध किया था। केरल सरकार का तर्क था कि मलयालम भाषा में राज्य को 'केरलम' कहा जाता है और संविधान की पहली अनुसूची में दर्ज अंग्रेज़ी-प्रभावित नाम 'केरल' भाषाई वास्तविकता को प्रतिबिंबित नहीं करता।

इस अनुरोध के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल ने केरल सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दी। तत्पश्चात विधेयक को विचार के लिए केरल विधानसभा को भेजा गया, जहाँ विधानसभा ने विधेयक के सभी खंडों को सर्वसम्मति से पारित किया।

संविधान में क्या बदलेगा

नित्यानंद राय ने बताया कि विधेयक में प्रावधान है कि नियत तारीख से राज्य को 'केरलम' के नाम से जाना जाएगा। इसके लिए संविधान की पहली और चौथी अनुसूची में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे। गौरतलब है कि यह संशोधन केवल नाम तक सीमित है — राज्य की सीमाएँ, प्रशासनिक ढाँचा या अन्य संवैधानिक प्रावधान अपरिवर्तित रहेंगे।

सरकार का रुख: विरासत और संस्कृति की पुनर्स्थापना

नित्यानंद राय ने कहा, 'यह केरल के करोड़ों केरलमवासियों के प्रयास और भावनाओं की सफलता है। यह राज्य सरकार की सोच और उसके संकल्प की भी सफलता है।' उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस संकल्प से जोड़ा, जिसके तहत देश की विरासत और संस्कृति से जुड़े गौरव को स्थापित करने और औपनिवेशिक प्रतीकों को हटाने का लक्ष्य रखा गया है।

चर्चा के दौरान आदि शंकराचार्य का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि भारत की सनातन संस्कृति की चर्चा उनके योगदान के बिना अधूरी है। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य ने देश के विभिन्न हिस्सों में मंदिरों और धार्मिक परंपराओं को व्यवस्थित कर भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक एकता को मज़बूत किया।

अन्य राज्यों के नाम परिवर्तन पर केंद्र का संकेत

विधेयक पर चर्चा के दौरान पश्चिम बंगाल का नाम बदलने का मुद्दा भी उठा। नित्यानंद राय ने कहा कि अलग-अलग समय में 'बंगला', 'बंगाल' और 'बांग्ला' जैसे नामों के प्रस्ताव आए हैं, लेकिन उनमें एकरूपता नहीं थी। उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल के एक सांसद ने अब 'पश्चिम बोंगो' नाम रखने का अनुरोध किया है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि औपचारिक प्रस्ताव आता है और वह वहाँ के लोगों की भावनाओं तथा भारतीय विरासत से जुड़ा होगा, तो केंद्र सरकार उस पर विचार कर सकती है।

इसी क्रम में कुछ सदस्यों ने पटना का नाम 'पाटलिपुत्र' करने सहित अन्य स्थानों के नाम बदलने के सुझाव दिए। मंत्री ने कहा कि ऐसे सभी प्रस्ताव निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया के तहत आने चाहिए।

आगे क्या होगा

संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद अब विधेयक राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलते ही सरकार द्वारा अधिसूचित नियत तारीख से 'केरलम' नाम आधिकारिक रूप से लागू हो जाएगा और संविधान की संबंधित अनुसूचियों में संशोधन किया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

पटना और अन्य स्थानों के नाम-परिवर्तन की चर्चाएँ किस प्रक्रिया और किस प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ेंगी। संवैधानिक प्रक्रिया का पालन ज़रूरी है, पर यह भी देखना होगा कि नाम-बदलाव की ऊर्जा शासन और विकास की चर्चाओं को हाशिये पर न धकेले।
RashtraPress
12 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल का नाम 'केरलम' क्यों किया जा रहा है?
मलयालम भाषा में राज्य का नाम पहले से 'केरलम' है। केरल सरकार और 15वीं केरल विधानसभा ने सर्वसम्मति से तर्क दिया कि संविधान की पहली अनुसूची में दर्ज 'केरल' नाम भाषाई वास्तविकता को प्रतिबिंबित नहीं करता, इसलिए इसे 'केरलम' किया जाना चाहिए।
केरल नाम परिवर्तन विधेयक 2026 कब से लागू होगा?
संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद अब विधेयक राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद सरकार द्वारा अधिसूचित नियत तारीख से 'केरलम' नाम आधिकारिक रूप से लागू होगा।
संविधान में क्या बदलाव होंगे?
विधेयक के तहत संविधान की पहली अनुसूची (राज्यों की सूची) और चौथी अनुसूची (राज्यसभा सीटों का आवंटन) में 'केरल' की जगह 'केरलम' दर्ज किया जाएगा। राज्य की सीमाएँ, प्रशासनिक ढाँचा या अन्य संवैधानिक प्रावधान अपरिवर्तित रहेंगे।
क्या अन्य राज्यों के नाम भी बदले जा सकते हैं?
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने संकेत दिया कि पश्चिम बंगाल के लिए 'पश्चिम बोंगो' नाम का अनुरोध आया है और पटना को 'पाटलिपुत्र' करने के भी सुझाव मिले हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई औपचारिक प्रस्ताव निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया के तहत आता है और वह लोगों की भावनाओं व विरासत से जुड़ा है, तो केंद्र सरकार उस पर विचार कर सकती है।
इस विधेयक को पारित करने की संवैधानिक प्रक्रिया क्या थी?
सबसे पहले 15वीं केरल विधानसभा ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर केंद्र से संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत नाम बदलने का अनुरोध किया। इसके बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रस्ताव को मंजूरी दी, विधेयक को पुनः केरल विधानसभा भेजा गया जहाँ सर्वसम्मति से पारित हुआ, और अंततः लोकसभा व राज्यसभा दोनों ने इसे पास किया।
राष्ट्र प्रेस
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