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संजय गुप्ता का सवाल: रणबीर, रणवीर, विक्की के स्मोकिंग पोस्टर्स हों तो एंटी-स्मोकिंग विज्ञापन बेमानी क्यों नहीं?

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संजय गुप्ता का सवाल: रणबीर, रणवीर, विक्की के स्मोकिंग पोस्टर्स हों तो एंटी-स्मोकिंग विज्ञापन बेमानी क्यों नहीं?

सारांश

फिल्ममेकर संजय गुप्ता ने एक्स पर रणबीर, रणवीर और विक्की कौशल के सिगरेट वाले पोस्टर्स शेयर कर पूछा — जब प्रचार ही स्मोकिंग को ग्लैमराइज़ करे, तो एंटी-स्मोकिंग विज्ञापन किस काम के? जवाब में यूज़र ने उनकी अपनी फिल्म 'कांटे' का ज़िक्र कर पलटवार किया।

मुख्य बातें

संजय गुप्ता ने 27 सितंबर 2026 को एक्स पर तीन फिल्मों के स्मोकिंग पोस्टर्स शेयर कर एंटी-स्मोकिंग विज्ञापनों की प्रासंगिकता पर सवाल उठाया।
पोस्टर्स में रणबीर कपूर ('एनिमल'), रणवीर सिंह ('धुरंधर') और विक्की कौशल ('लव एंड वॉर') को सिगरेट के साथ दिखाया गया था।
एक एक्स यूज़र ने गुप्ता को उनकी 2002 की फिल्म 'कांटे' का हवाला देकर घेरा, जिसमें संजय दत्त सिगरेट पीते नज़र आए थे।
गुप्ता ने सफाई दी कि 2002 में अनिवार्य एंटी-स्मोकिंग विज्ञापनों का चलन नहीं था।
सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी कि बॉलीवुड में सिगरेट को मर्दानगी के प्रतीक के रूप में दिखाना रचनात्मकता की कमी का संकेत है।

फिल्ममेकर संजय गुप्ता ने 27 सितंबर 2026 को बॉलीवुड के हालिया फिल्म पोस्टर्स में लीड अभिनेताओं को सिगरेट के साथ दिखाए जाने पर तीखा सवाल उठाया है। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर तीन बड़ी फिल्मों के पोस्टर्स साझा करते हुए पूछा कि जब प्रचार सामग्री ही स्मोकिंग को ग्लैमराइज़ करती हो, तो सिनेमाघरों में दिखाए जाने वाले एंटी-स्मोकिंग संदेशों का क्या औचित्य रह जाता है।

किन पोस्टर्स पर उठाया सवाल

संजय गुप्ता ने अपनी पोस्ट में तीन फिल्मों के पोस्टर्स शामिल किए — निर्देशक संदीप रेड्डी वांगा की फिल्म 'एनिमल' में रणबीर कपूर, निर्देशक आदित्य धर की फिल्म 'धुरंधर' में रणवीर सिंह, और निर्देशक संजय लीला भंसाली की 'लव एंड वॉर' में विक्की कौशल। इन तीनों पोस्टर्स में एकसमान बात यह थी कि तीनों अभिनेताओं को सिगरेट के साथ दिखाया गया था।

गुप्ता ने एक्स पर लिखा, 'फिल्मों से पहले और उनके दौरान हमें जो एंटी-स्मोकिंग रील्स देखनी पड़ती हैं, उनका क्या मतलब है, जब फिल्मों के पोस्टर्स ही ऐसे हैं?' यह टिप्पणी बॉलीवुड की उस रवायत पर सीधा प्रहार है जिसमें 'मर्दाना' छवि के लिए सिगरेट को एक प्रॉप के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है।

संजय गुप्ता की अपनी फिल्म पर यूज़र ने दिलाई याद

गुप्ता की पोस्ट पर कमेंट सेक्शन में बहस छिड़ गई। एक एक्स यूज़र ने उन्हें उनकी अपनी 2002 में आई फिल्म 'कांटे' की याद दिलाई, जिसमें एक गाने में संजय दत्त को सिगरेट का धुआँ छोड़ते और कॉलर ऊपर चढ़ाते हुए दिखाया गया था। यूज़र ने टिप्पणी की कि यह बात 'कांटे' के निर्देशक की ओर से आना एक विडंबना है।

इस पर संजय गुप्ता ने जवाब दिया कि उस समय नियम और जन-जागरूकता के संदेश अलग थे। उन्होंने कहा, 'उस समय नो-स्मोकिंग विज्ञापन नहीं होते थे, जीनियस।' गौरतलब है कि भारत में फिल्मों के दौरान अनिवार्य एंटी-तंबाकू चेतावनियों का नियम बाद के वर्षों में लागू हुआ था।

मर्दानगी और सिगरेट की बहस

एक अन्य सोशल मीडिया यूज़र ने इस बहस को व्यापक सांस्कृतिक संदर्भ में रखते हुए कहा कि भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में सिगरेट को मर्दानगी के प्रतीक के रूप में इस्तेमाल करना रचनात्मकता की कमी को दर्शाता है। यूज़र ने लिखा, 'क्योंकि इन लोगों को लगता है कि सिगरेट ही ऐसी चीज़ है, जो किसी आदमी को मर्दाना दिखाती है। यह रचनात्मकता की कमी है। भारतीय फिल्म इंडस्ट्री मर्दानगी को ज़रूरत से ज़्यादा महत्व देने की समस्या से जूझ रही है।'

यह ऐसे समय में आया है जब बॉलीवुड के भीतर 'हाइपर-मैस्कुलिनिटी' की प्रवृत्ति को लेकर आलोचकों और दर्शकों में बहस पहले से तेज़ हो रही है। 'एनिमल' की रिलीज़ के वक्त भी इसी मुद्दे पर व्यापक विमर्श हुआ था।

नियामक पहलू और असर

भारतीय कानून के तहत सिनेमाघरों में तंबाकू सेवन के दृश्यों के साथ वैधानिक चेतावनी दिखाना अनिवार्य है, और फिल्म शुरू होने से पहले एंटी-तंबाकू विज्ञापन चलाने की भी बाध्यता है। लेकिन यह नियम फिल्म के पोस्टर्स या प्रचार सामग्री पर उतना स्पष्ट रूप से लागू नहीं होता, जो इस पूरे विवाद की जड़ में है। आलोचकों का कहना है कि जब पोस्टर ही 'स्मोकिंग इज़ कूल' का संदेश दे रहा हो, तो सिनेमाघर में चलने वाली चेतावनी महज़ खानापूर्ति बनकर रह जाती है।

यह बहस आगे भी जारी रहने की संभावना है, और यह देखना दिलचस्प होगा कि फिल्म निर्माता और नियामक संस्थाएँ प्रचार सामग्री में इस विरोधाभास को कैसे संबोधित करती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

एंटी-स्मोकिंग अनिवार्यता एक खोखला अनुष्ठान ही रहेगी।
RashtraPress
27 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संजय गुप्ता ने किन फिल्मों के पोस्टर्स पर आपत्ति जताई?
संजय गुप्ता ने 'एनिमल' में रणबीर कपूर, 'धुरंधर' में रणवीर सिंह और 'लव एंड वॉर' में विक्की कौशल के उन पोस्टर्स पर आपत्ति जताई, जिनमें तीनों अभिनेताओं को सिगरेट के साथ दिखाया गया था।
संजय गुप्ता ने एंटी-स्मोकिंग विज्ञापनों को लेकर क्या सवाल उठाया?
उन्होंने कहा कि जब फिल्मों के पोस्टर्स ही सिगरेट को ग्लैमराइज़ करते हों, तो सिनेमाघरों में फिल्म से पहले और उसके दौरान दिखाए जाने वाले अनिवार्य एंटी-स्मोकिंग विज्ञापनों का कोई व्यावहारिक असर नहीं रह जाता।
संजय गुप्ता पर यूज़र्स ने कौन-सी फिल्म का हवाला देकर पलटवार किया?
एक एक्स यूज़र ने 2002 की फिल्म 'कांटे' का हवाला दिया, जिसे संजय गुप्ता ने ही निर्देशित किया था और जिसमें संजय दत्त को सिगरेट के साथ दिखाया गया था। गुप्ता ने जवाब दिया कि उस समय अनिवार्य एंटी-स्मोकिंग विज्ञापनों का चलन नहीं था।
क्या बॉलीवुड पोस्टर्स में स्मोकिंग दिखाने पर कोई कानूनी रोक है?
भारतीय कानून के तहत फिल्मों में तंबाकू सेवन के दृश्यों के साथ वैधानिक चेतावनी और सिनेमाघरों में एंटी-तंबाकू विज्ञापन अनिवार्य हैं, लेकिन यह नियम फिल्म की प्रचार सामग्री या पोस्टर्स पर उतने स्पष्ट रूप से लागू नहीं होता। यही वह नियामक अंतर है जिसे गुप्ता की पोस्ट ने उजागर किया है।
सोशल मीडिया पर इस विवाद पर क्या प्रतिक्रिया रही?
सोशल मीडिया पर बहस दो स्तरों पर चली — एक तरफ गुप्ता के 'कांटे' वाले अतीत को लेकर, और दूसरी तरफ बॉलीवुड में सिगरेट को मर्दानगी का प्रतीक बनाने की संस्कृति को लेकर। एक यूज़र ने इसे रचनात्मकता की कमी और 'हाइपर-मैस्कुलिनिटी' की समस्या से जोड़ा।
राष्ट्र प्रेस
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