भगवान वाल्मीकि प्रकट दिवस: हिमाचल से 16 अक्टूबर को निकलेगी तीसरी दो दिवसीय शोभायात्रा
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय वाल्मीकि धर्म समाज की ओर से भगवान वाल्मीकि महाराज के प्रकट दिवस के उपलक्ष्य में हिमाचल प्रदेश से पावन वाल्मीकि तीर्थ के लिए तीसरी दो दिवसीय बस यात्रा एवं शोभायात्रा 16 और 17 अक्टूबर को आयोजित की जाएगी। कुल्लू में आयोजित एक प्रेस वार्ता में संत समाज और संगठन के पदाधिकारियों ने यात्रा की तैयारियों एवं उद्देश्यों की विस्तृत जानकारी साझा की।
यात्रा का विवरण और मार्ग
स्वामी गिरिधारी नाथ महाराज ने प्रेस वार्ता में बताया कि यह यात्रा लक्की और उनकी टीम के नेतृत्व में निकाली जाएगी। पहला पड़ाव शीरपुर में होगा, जिसके बाद श्रद्धालु पावन वाल्मीकि तीर्थ पहुँचेंगे। यात्रा के दौरान भगवान वाल्मीकि महाराज की पालकी को फूलों से सजाकर श्रद्धापूर्वक ले जाया जाएगा।
गौरतलब है कि इससे पहले मनाली और धर्मशाला से भी इसी तरह की यात्राएँ आयोजित की जा चुकी हैं। यह हिमाचल प्रदेश से निकलने वाली तीसरी ऐसी शोभायात्रा है।
यात्रा का उद्देश्य और सामाजिक महत्त्व
स्वामी गिरिधारी नाथ महाराज के अनुसार, इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य वाल्मीकि समाज को भगवान वाल्मीकि महाराज की शिक्षाओं और धर्म से जोड़ना तथा समाज में धार्मिक एवं सामाजिक एकता को सुदृढ़ करना है। उन्होंने कहा कि भगवान वाल्मीकि ने रामायण की रचना कर मानव समाज को सत्य, धर्म, मर्यादा और सदाचार का संदेश दिया।
आयोजकों ने स्पष्ट किया कि यह यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को संगठित करने और नई पीढ़ी को अपनी धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने का माध्यम भी है।
पंजाब सरकार की भागीदारी
पंजाब सरकार के दलित विकास बोर्ड के अध्यक्ष विजय दानव ने हिमाचल प्रदेश के वाल्मीकि समाज के लोगों का अभिनंदन करते हुए कहा कि भारतीय वाल्मीकि धर्म समाज एक धार्मिक एवं सामाजिक संगठन है, जिसकी गतिविधियाँ देश-विदेश में संचालित होती हैं।
विजय दानव ने बताया कि पंजाब पहुँचने पर हिमाचल से आने वाले श्रद्धालुओं के स्वागत की समस्त तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं। पिछली यात्राओं की तरह इस बार भी श्रद्धालुओं के ठहरने की समुचित व्यवस्था की गई है।
समाज से आह्वान
स्वामी परगट नाथ महाराज ने भगवान वाल्मीकि महाराज के जयकारों के साथ समाज के लोगों को यात्रा में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान किया। आयोजकों ने हिमाचल प्रदेश के सभी जिलों से वाल्मीकि समाज के पदाधिकारियों, युवाओं, महिलाओं, बुजुर्गों और श्रद्धालुओं से इस यात्रा में सहभागिता की अपील की है।
यह यात्रा जब पंजाब पहुँचेगी, तब वहाँ के वाल्मीकि समाज और संत समाज की ओर से श्रद्धालुओं का पूरे उत्साह के साथ स्वागत किए जाने की उम्मीद है — जो दोनों राज्यों के बीच धार्मिक और सामाजिक सेतु को और मजबूत करेगा।