26 अक्टूबर 2026
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महर्षि वाल्मीकि जयंती 2026: मनोहर लाल, CM योगी, नायब सैनी सहित दर्जनों नेताओं ने आदिकवि को किया नमन

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महर्षि वाल्मीकि जयंती 2026: मनोहर लाल, CM योगी, नायब सैनी सहित दर्जनों नेताओं ने आदिकवि को किया नमन

सारांश

महर्षि वाल्मीकि जयंती पर देशभर के राजनेता एकजुट दिखे — केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल से लेकर CM योगी, नायब सैनी, भजनलाल शर्मा और रेखा गुप्ता तक, सभी ने आदिकवि की विरासत और रामायण के शाश्वत मूल्यों को नमन किया।

मुख्य बातें

26 अक्टूबर 2026 को महर्षि वाल्मीकि जयंती पर केंद्र और राज्यों के दर्जनों नेताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की।
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल और गजेंद्र सिंह शेखावत ने एक्स पर आदिकवि को नमन किया।
मुख्यमंत्रियों में योगी आदित्यनाथ (उत्तर प्रदेश), नायब सैनी (हरियाणा), भजनलाल शर्मा (राजस्थान), रेखा गुप्ता (दिल्ली) और सम्राट चौधरी (बिहार) ने संदेश जारी किए।
नेताओं ने रामायण को सत्य, मर्यादा, त्याग और कर्तव्यपालन का अमर प्रतीक बताया।
महर्षि वाल्मीकि जयंती हर वर्ष शरद पूर्णिमा को प्रकट दिवस के रूप में मनाई जाती है।

26 अक्टूबर 2026 को आदिकवि और पवित्र महाकाव्य 'रामायण' के रचयिता महर्षि वाल्मीकि की जयंती के पावन अवसर पर केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी सहित देशभर के अनेक वरिष्ठ राजनेताओं ने श्रद्धापूर्वक नमन अर्पित किया। अधिकांश नेताओं ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर महर्षि वाल्मीकि के योगदान और उनकी कालजयी रचना को स्मरण किया।

केंद्रीय मंत्रियों की श्रद्धांजलि

केंद्रीय आवास, शहरी मामले एवं विद्युत मंत्री मनोहर लाल ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, 'मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के आदर्श जीवन और चरित्र को पवित्र महाकाव्य 'रामायण' के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाने वाले आदिकवि महर्षि वाल्मीकि जी की जयंती पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। आदिकवि महर्षि वाल्मीकि जी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम!'

केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने एक्स पर लिखा, 'समस्त देशवासियों को रामायण के रचनाकार आदिकवि महर्षि वाल्मीकि जी की जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं।'

मुख्यमंत्रियों के संदेश

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स पर 'रामो विग्रहवान् धर्म।' उद्धृत करते हुए लिखा कि 'रामायण' के माध्यम से प्रभु श्री राम के चरित्र और सनातन संस्कृति के शाश्वत मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने वाले आदिकवि महर्षि वाल्मीकि जी को कोटि-कोटि नमन। उन्होंने यह भी कहा कि 'रामायण' आज भी समस्त मानवता को धर्म, सदाचार एवं लोकमंगल के पथ पर अग्रसर होने की प्रेरणा देती है।

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि जी की रचना मर्यादा, न्याय, त्याग और कर्तव्य के प्रति समर्पण का बोध कराती है तथा उनके महान विचार आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करते रहेंगे। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने आदिकवि को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए उनके विचारों को जीवन आलोकित करने वाला बताया।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि जी ने अपनी दिव्य रचना के माध्यम से धर्म, सत्य एवं मर्यादा के महान आदर्शों को युगों-युगों के लिए अमर कर दिया। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी महर्षि की शिक्षाओं को सत्य, सदाचार एवं मानवता की प्रेरणा का स्रोत बताया।

अन्य राजनेताओं की प्रतिक्रिया

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य ने महर्षि वाल्मीकि को 'रामायण' के माध्यम से संपूर्ण मानवता को प्रभु श्रीराम के आदर्शों से परिचित कराने वाला बताते हुए कोटि-कोटि नमन अर्पित किया। उत्तर प्रदेश भाजपा (भारतीय जनता पार्टी) अध्यक्ष पंकज चौधरी ने उन्हें त्रिकालदर्शी आदिकवि बताते हुए सामाजिक समरसता के उनके आदर्शों को प्रासंगिक बताया।

बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि जी की शिक्षाएं सामाजिक समरसता, समानता और सेवाभाव के साथ समाज के अंतिम व्यक्ति को सम्मान देने की प्रेरणा देती हैं। दिल्ली सरकार के मंत्री प्रवेश साहिब सिंह और छत्तीसगढ़ सरकार के मंत्री केदार कश्यप ने भी एक्स पर महर्षि वाल्मीकि को नमन करते हुए रामायण को युगों-युगों तक प्रासंगिक बताया।

भाजपा से राज्यसभा सांसद संजय सेठ ने महर्षि वाल्मीकि की कालजयी रचना को भारतीय संस्कृति एवं साहित्य की अमूल्य धरोहर बताते हुए कहा कि उनके प्रतिपादित जीवन-मूल्य आज भी नैतिकता, सद्भाव और मानवीय मूल्यों की स्थापना के लिए प्रेरणास्रोत हैं।

महर्षि वाल्मीकि की विरासत

महर्षि वाल्मीकि को संस्कृत साहित्य का प्रथम कवि माना जाता है और उनकी रचना 'रामायण' को भारतीय सभ्यता का आधारस्तम्भ। गौरतलब है कि उनकी जयंती हर वर्ष शरद पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है और इसे प्रकट दिवस के रूप में भी जाना जाता है। उनकी रचना ने न केवल भारत बल्कि दक्षिण-पूर्व एशिया की सांस्कृतिक परंपराओं को भी गहराई से प्रभावित किया है।

इस वर्ष भी केंद्र से लेकर राज्यों तक तमाम राजनेताओं द्वारा आदिकवि को स्मरण किया जाना इस बात का प्रमाण है कि रामायण और उसके रचयिता की प्रासंगिकता आज भी सार्वजनिक विमर्श में उतनी ही अटूट है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें एक गहरा सांस्कृतिक संकेत भी है — भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों से लेकर केंद्रीय मंत्रियों तक, सभी एक साथ रामायण और उसके रचयिता को मंच पर लाते हैं। यह केवल साहित्यिक श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की उस व्यापक परियोजना का हिस्सा है जो रामायण को सार्वजनिक विमर्श के केंद्र में रखती है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक जाती है वह यह है कि वाल्मीकि जयंती समाज के वंचित वर्गों — विशेषकर वाल्मीकि समुदाय — के लिए विशेष महत्व रखती है, और राजनीतिक श्रद्धांजलि का यह सैलाब उन समुदायों तक वास्तविक नीतिगत पहुँच में कितना तब्दील होता है, यही असली सवाल है।
RashtraPress
26 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महर्षि वाल्मीकि जयंती 2026 कब मनाई गई?
महर्षि वाल्मीकि जयंती 2026 में 26 अक्टूबर को मनाई गई। यह जयंती प्रतिवर्ष शरद पूर्णिमा के दिन 'प्रकट दिवस' के रूप में मनाई जाती है।
वाल्मीकि जयंती पर किन-किन नेताओं ने श्रद्धांजलि दी?
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल और गजेंद्र सिंह शेखावत, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की। अधिकांश ने एक्स पर पोस्ट कर आदिकवि को नमन किया।
महर्षि वाल्मीकि कौन थे और रामायण का क्या महत्व है?
महर्षि वाल्मीकि को संस्कृत साहित्य का प्रथम कवि — आदिकवि — माना जाता है। उन्होंने महाकाव्य 'रामायण' की रचना की, जो प्रभु श्रीराम के जीवन और आदर्शों का वर्णन करती है और भारतीय सभ्यता तथा दक्षिण-पूर्व एशियाई संस्कृतियों पर गहरा प्रभाव डालती है।
CM योगी आदित्यनाथ ने वाल्मीकि जयंती पर क्या कहा?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स पर 'रामो विग्रहवान् धर्म।' उद्धृत करते हुए कहा कि रामायण आज भी समस्त मानवता को धर्म, सदाचार एवं लोकमंगल के पथ पर चलने की प्रेरणा देती है। उन्होंने आदिकवि महर्षि वाल्मीकि को कोटि-कोटि नमन अर्पित किया।
वाल्मीकि समुदाय के लिए यह जयंती क्यों विशेष है?
वाल्मीकि जयंती वाल्मीकि समुदाय — जो महर्षि वाल्मीकि को अपना आराध्य मानता है — के लिए सबसे महत्वपूर्ण पर्वों में से एक है। देशभर में इस दिन शोभायात्राएं, भजन-कीर्तन और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं।
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