वाल्मीकि जयंती पर PM मोदी का संदेश: 'सद्विचार भारतीय संस्कृति के मूल तत्व, हर युग में राष्ट्र को पुष्पित करेंगे'
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 अक्टूबर 2026 को महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि महर्षि वाल्मीकि के सद्विचार भारतीय संस्कृति और विरासत के मूल तत्व रहे हैं, जो हर युग में राष्ट्र को पुष्पित-पल्लवित करते रहेंगे। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से यह भावनापूर्ण संदेश साझा किया।
एक्स पर प्रधानमंत्री का संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार सुबह एक्स पर लिखा, 'आप सभी को महर्षि वाल्मीकि जयंती की असीम शुभकामनाएं। उनके सद्विचार भारतीय संस्कृति और विरासत के मूल तत्व रहे हैं, जो हर युग में राष्ट्र को पुष्पित-पल्लवित करते रहेंगे। मानवता के लिए उनके अनमोल संदेश देशवासियों के लिए सदैव पथ-प्रदर्शक बने रहेंगे।'
मोदी ने एक अन्य पोस्ट में 'संस्कृत सुभाषितम्' भी साझा किया — महाकवि कालिदास रचित 'रघुवंशम्' के चौदहवें सर्ग (सर्ग 14, श्लोक 70) का एक श्लोक, जो महर्षि वाल्मीकि के करुणाभाव और रामायण की रचना के आधार को उजागर करता है।
इस 'सुभाषितम्' में बताया गया कि जब कुश और यज्ञ की समिधाएं लेने गए महर्षि वाल्मीकि ने क्रौञ्ची का करुण विलाप सुना, तब उनके निर्मल हृदय में जागी करुणा श्लोक के रूप में प्रकट हुई — और यही श्लोक, उनकी करुणा, समभाव, तपस्या और विद्वत्ता से, रामायण की रचना का आधार बना।
'मन की बात' में वाल्मीकि को याद किया
इससे एक दिन पूर्व, रविवार को 'मन की बात' कार्यक्रम में भी प्रधानमंत्री मोदी ने महर्षि वाल्मीकि का स्मरण किया। उन्होंने कहा, 'हजारों वर्ष बीत गए, लेकिन महर्षि वाल्मीकि जी की रामायण आज भी हमें कुछ नया सिखाती है।' उन्होंने महर्षि वाल्मीकि के संदेश को निरंतर प्रयास, सेवा, करुणा और सामाजिक समरसता का प्रतीक बताया।
मोदी ने कहा, 'वाल्मीकि रामायण में भगवान राम का चरित्र इन मूल्यों का बहुत सुंदर उदाहरण है। भगवान राम ने माता शबरी के प्रेम और भक्ति को अपनाया। निषादराज की मित्रता को सम्मान दिया। सबको साथ लेकर चलने का भाव — ये आदर्श आज भी हमें दिशा दिखाते हैं।'
अयोध्या से जोड़ा महर्षि वाल्मीकि का महत्व
प्रधानमंत्री ने अयोध्या के भव्य राम मंदिर का उल्लेख करते हुए कहा कि वहाँ महर्षि वाल्मीकि, निषादराज और माता शबरी के मंदिर भी बनाए गए हैं — जो सेवा, समरसता और करुणा की उस परंपरा को जीवंत रखते हैं जिसकी महर्षि ने नींव रखी थी।
मोदी ने संतोष व्यक्त किया कि अयोध्या के एयरपोर्ट का नाम भी महर्षि वाल्मीकि के नाम पर रखा गया है। उन्होंने कहा, 'ये प्रयास हमारी उसी महान परंपरा को समृद्ध करते हैं, जिसमें सेवा, समरसता और करुणा को सर्वोच्च स्थान दिया गया है।'
महर्षि वाल्मीकि की ऐतिहासिक विरासत
महर्षि वाल्मीकि को आदिकवि माना जाता है — संस्कृत साहित्य के पहले महाकाव्य रामायण के रचयिता, जिसमें करीब 24,000 श्लोक हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को लेकर नई चर्चा चल रही है और अयोध्या एक बार फिर राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में है।
प्रधानमंत्री का यह संदेश न केवल एक पर्व की शुभकामना है, बल्कि भारतीय सभ्यता की उस साझी विरासत को रेखांकित करने का प्रयास है जिसमें करुणा, समभाव और सामाजिक एकता को सर्वोपरि माना गया है।