मन की बात में PM मोदी ने महर्षि वाल्मीकि और भाई परमानंद को किया नमन, बोले 'इनका जीवन आज भी प्रेरणा का स्रोत'
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में महर्षि वाल्मीकि जयंती और स्वतंत्रता सेनानी भाई परमानंद को श्रद्धापूर्वक याद किया। उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि की रामायण हजारों वर्ष बाद भी मानवता को नई दिशा देती है, और 4 नवंबर 2026 को भाई परमानंद की 150वीं जयंती के अवसर पर युवाओं से उनके जीवन को जानने का आग्रह किया।
महर्षि वाल्मीकि और रामायण की प्रासंगिकता
प्रधानमंत्री मोदी ने महर्षि वाल्मीकि की रामायण को जीवन का दीपस्तंभ बताते हुए कहा, "महर्षि वाल्मीकि ने रामायण के माध्यम से हमें जीवन की गहरी सीख दी है। एक ओर वे निरंतर प्रयास करते रहने का संदेश देते हैं, तो दूसरी ओर सेवा, करुणा और सामाजिक समरसता का महत्व समझाते हैं। वाल्मीकि रामायण में भगवान राम का चरित्र इन मूल्यों का बहुत सुंदर उदाहरण है।"
उन्होंने भगवान राम के माध्यम से सामाजिक समरसता का संदेश देते हुए कहा, "भगवान राम ने माता शबरी के प्रेम और भक्ति को अपनाया। निषादराज की मित्रता को सम्मान दिया। सबको साथ लेकर चलने का भाव — ये आदर्श आज भी हमें दिशा दिखाते हैं।"
अयोध्या में समरसता का प्रतीक
मोदी ने कहा कि अयोध्या के भव्य राम मंदिर में भी सामाजिक समरसता की यह भावना प्रतिबिंबित होती है। उन्होंने बताया कि वहाँ महर्षि वाल्मीकि, निषादराज और माता शबरी के मंदिर भी निर्मित किए गए हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि अयोध्या एयरपोर्ट का नामकरण महर्षि वाल्मीकि के नाम पर किया गया है, जो इस महान परंपरा को जीवंत रखने का प्रयास है।
भाई परमानंद: गदर से गुयाना तक
भाई परमानंद की 150वीं जयंती का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने उनके बहुआयामी व्यक्तित्व को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि 20वीं सदी के आरंभ में भाई परमानंद आर्य समाज के कार्य से दक्षिण अफ्रीका गए थे, जहाँ उनकी मुलाकात महात्मा गांधी से भी हुई। इसके बाद उन्होंने गुयाना में गिरमिटिया समाज के बीच सेवाकार्य किया, जो उस समय आर्य समाज का एक बड़ा केंद्र था।
मोदी ने अपनी गुयाना यात्रा का स्मरण करते हुए कहा, "मुझे भी गुयाना की अपनी यात्रा के समय आर्य समाज के स्मारक पर जाने का सौभाग्य मिला था।"
स्वतंत्रता संग्राम में भाई परमानंद का योगदान
प्रधानमंत्री ने बताया कि भाई परमानंद ने स्वतंत्रता आंदोलन में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कहा जाता है कि उन्होंने लाला हरदयाल को अमेरिका जाने के लिए प्रेरित किया था। वे गदर पार्टी के संस्थापक सदस्यों में भी शामिल थे। अंग्रेजी हुकूमत ने उनके प्रभाव से भयभीत होकर उन्हें काला पानी की सजा दी।
मोदी ने उनकी पुस्तक 'आपबीती: काले पानी की कारावास कहानी' का विशेष उल्लेख करते हुए युवाओं से इसे पढ़ने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी बताया कि काला पानी से लौटने के बाद भाई परमानंद ने शिक्षा के क्षेत्र में योगदान दिया और उन्होंने वीर भगत सिंह को भी पढ़ाया था। बाद में वे कई वर्षों तक हिंदू महासभा से भी जुड़े रहे।
युवाओं से आह्वान
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में कहा, "गांधी जी से लेकर गुयाना तक, गदर से लेकर अंडमान तक उनका व्यक्तित्व बहुत प्रेरणादायक है। मैं भाई परमानंद जी को आदरपूर्वक श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। युवा साथियों से मेरा आग्रह है कि वे उनके बारे में जानें और दूसरों को भी प्रेरित करें।"
यह कार्यक्रम ऐसे समय में आया है जब देश अगले सप्ताह 4 नवंबर को भाई परमानंद की 150वीं जयंती मनाने की तैयारी में है — जो उनके राष्ट्रीय पुनर्स्मरण को और व्यापक स्वर देगा।