विजयादशमी 2026: PM मोदी ने एक्स पर भगवान श्रीराम का वाल्मीकि रामायण श्लोक साझा किया
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 अक्टूबर 2026 को विजयादशमी के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर दो पोस्ट साझा कीं — पहली में उन्होंने राष्ट्र के लिए सुख-सौभाग्य की कामना की, और दूसरी में महर्षि वाल्मीकि रचित वाल्मीकि रामायण के अरण्यकांड का एक संस्कृत श्लोक प्रस्तुत किया। यह संदेश ऐसे समय आया है जब पूरा देश असत्य पर सत्य की विजय के प्रतीक इस पर्व को उत्साह के साथ मना रहा है।
प्रधानमंत्री का शुभकामना संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर लिखा, 'आप सभी को विजयादशमी की अनंत शुभकामनाएं। उल्लास और विश्वास का यह विजय पर्व हर किसी के संकल्प को नई शक्ति प्रदान करे। सभी का जीवन सुख-सौभाग्य और सफलता से समृद्ध हो, यही कामना है।' इस संदेश में उन्होंने विजयादशमी को केवल उत्सव नहीं, बल्कि आंतरिक संकल्प को पुनर्जीवित करने का अवसर बताया।
साझा किया गया वाल्मीकि रामायण का श्लोक
अपनी दूसरी पोस्ट में प्रधानमंत्री ने वाल्मीकि रामायण के अरण्यकांड के 37वें सर्ग का 13वाँ श्लोक साझा किया। संस्कृत में यह श्लोक है — 'रामो विग्रहवान् धर्मस्साधुस्सत्यपराक्रमः। राजा सर्वस्य लोकस्य देवानां मघवानिव॥' इसका हिंदी भावार्थ यह है कि भगवान श्रीराम साक्षात् धर्म के जीवंत स्वरूप हैं — वे सज्जनों के परम आश्रय, सत्यसंकल्प और सत्यपराक्रमी हैं, तथा समस्त लोकों के उसी प्रकार पालनकर्ता और रक्षक हैं जैसे देवराज इंद्र देवलोक के अधिपति हैं।
श्लोक का प्रसंग और महत्व
यह श्लोक उस प्रसंग से जुड़ा है जब राक्षस ऋषियों और वनवासी साधु-संतों पर अत्याचार कर रहे थे, और भगवान श्रीराम ने उनके कष्टों के निवारण तथा धर्म की पुनर्स्थापना का संकल्प लिया था। श्लोक में धर्म को कोई अमूर्त नियम नहीं, बल्कि श्रीराम के आचरण और वचनों में साकार हुआ बताया गया है। गौरतलब है कि श्रीराम ने पुत्र, भाई, मित्र और राजा — हर रूप में धर्म का ही पालन किया।
राष्ट्रीय त्योहार पर नेताओं की परंपरा
विजयादशमी पर प्रमुख राष्ट्रीय नेताओं द्वारा संदेश साझा करना एक स्थापित परंपरा रही है। प्रधानमंत्री मोदी का इस बार संस्कृत श्लोक के माध्यम से शुभकामना देना उल्लेखनीय है, क्योंकि इससे शास्त्रीय साहित्य और सांस्कृतिक विरासत को भी रेखांकित किया गया है। वाल्मीकि जयंती इसी सप्ताह मनाई जाती है, जो इस श्लोक की प्रासंगिकता को और गहरा बनाती है।
आगे का संदर्भ
विजयादशमी के इस संदेश को व्यापक सांस्कृतिक परिदृश्य में देखें तो यह भारत की रामायण-केंद्रित सांस्कृतिक चेतना को राष्ट्रीय मंच पर प्रतिष्ठित करने का प्रयास है। प्रधानमंत्री का यह संदेश सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया गया, और देशभर में श्रद्धालुओं व सांस्कृतिक संगठनों ने इसे सराहा।