होर्मुज स्ट्रेट से 1.5 अरब बैरल तेल निर्यात में अमेरिकी मदद का दावा, सेंटकॉम प्रमुख कूपर ने किया हवाई निरीक्षण
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने दावा किया है कि पिछले छह महीनों में अमेरिकी सेना ने खाड़ी देशों को होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते 1.5 अरब बैरल से अधिक कच्चे तेल के निर्यात में सहायता प्रदान की। 26 अक्टूबर को सेंटकॉम के बयान के अनुसार, कूपर ने रविवार को अमेरिकी सेना के सीएच-47 चिनूक हेलीकॉप्टर से होर्मुज स्ट्रेट के ऊपर उड़ान भरकर वहाँ के परिचालन हालात का सीधा जायजा लिया।
मुख्य घटनाक्रम
सेंटकॉम के अनुसार, पिछले छह महीनों में अमेरिकी सहयोग से 3,000 से अधिक वाणिज्यिक जहाज इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से गुजरे हैं। कमांड का यह भी दावा है कि हाल के महीनों में स्ट्रेट से गुजरने वाले 95 प्रतिशत से अधिक जहाज सुरक्षित अपने गंतव्य तक पहुँचे। कूपर ने इस दौरे में खदान-निरोधक अभियान में शामिल अमेरिकी सैन्यकर्मियों से भी मुलाकात की।
कूपर ने कहा कि अमेरिका खाड़ी क्षेत्र के अपने साझेदारों और वैश्विक नौवहन उद्योग के साथ मिलकर समुद्री यातायात को निर्बाध बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि यह दौरा होर्मुज के रास्ते स्वतंत्र नौवहन सुनिश्चित करने के अमेरिकी संकल्प को रेखांकित करता है।
समुद्री सुरंगों से मुक्ति का दावा
सेंटकॉम के अनुसार, अमेरिकी सेना ने हाल के महीनों में होर्मुज के अंतरराष्ट्रीय नौवहन मार्गों से समुद्री बारूदी सुरंगों को हटाने का विशेष अभियान चलाया। अमेरिकी कमांड का कहना है कि प्रमुख नौवहन मार्ग अब ईरान की ओर से कथित तौर पर बिछाई गई समुद्री सुरंगों से मुक्त हो चुके हैं। इन मार्गों पर वाणिज्यिक जहाजों की निरंतर आवाजाही बनाए रखना अमेरिका की प्राथमिकता बताई जा रही है।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। गौरतलब है कि फरवरी 2026 में अमेरिका-इज़राइल के ईरान पर संयुक्त हवाई हमले के बाद यह विवाद और गहरा गया था। हमले के जवाब में तेहरान ने इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश की, शुल्क और अनुमति की माँग की तथा स्ट्रेट पर अपना नियंत्रण जताने का प्रयास किया।
इसके प्रत्युत्तर में अमेरिका ने ईरान पर नौसैनिक नाकेबंदी लागू की और खाड़ी क्षेत्र से तेल तथा वाणिज्यिक माल की आवाजाही सुनिश्चित करने की कोशिश की। यह Nवीं ऐसी घटना है जिसमें होर्मुज की रणनीतिक स्थिति को लेकर दोनों देश सीधे आमने-सामने आए हैं।
वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। फारस की खाड़ी के तेल उत्पादक देशों — जिनमें सऊदी अरब, इराक, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत शामिल हैं — से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक कच्चे तेल और अन्य ऊर्जा उत्पादों की बड़ी मात्रा इसी मार्ग से गुजरती है। किसी भी रुकावट का सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों और भारत जैसे आयातक देशों की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ता है।
आगे की स्थिति
अमेरिकी सेना की ओर से इस दौरे को होर्मुज में अपनी सक्रिय उपस्थिति और प्रतिबद्धता के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका-ईरान तनाव में कोई भी नई बढ़ोतरी वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित कर सकती है। क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए आने वाले हफ्तों में अमेरिकी कूटनीतिक और सैन्य गतिविधियाँ और तेज होने की संभावना है।