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वाल्मीकि जयंती 26 अक्टूबर: यूपी के 75 जनपदों में रामायण पाठ, लव-कुश प्रसंग से जीवंत होगी सांस्कृतिक विरासत

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वाल्मीकि जयंती 26 अक्टूबर: यूपी के 75 जनपदों में रामायण पाठ, लव-कुश प्रसंग से जीवंत होगी सांस्कृतिक विरासत

सारांश

26 अक्टूबर को यूपी के 75 जनपदों में वाल्मीकि जयंती का महोत्सव — चित्रकूट तपोस्थली से लेकर अयोध्या तक 600+ मंदिरों में रामायण पाठ, लव-कुश प्रसंग और दीपदान। योगी सरकार इसे धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत को जोड़ने की व्यापक रणनीति के रूप में देख रही है।

मुख्य बातें

26 अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश के 75 जनपदों में वाल्मीकि जयंती का भव्य आयोजन होगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर सैकड़ों मंदिरों व रामायण स्थलों पर दीपदान , रामायण पाठ और लव-कुश प्रसंग का मंचन होगा।
8, 12 या 24 घंटे तक अनवरत वाल्मीकि रामायण पाठ की व्यवस्था की जाएगी।
पिछले वर्ष 600 से अधिक मंदिरों में कार्यक्रम हुए; इस वर्ष उससे भी बड़ा आयोजन प्रस्तावित।
देशभर में रामायण से जुड़े करीब 280 स्थल हैं, जिनमें यूपी के अनेक महत्वपूर्ण स्थान शामिल हैं।
चित्रकूट, अयोध्या, प्रयागराज, बिठूर (कानपुर) और श्रावस्ती में प्रमुख आयोजन होंगे।

उत्तर प्रदेश सरकार 26 अक्टूबर 2026 को समूचे प्रदेश में वाल्मीकि जयंती का भव्य आयोजन करने जा रही है, जिसमें 75 जनपदों के सैकड़ों महर्षि वाल्मीकि मंदिरों और रामायण से संबद्ध प्रमुख स्थलों पर दीपदान, रामायण पाठ, भजन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर इस उत्सव के माध्यम से आदि कवि महर्षि वाल्मीकि की कालजयी रचना 'रामायण' में निहित मानवीय संवेदनाओं और राष्ट्रीय मूल्यों को जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प लिया गया है।

मुख्य आयोजन स्थल और कार्यक्रम

महर्षि वाल्मीकि की तपोस्थली चित्रकूट के लालापुर में जिला प्रशासन की ओर से वृहद कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। यहाँ रामलीला का मंचन, वाल्मीकि रामायण पाठ, भजन संध्या और स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुतियाँ होंगी। नदी के घाट पर वाल्मीकि आरती का भी आयोजन होगा, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।

इसके अलावा तुलसीदास आश्रम राजापुर (चित्रकूट), वाल्मीकि आश्रम बिठूर (कानपुर), वाल्मीकि आश्रम (श्रावस्ती), अयोध्या और प्रयागराज सहित पूरे प्रदेश में धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की जाएगी। कार्यक्रम जनपद, तहसील और विकास खंड — तीनों स्तरों पर होंगे।

रामायण पाठ और लव-कुश प्रसंग की विशेष प्रस्तुति

मंदिरों और रामायण से जुड़े स्थलों पर 8, 12 या 24 घंटे तक अनवरत वाल्मीकि रामायण पाठ की व्यवस्था की जाएगी। पूजन-हवन के साथ-साथ लव-कुश प्रसंग सहित अन्य कार्यक्रमों का भी मंचन होगा, जो रामायण की जीवंत सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने का माध्यम बनेगा। संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार देशभर में रामायण से जुड़े करीब 280 स्थल हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश के कई महत्वपूर्ण स्थान सम्मिलित हैं।

गौरतलब है कि पिछले वर्ष प्रदेश के 600 से अधिक मंदिरों में इस अवसर पर कार्यक्रम आयोजित हुए थे। इस वर्ष भी उसी स्तर का अथवा उससे भी बड़ा आयोजन होने की तैयारी है।

स्थानीय कलाकारों को आध्यात्मिक मंच

योगी सरकार इस बार स्थानीय कलाकारों को विशेष प्राथमिकता दे रही है। जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा जनपदों में चयनित मंदिरों एवं स्थलों पर कार्यक्रम हेतु कलाकारों का चयन पहले ही किया जा चुका है। इसका समन्वय संस्कृति विभाग, सूचना-जनसंपर्क विभाग और जिला पर्यटन व संस्कृति परिषद मिलकर करेंगे।

हर जनपद में आयोजन के लिए नोडल अधिकारी नामित किए गए हैं। योगी सरकार का जोर स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सहभागिता के साथ जन-जन को इस उत्सव से जोड़ने पर है।

व्यवस्था और सुरक्षा के निर्देश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हर आयोजन स्थल पर साफ-सफाई, पेयजल, ध्वनि, प्रकाश और सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार धार्मिक पर्यटन को सांस्कृतिक पहचान के साथ जोड़ने की नीति पर लगातार काम कर रही है। राम-जानकी मार्ग और राम वन गमन मार्ग से जुड़े स्थलों की धार्मिक व सांस्कृतिक महत्ता को उजागर करना इस पहल का दीर्घकालिक लक्ष्य है।

आने वाले दिनों में इन आयोजनों के जरिए उत्तर प्रदेश देश के सामने सांस्कृतिक पुनरुत्थान का एक व्यापक मॉडल प्रस्तुत करने की तैयारी में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उत्तर प्रदेश को 'सांस्कृतिक राजधानी' के रूप में स्थापित करने की दीर्घकालिक राजनीतिक-सांस्कृतिक रणनीति का हिस्सा है — जिसमें राम वन गमन मार्ग, राम-जानकी मार्ग और अयोध्या परियोजना जैसी पहलें एक ही सूत्र में पिरोई हैं। हालाँकि सवाल यह भी है कि क्या इतने बड़े आयोजनों का वास्तविक सांस्कृतिक प्रसार होता है, या ये मुख्यतः प्रशासनिक भागीदारी तक सीमित रह जाते हैं। स्थानीय कलाकारों को मंच देने की नीति एक सकारात्मक कदम है, किंतु उसके क्रियान्वयन की पारदर्शी निगरानी की व्यवस्था अभी स्पष्ट नहीं है। असली परीक्षा यह होगी कि रामायण के मूल्य — सामाजिक समरसता और मानवीय संवेदना — केवल आयोजन-स्थल तक सीमित रहते हैं या नीतियों में भी परिलक्षित होते हैं।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वाल्मीकि जयंती 2026 उत्तर प्रदेश में कब और कहाँ मनाई जाएगी?
वाल्मीकि जयंती 26 अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश के सभी 75 जनपदों में मनाई जाएगी। प्रमुख आयोजन चित्रकूट, अयोध्या, प्रयागराज, बिठूर (कानपुर) और श्रावस्ती में होंगे।
वाल्मीकि जयंती पर यूपी सरकार के आयोजनों में क्या-क्या होगा?
आयोजनों में दीप प्रज्ज्वलन, दीपदान, 8, 12 या 24 घंटे तक अनवरत वाल्मीकि रामायण पाठ, पूजन-हवन, लव-कुश प्रसंग का मंचन, भजन संध्या और स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुतियाँ शामिल हैं। नदी घाट पर वाल्मीकि आरती भी होगी।
चित्रकूट में वाल्मीकि जयंती का कार्यक्रम कहाँ होगा?
चित्रकूट में महर्षि वाल्मीकि की तपोस्थली लालापुर में जिला प्रशासन की ओर से वृहद कार्यक्रम आयोजित होगा। यहाँ रामलीला मंचन, रामायण पाठ, भजन संध्या और नदी घाट पर वाल्मीकि आरती में हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
उत्तर प्रदेश में रामायण से जुड़े कितने स्थल हैं और उनका क्या महत्व है?
संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार देशभर में रामायण से जुड़े करीब 280 स्थल हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश के कई महत्वपूर्ण स्थान शामिल हैं। ये स्थल राम-जानकी मार्ग और राम वन गमन मार्ग के रूप में जाने जाते हैं और धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
स्थानीय कलाकारों को इन आयोजनों में कैसे अवसर मिलेगा?
जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा जनपदों के चयनित मंदिरों व स्थलों पर कार्यक्रम के लिए स्थानीय कलाकारों का चयन किया गया है। इसका समन्वय संस्कृति विभाग, सूचना-जनसंपर्क विभाग और जिला पर्यटन व संस्कृति परिषद द्वारा किया जाएगा, तथा हर जनपद में नोडल अधिकारी नामित हैं।
राष्ट्र प्रेस
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