10 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

बालाघाट में जहरीली कुएं की गैस से दो किसानों की मौत, दो सप्ताह में तीसरी ऐसी घटना

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
बालाघाट में जहरीली कुएं की गैस से दो किसानों की मौत, दो सप्ताह में तीसरी ऐसी घटना

सारांश

बालाघाट के पिपरटोला गांव में मोटर पंप ठीक करने उतरे महेश चौधरी और उन्हें बचाने गए युवराज बिसेन — दोनों कुएं की जहरीली गैस की भेंट चढ़ गए। यह 15 दिनों में जिले की चौथी ऐसी मौत है, जो ग्रामीण भारत में बंद कुओं के खतरे और सुरक्षा जागरूकता की भारी कमी को उजागर करती है।

मुख्य बातें

10 जुलाई 2026 को बालाघाट के पिपरटोला गांव में 50 फीट गहरे कुएं में जहरीली गैस से दो किसानों की मौत।
मृतकों की पहचान महेश चौधरी (45 वर्ष) और युवराज बिसेन के रूप में हुई; दोनों किरनापुर थाना क्षेत्र के निवासी थे।
SDRF जवान करण सिंह वाल्के ने ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ उतरकर पाँच घंटे की मशक्कत के बाद शव बाहर निकाले।
बालाघाट में 15 दिनों के भीतर यह तीसरी घटना , कुल चार लोगों की जान गई।
इससे पहले 25 जून को सितकुटोला और 8 जुलाई को मरारीटोला में भी इसी तरह मौतें हुई थीं।
दोनों शव पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजे गए।

मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में 10 जुलाई 2026 की शाम किरनापुर थाना क्षेत्र के पिपरटोला गांव में एक कुएं के भीतर जहरीली गैस की चपेट में आने से दो किसानों की मौत हो गई। पुलिस के अनुसार, मोटर पंप ठीक करने उतरे एक किसान को बचाने की कोशिश में दूसरे किसान ने भी कुएं में छलांग लगाई और दोनों की जान चली गई। यह बालाघाट जिले में करीब दो सप्ताह के भीतर इस तरह की तीसरी घटना है।

घटनाक्रम: कैसे हुई दोहरी त्रासदी

पुलिस के अनुसार, 45 वर्षीय महेश चौधरी अपने मित्र युवराज बिसेन के घर के पीछे स्थित करीब 50 फीट गहरे कुएं में मोटर पंप दुरुस्त करने के लिए उतरे। कुएं के भीतर पहुँचते ही ऑक्सीजन की कमी और जहरीली गैस के कारण उनकी तबीयत बिगड़ी और वे बेहोश होकर गिर पड़े।

महेश को संकट में देख युवराज बिसेन भी उन्हें बचाने के लिए कुएं में उतर गए, लेकिन वे भी जहरीली गैस की चपेट में आ गए। मदद पहुँचने से पहले ही दोनों की मृत्यु कुएं के भीतर हो गई।

राज्य आपदा बल की पाँच घंटे की मशक्कत

घटना की सूचना मिलते ही किरनापुर पुलिस मौके पर पहुँची। कुएं में जहरीली गैस की आशंका को देखते हुए बालाघाट से राज्य आपदा आपातकालीन प्रतिक्रिया बल (SDRF) की टीम बुलाई गई। SDRF के जवान करण सिंह वाल्के ने ऑक्सीजन सिलेंडर और सुरक्षा मास्क पहनकर कुएं में उतरकर करीब पाँच घंटे की कड़ी मेहनत के बाद रस्सियों की सहायता से दोनों शव बाहर निकाले। शव रात करीब 10 से 10:30 बजे के बीच बाहर आए।

किरनापुर थाना प्रभारी राजकुमार चौधरी ने बताया कि पंचनामा कार्रवाई पूरी होने के बाद दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा गया। पोस्टमार्टम के उपरांत शव परिजनों को सौंपे जाएंगे।

दो सप्ताह में तीसरी घटना — पैटर्न चिंताजनक

यह ऐसे समय में आया है जब बालाघाट जिला पहले से ही कुओं में जहरीली गैस से होने वाली मौतों के सिलसिले से जूझ रहा है। 25 जून को सितकुटोला गांव में एक 50 वर्षीय व्यक्ति की इसी प्रकार कुएं में जहरीली गैस से मौत हुई थी। इसके बाद 8 जुलाई को मरारीटोला गांव में भी एक व्यक्ति की जान गई। अब 10 जुलाई को पिपरटोला में दो और मौतें — यानी महज 15 दिनों में जिले में चार लोगों की जान जा चुकी है।

गौरतलब है कि ग्रामीण क्षेत्रों में कुओं की सफाई या मरम्मत के दौरान पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों के अभाव में यह दुर्घटनाएँ बार-बार होती हैं। जल संसाधन विशेषज्ञों के अनुसार, बंद या गहरे कुओं में कार्बन डाइऑक्साइड और हाइड्रोजन सल्फाइड जैसी गैसें जमा हो जाती हैं, जो बिना उचित जाँच के उतरने पर जानलेवा साबित होती हैं।

आम जनता और प्रशासन पर असर

लगातार हो रही इन घटनाओं ने जिला प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय स्तर पर जागरूकता और सुरक्षा प्रोटोकॉल की कमी स्पष्ट दिख रही है। आने वाले दिनों में प्रशासन द्वारा ग्रामीणों को कुओं में उतरने से पहले सावधानी बरतने के निर्देश जारी किए जाने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी जिला प्रशासन की ओर से कोई निवारक अभियान दिखाई नहीं देता। SDRF की त्वरित प्रतिक्रिया सराहनीय है, लेकिन असली सवाल यह है कि आपदा के बाद की प्रतिक्रिया पर ध्यान देने के बजाय रोकथाम पर ध्यान क्यों नहीं दिया जा रहा। जब तक ग्रामीण स्तर पर 'कुएं में उतरने से पहले जाँचो' जैसे सरल प्रोटोकॉल अनिवार्य नहीं किए जाते, ऐसी मौतें होती रहेंगी।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बालाघाट कुआं हादसे में कौन-कौन मारे गए?
पुलिस के अनुसार, 45 वर्षीय महेश चौधरी और उनके मित्र युवराज बिसेन की 10 जुलाई 2026 को पिपरटोला गांव के एक कुएं में जहरीली गैस की चपेट में आने से मौत हो गई। महेश मोटर पंप ठीक करने उतरे थे और युवराज उन्हें बचाने गए थे।
कुएं से शव कैसे निकाले गए?
SDRF के जवान करण सिंह वाल्के ने ऑक्सीजन सिलेंडर और सुरक्षा मास्क पहनकर कुएं में उतरकर करीब पाँच घंटे की मशक्कत के बाद रस्सियों की मदद से दोनों शव बाहर निकाले। शव रात 10 से 10:30 बजे के बीच बाहर आए।
बालाघाट में इससे पहले भी ऐसी घटनाएँ हुई हैं?
हाँ, यह दो सप्ताह के भीतर बालाघाट जिले में तीसरी ऐसी घटना है। 25 जून को सितकुटोला गांव में एक 50 वर्षीय व्यक्ति और 8 जुलाई को मरारीटोला गांव में एक अन्य व्यक्ति की कुएं में जहरीली गैस से मौत हो चुकी है।
कुओं में जहरीली गैस कहाँ से आती है?
विशेषज्ञों के अनुसार, बंद या गहरे कुओं में कार्बन डाइऑक्साइड और हाइड्रोजन सल्फाइड जैसी गैसें जमा हो जाती हैं। उचित वेंटिलेशन और गैस परीक्षण के बिना इनमें उतरना जानलेवा हो सकता है।
इस हादसे के बाद क्या कार्रवाई हुई?
किरनापुर थाना प्रभारी राजकुमार चौधरी के अनुसार, पंचनामा कार्रवाई के बाद दोनों शव पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजे गए। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपे जाएंगे।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 दिन पहले
  2. 6 दिन पहले
  3. 1 सप्ताह पहले
  4. 3 सप्ताह पहले
  5. 3 सप्ताह पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 1 साल पहले