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राजगढ़ में निर्माणाधीन कुआं ढहा, दो महिलाएं मलबे में दबीं; तीन JCB से बचाव अभियान जारी

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राजगढ़ में निर्माणाधीन कुआं ढहा, दो महिलाएं मलबे में दबीं; तीन JCB से बचाव अभियान जारी

सारांश

मध्य प्रदेश के राजगढ़ में खेत में निर्माणाधीन कुआं ढहने से सास-बहू मलबे में दब गईं। तीन JCB और पोक्लेन मशीनें लगाकर बचाव जारी है। यह हादसा पन्ना में 26 मई को हुई इसी तरह की दुर्घटना के कुछ हफ्ते बाद आया है, जिसमें पाँच मजदूरों की जान गई थी।

मुख्य बातें

17 जून को दोपहर 1 बजे राजगढ़ जिले के बामनगांव छोटी गांव में निर्माणाधीन कुआं ढह गया।
सास रूपा (60) और बहू पिंकी (30) मलबे के नीचे दब गईं; दोनों जनपद पंचायत सदस्य के परिवार से हैं।
बचाव के लिए तीन JCB मशीनें और एक पोक्लेन मशीन तैनात; खिलचीपुर अस्पताल से एम्बुलेंस मौके पर तैयार।
पुलिस, जिला प्रशासन और ग्रामीण मिलकर बचाव कार्य में जुटे; अभियान जारी है।
यह हादसा पन्ना जिले में 26 मई को हुई कुआं-ढहने की घटना के कुछ हफ्ते बाद आया, जिसमें पाँच मजदूरों की मौत हुई थी।

मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में बुधवार, 17 जून को दोपहर करीब 1 बजे एक निर्माणाधीन कुआं अचानक ढह गया, जिससे दो महिलाएं — रूपा (60) और उनकी बहू पिंकी (30) — मलबे के नीचे दब गईं। घटना खिलचीपुर तहसील के बामनगांव छोटी गांव में खेत में कुआं खोदने के दौरान हुई, जब मिट्टी और पत्थरों का एक बड़ा हिस्सा अचानक धंस गया। बचाव अभियान तत्काल शुरू कर दिया गया है और फिलहाल जारी है।

घटनाक्रम: कैसे हुआ हादसा

अधिकारियों के अनुसार, रूपा और पिंकी खेत में नए कुएं की खुदाई के दौरान उसके पास खड़ी थीं, तभी कुएं की दीवार और आसपास की मिट्टी एकाएक धंस गई। दोनों महिलाएं कुएं में गिर गईं और तेज़ी से भरते मलबे के नीचे दब गईं। गौरतलब है कि रूपा स्थानीय जनपद पंचायत सदस्य की माँ हैं, जबकि पिंकी उनकी पत्नी हैं।

बचाव अभियान की स्थिति

घटना की सूचना मिलते ही ग्रामीण मौके पर पहुँच गए और पुलिस व प्रशासनिक दल के आने से पहले ही बचाव कार्य शुरू कर दिया। अधिकारियों ने बताया कि मलबा हटाने के लिए तीन JCB मशीनें तैनात की गई हैं और बचाव कार्य में तेज़ी लाने के लिए एक पोक्लेन मशीन भी मंगाई गई है। खिलचीपुर अस्पताल से एक एम्बुलेंस घटनास्थल पर तैयार रखी गई है, ताकि महिलाओं को निकालते ही तत्काल चिकित्सा सहायता दी जा सके।

प्रशासन की प्रतिक्रिया

पुलिस और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी बचाव अभियान की निगरानी कर रहे हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि फंसी हुई महिलाओं तक जल्द से जल्द पहुँचना सर्वोच्च प्राथमिकता है। ग्रामीण भी बचाव कार्यों में प्रशासन का सहयोग कर रहे हैं।

पन्ना हादसे से जुड़ा संदर्भ

यह हादसा ऐसे समय में हुआ है जब मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में 26 मई को हुई इसी तरह की त्रासदी की याद अभी ताज़ी है। उस घटना में निर्माणाधीन कुआं ढहने से पाँच मजदूरों की मौत हो गई थी और दो अन्य को बचाया गया था। पन्ना मामले में पीड़ित महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत निर्मित एक सार्वजनिक सिंचाई कुएं पर काम कर रहे थे। राजगढ़ की इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

आगे क्या

बचाव अभियान जारी है और स्थिति पर नज़र रखी जा रही है। महिलाओं की स्थिति के बारे में आधिकारिक जानकारी का इंतज़ार है। इस घटना के बाद राज्य में निर्माणाधीन कुओं की सुरक्षा जाँच की माँग तेज़ हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

एक पैटर्न है। मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में निर्माणाधीन कुओं पर सुरक्षा प्रोटोकॉल की अनुपस्थिति बार-बार जानलेवा साबित हो रही है। मनरेगा और सार्वजनिक सिंचाई परियोजनाओं के तहत बनने वाले कुओं में मिट्टी परीक्षण और साइट सुरक्षा के मानकों पर सवाल उठना लाज़मी है। जब तक राज्य सरकार ऐसी घटनाओं की व्यवस्थित जाँच और जवाबदेही तय नहीं करती, ये हादसे दोहराते रहेंगे।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजगढ़ में कुआं ढहने की घटना कहाँ और कब हुई?
यह घटना 17 जून को दोपहर करीब 1 बजे मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले की खिलचीपुर तहसील के बामनगांव छोटी गांव में हुई। खेत में नया कुआं खोदने के दौरान मिट्टी और पत्थरों का हिस्सा अचानक धंस गया।
कुएं में कौन दबी हैं और उनकी पहचान क्या है?
मलबे में दबी दोनों महिलाएं सास-बहू हैं — रूपा (60) और पिंकी (30)। रूपा स्थानीय जनपद पंचायत सदस्य की माँ हैं और पिंकी उनकी पत्नी हैं।
बचाव अभियान में क्या-क्या संसाधन लगाए गए हैं?
मलबा हटाने के लिए तीन JCB मशीनें तैनात की गई हैं और बचाव में तेज़ी लाने के लिए एक पोक्लेन मशीन भी मंगाई गई है। खिलचीपुर अस्पताल से एम्बुलेंस घटनास्थल पर तैयार है।
क्या मध्य प्रदेश में पहले भी ऐसी घटनाएं हुई हैं?
हाँ, पन्ना जिले में 26 मई को निर्माणाधीन कुआं ढहने से पाँच मजदूरों की मौत हो गई थी और दो अन्य को बचाया गया था। वे मनरेगा के तहत बनने वाले सार्वजनिक सिंचाई कुएं पर काम कर रहे थे।
राजगढ़ हादसे में महिलाओं की वर्तमान स्थिति क्या है?
अधिकारियों के अनुसार बचाव अभियान जारी है और फंसी हुई महिलाओं तक जल्द पहुँचना सर्वोच्च प्राथमिकता है। उनकी स्वास्थ्य स्थिति के बारे में आधिकारिक जानकारी की प्रतीक्षा है।
राष्ट्र प्रेस
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